गरीबों के इलाज में ‘खेल’: कटघोरा के हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल पर गिरी गाज, आयुष्मान योजना से एक साल के लिए सस्पेंड
सतपाल सिंह
गरीबों के इलाज में ‘खेल’: कटघोरा के हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल पर गिरी गाज, आयुष्मान योजना से एक साल के लिए सस्पेंड..

• औचक निरीक्षण में खुली पोल: मरीजों से नगद वसूली, फाइलों में मिले 68 फर्जी मोबाइल नंबर
• नवजात शिशुओं के इलाज में भी लापरवाही, पैथोलॉजी-अल्ट्रासोनोग्राफी के रिकॉर्ड गायब
• प्रबंधन का स्पष्टीकरण खारिज; नए मरीजों की भर्ती पर रोक, प्रचार सामग्री हटाने के सख्त निर्देश
कोरबा (ओम गवेल) छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज के नाम पर गड़बड़ी करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने अपना हंटर चला दिया है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के कटघोरा स्थित हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे योजना से एक वर्ष के लिए निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत की गई इस कार्रवाई के बाद अब अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों की भर्ती पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, साथ ही अस्पताल परिसर से योजना से जुड़ी सभी प्रचार सामग्रियों को तुरंत हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है।
जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा: कागजों पर चल रहा था इलाज?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. एस. एन. केशरी के मुताबिक, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार मुस्तैद है। 30 सितंबर 2026 को विभागीय जांच दल ने जब हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया, तो वहां का ढर्रा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। जांच में गंभीर वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताएं उजागर हुईं, जिन्होंने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल की पांच बड़ी कड़ियां, जहां पकड़ा गया ‘घोटाला’:
1. जेब काटने की नीयत: मुफ्त इलाज की योजना होने के बावजूद मरीजों के परिजनों से नगद राशि ऐंठने के पुख्ता बयान और सबूत मिले।
2. 68 नंबर गायब या बंद: सरकारी क्लेम पास कराने के खेल में भर्ती फाइलों के अभिलेखों में गलत मोबाइल नंबर दर्ज किए गए थे। कुल 68 मोबाइल नंबर या तो फर्जी थे या बंद मिले।
3. नवजातों के स्वास्थ्य से खिलवाड़: संवेदनशील माने जाने वाले नवजात शिशुओं (Newborns) के उपचार से जुड़े प्रोटोकॉल और दस्तावेजों में भारी लापरवाही पाई गई।
4. गायब मिले डायग्नोस्टिक रिकॉर्ड: अस्पताल में किए गए पैथोलॉजी टेस्ट और अल्ट्रासोनोग्राफी (USG) से संबंधित बेहद जरूरी मेडिकल रिकॉर्ड गायब थे।
5. गोलमोल जवाब: विभाग द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर अस्पताल प्रबंधन ने जो स्पष्टीकरण दिया, वह पूरी तरह से तथ्यों से परे और असंतोषजनक पाया गया।
अथॉरिटी के नियमों के तहत ‘ब्लैकलिस्ट’ करने की तैयारी
डॉ. एस. एन. केशरी ने साफ किया कि इस गंभीर धोखाधड़ी को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा जुलाई 2026 में जारी किए गए सख्त दिशा-निर्देशों की कंडिका 6.4.1 के तहत यह निलंबन आदेश जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार गरीबों के स्वास्थ्य के अधिकार के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। यदि निलंबन अवधि के दौरान भी मानकों में सुधार नहीं हुआ, तो अस्पताल के खिलाफ आगे और भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में आयुष्मान फर्जीवाड़े पर यह एक बड़ी और नजीर बनने वाली कार्रवाई मानी जा रही है।





