*गेंदा फूल की उन्नत खेती देखने कटौद पहुंचे सक्ती जिले के किसान*
*सक्ती जिले में भी गेंदा फूल की खेती के लिए आदर्श वातावरण - के.डी. महंत*


जिला रिपोर्टर सक्ती- उदय मधुकर
सक्ती: जहां एक तरफ अधिकांश किसान पारंपरिक खेती कर केवल धान व गेहूं की फसल लेकर सीमित मुनाफा ही कमा पा रहे हैं ऐसे में रायगढ़ जिले के खरसिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम कटौद निवासी प्रगतिशील किसान नारायण गबेल ने खेती किसानी में नवाचारी गतिविधियों के साथ व्यावसायिक सोंच अपनाते हुए गेंदा फूल की खेती कर प्रदेश भर में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। गेंदा फूल की उन्नत व व्यावसायिक खेती करने वाले कटौद गांव का यह प्रगतिशील किसान अपने क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उनकी सफलता केवल आर्थिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है बल्कि यह बदलती सोच और नवाचार की प्रेरणादायक मिसाल भी बन गई है। उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों और शासकीय योजनाओं की सही तरीके से उपयोग करें तो खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है। कटौद गांव के इस युवा किसान के खेतों में लहलहाते गेंदा के फूलों की उन्नत खेती देखने सक्ती जिले से भी किसान पहुंच रहे हैं। इस क्रम में 25 अक्टूबर, रविवार को सक्ती से किसानों के साथ पत्रकार योम प्रकाश लहरे व उदय मधुकर भी गेंदा की उन्नत खेती देखने कटौद पहुंचे और इस संबंध में प्रगतिशील किसान नारायण गबेल से गेंदा फूल की उन्नत खेती के संबंध में जमीन की तैयारी, बीजों का चुनाव व उपलब्धता, सिंचाई प्रबंधन, कीट व्याधियों से बचाव तकनीक, बाजार प्रबंधन, लागत व मुनाफा आदि के संबंध में जानकारी प्राप्त किया। इस संबंध में गेंदा फूल की उन्नत खेती कर रहे किसान नारायण गबेल ने बताया कि वे बीते तीन-चार सालों से गेंदा फूल की खेती करते आ रहे हैं। शुरू में उन्होंने प्रयोग के तौर पर थोड़े से जमीन पर गेंदा फूल की खेती कृषि विज्ञान केन्द्र रायगढ़ के मार्ग दर्शन पर कृषि वैज्ञानिक के. डी. महंत के दिशा-निर्देश में नवाचारी गतिविधियों को अपनाते हुए शुरू किया था। जिससे उन्हें धान व गेंहूं की तुलना में ज्यादा आर्थिक लाभ हुआ जिससे उन्होंने इसे व्यवसायिक स्तर पर गेंदा फूल की खेती करने सोंची और इस साल उन्होंने लगभग 75 डिसमिल भूमि पर सुपरबाल और टेनिस बाल प्रजाति के गेंदा फूल की खेती की है। किसान नारायण गबेल ने बताया कि प्रति पौधा लागत लगभग 10 रू आता है वहीं इसे प्रति पौधा 40-50 रू तक बिकता है। इससे अच्छी आमदनी हो जाती है। प्रगतिशील किसान नारायण गबेल ने युवा किसानों को किसानों से फसल परिवर्तन अपनाते हुए धान व गेंहूं आदि की खेती की जगह फूलों की खेती के साथ -साथ उद्यानिकी फसलों के साथ -साथ सब्जी वर्गीय फसलों की खेती करने की सलाह दी है।
*सक्ती जिले में भी गेंदा फूल की खेती के असीम संभावनाएं – के. डी. महंत कृषि वैज्ञानिक*
सक्ती जिले के संदर्भ में बात करें तो इस जिले में भी गेंदा फूल की खेती के लिए पर्याप्त संभावनाएं हैं। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र जांजगीर-चांपा के.डी. महंत ने बताया कि फूल की खेती के लिए जांजगीर-चांपा व सक्ती जिले में भी आदर्श वातावरण है।गेंदा फूल की खेती के लिए उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्र जांजगीर-चांपा में लगभग एक एकड़ में गेंदा फूल की खेती की है। कृषि वैज्ञानिक श्री महंत ने बताया कि कोरेल, टेनिस बाल, सुप्रभात, तथा पूजा गेंदा फूल की उन्नत किस्में हैं। उद्यानिकी विभाग फूलों की खेती के लिए सब्सिडी भी प्रदान कर रही है। गेंदा फूल की खेती के संबंध में जागरूकता बढ़ाने कृषि विज्ञान केन्द्र जांजगीर-चांपा में आगामी 28 अक्टूबर को गेंदा उत्सव मनाने की तैयारी भी कर रहा है।





