Bastar Olympics 2026: बस्तर ओलंपिक के तीसरे संस्करण का आगाज, 6 लाख से ज्यादा खिलाड़ियों ने कराया पंजीयन; दिव्यांग और आत्मसमर्पित माओवादी भी दिखाएंगे दम

जगदलपुर : बस्तर में खेल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें बड़ा मंच देने के उद्देश्य से बस्तर ओलंपिक के तीसरे संस्करण का आगाज हो गया है। इस बार आयोजन को लेकर खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। संभाग के सातों जिलों से 6 लाख 492 खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता के लिए पंजीयन कराया है। खास बात यह है कि इस बार दिव्यांग खिलाड़ियों और आत्मसमर्पित माओवादियों को भी अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
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पिछले साल के मुकाबले बढ़ा खिलाड़ियों का उत्साह
बस्तर ओलंपिक में इस वर्ष पंजीयन का नया रिकॉर्ड बना है। पिछले साल जहां 3 लाख 92 हजार खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया था, वहीं इस बार यह संख्या बढ़कर 6 लाख 492 तक पहुंच गई है। आंकड़े बताते हैं कि बस्तर के ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में भी खेलों के प्रति युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।
11 खेल विधाओं में दिखेगा दम
इस बार प्रतियोगिता में कुल 11 खेल विधाओं को शामिल किया गया है। इनमें एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो और वॉलीबॉल समेत अन्य खेल शामिल हैं। खिलाड़ियों को जूनियर और सीनियर वर्ग में बांटकर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिससे अलग-अलग आयु वर्ग के प्रतिभागियों को अपनी क्षमता साबित करने का मौका मिलेगा।
दिव्यांग और आत्मसमर्पित माओवादी भी होंगे शामिल
इस आयोजन की सबसे खास बात इसकी समावेशी पहल है। नक्सल हिंसा से प्रभावित दिव्यांग व्यक्तियों के साथ आत्मसमर्पित माओवादी भी खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। ऐसे करीब 500 खिलाड़ियों की भागीदारी प्रस्तावित है। इसके जरिए उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।
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खेल के जरिए बदलेगी बस्तर की पहचान
बस्तर ओलंपिक का उद्देश्य केवल खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करना नहीं है, बल्कि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को सामने लाना भी है। यह आयोजन युवाओं को खेलों से जोड़ने, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का माध्यम बन रहा है। अब प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सबकी नजरें रहेंगी।





