ऊर्जाधानी’ खुद अंधेरे में: कोरबा के कुसमुंडा-गेवरा बस्ती में भारी बिजली संकट, जनप्रतिनिधियों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
सतपाल सिंह
ऊर्जाधानी’ खुद अंधेरे में: कोरबा के कुसमुंडा-गेवरा बस्ती में भारी बिजली संकट, जनप्रतिनिधियों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी..
देश को रौशन करने वाले कोयला खदान श्रमिकों के घरों में 18-18 घंटे का पावर कट, कुचेना में कई दिनों से ब्लैकआउट..
कोरबा। (ओम गवेल) देश के पावर हब और ऊर्जाधानी के रूप में विख्यात कोरबा जिला इन दिनों स्वयं घोर बिजली संकट से जूझ रहा है। हल्की हवा और मानसूनी बौछारें पड़ते ही संपूर्ण क्षेत्र घंटों अंधेरे में डूब जाता है। विद्युत विभाग की इस लचर व्यवस्था के खिलाफ अब आम जनता के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आक्रोश भी फूट पड़ा है। संबंधित अधिकारियों को लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। बिजली कटौती का सबसे वीभत्स रूप कुसमुंडा और गेवरा बस्ती क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शुमार गेवरा बस्ती के इलाकों में 24 घंटे में से महज 6 घंटे ही बिजली की आपूर्ति हो पा रही है। शेष 18 घंटे लोग भारी कटौती झेलने को मजबूर हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों की दिनचर्या पूरी तरह ठप हो गई है। वहीं, कुचेना, इमली छापर, प्रेम नगर और खम्हरिया जैसे क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती (पावर कट) ने विकराल रूप ले लिया है। कुचेना में तो कई दिनों से विद्युत दर्शन तक नहीं हुए हैं।राष्ट्र को रौशन करने वाले खुद लालटेन युग में इस पूरे संकट का सबसे विडंबनापूर्ण पहलू यह है कि कुसमुंडा और गेवरा क्षेत्र देश के कोयला उत्पादन में रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देने वाले हजारों खदान श्रमिक और तकनीकी कर्मचारी इसी क्षेत्र में निवास करते हैं। जिनके अथक परिश्रम से निकले कोयले से पूरा देश रोशन होता है, आज उनके ही परिवार उमस और अंधेरे में रातें काटने को मजबूर हैं।
प्रशासन को अल्टीमेटम –
विद्युत विभाग की इस उदासीनता पर विधायक प्रतिनिधि संतोष राठौर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि विभाग के उच्चाधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन प्रबंधन मौन साधे बैठा है। श्री राठौर ने बिजली विभाग को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि क्षेत्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति तत्काल बहाल नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थानीय जनता के साथ मिलकर एक उग्र और व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।






