छत्तीसगढ़ में बड़ी कार्रवाई: 170 बसों के परमिट निरस्त, ब्लैकलिस्ट हुईं बसें; यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ पड़ा भारी

रायपुर : छत्तीसगढ़ में यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले बस संचालकों के खिलाफ परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों की कमी और परिवहन नियमों का पालन नहीं करने पर प्रदेश की 170 बसों के परमिट निरस्त कर उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। जांच में इन बसों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD/GPS) और पैनिक बटन जैसी जरूरी सुरक्षा सुविधाओं की कमी सामने आई थी। विभाग ने तीन महीने तक विशेष जांच अभियान चलाने और संबंधित बस संचालकों को नोटिस देने के बाद यह कार्रवाई की है। अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने इसकी जानकारी दी।
बिना वैध परमिट बस चलाने पर होगी कार्रवाई
परिवहन विभाग के मुताबिक, जिन बसों के परमिट निरस्त किए गए हैं, वे संबंधित परमिट के आधार पर अब संचालन नहीं कर सकेंगी। इसके बावजूद यदि कोई बस संचालक नियमों का उल्लंघन करते हुए वाहन चलाता पाया जाता है, तो बस जब्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध परमिट बस चलाने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत सजा का प्रावधान हो सकता है। बस संचालकों को यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सभी निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
जुलाई से सितंबर तक चला विशेष जांच अभियान
राज्य शासन के निर्देश पर परिवहन विभाग ने जुलाई से सितंबर 2026 तक प्रदेशभर में विशेष जांच अभियान चलाया। इस दौरान रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर और अंबिकापुर समेत प्रमुख मार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्री बसों की जांच की गई।
उड़नदस्ता टीमों और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों के अधिकारियों ने बसों में जीपीएस आधारित व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन की उपलब्धता के साथ उनकी कार्यशीलता भी जांची। इस दौरान कई बसों में सुरक्षा उपकरण नहीं मिले, जबकि कुछ वाहनों में उपकरण लगे होने के बावजूद वे बंद पाए गए।
जांच में सामने आईं सुरक्षा संबंधी खामियां
परिवहन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जांच के दौरान बसों में कई तरह की कमियां सामने आईं।
- 412 बसों में GPS नहीं: इन वाहनों में अनिवार्य ट्रैकिंग डिवाइस नहीं पाया गया।
- 210 बसों में GPS बंद: उपकरण लगे होने के बावजूद काम नहीं कर रहे थे।
- 85 बसों में पैनिक बटन खराब: आपातकालीन सहायता के लिए जरूरी व्यवस्था में खामी मिली।
- 170 बसों के परमिट निरस्त: नियमों का पालन नहीं करने वाले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इन खामियों के सामने आने के बाद विभाग ने बस संचालकों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए।
नोटिस के बाद भी नियमों का पालन नहीं
परिवहन विभाग ने पहले चरण में 300 बस संचालकों को अंतिम नोटिस जारी कर सुरक्षा उपकरण लगवाने के लिए 15 दिन का समय दिया था। विभागीय जानकारी के मुताबिक, इनमें से 140 बस संचालकों ने जीपीएस लगवाकर पोर्टल पर पंजीयन करा लिया।
वहीं, शेष 170 बस संचालकों द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नहीं किए जाने पर उनके परमिट निरस्त करने की कार्रवाई की गई।
हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में नोटिस जारी करने, नियमों का पालन करने और परमिट निरस्त करने से संबंधित संख्याओं का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है। ऐसे में इन आंकड़ों का विभागीय अभिलेखों से मिलान किया जाना जरूरी है।
महिला यात्रियों की सुरक्षा में पैनिक बटन की अहम भूमिका
बसों में पैनिक बटन लगाने का उद्देश्य आपात स्थिति में यात्रियों को जल्द सहायता उपलब्ध कराना है। खासकर महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पैनिक बटन सक्रिय होने पर निर्धारित व्यवस्था के तहत कंट्रोल रूम तक आपात सूचना और वाहन की लोकेशन पहुंच सकती है। इससे संबंधित एजेंसियों को जरूरत के अनुसार सहायता पहुंचाने में मदद मिलती है।
वहीं, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस के माध्यम से बस की स्थिति पर नजर रखी जा सकती है। इससे वाहन की आवाजाही और परमिट से जुड़ी शर्तों के अनुपालन की निगरानी में भी सहायता मिलती है।
प्रदेश में करीब 12 हजार बसें
परिवहन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में लगभग 12 हजार बसें हैं। इनमें करीब 4,500 यात्री बसें, 6,500 स्कूल बसें और लगभग 1,000 ऑल इंडिया टूरिस्ट एवं निजी श्रेणी की बसें शामिल हैं।
अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े वाहन मालिकों को सुरक्षा मानकों और परिवहन नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग आगे भी जांच अभियान जारी रखेगा और नियमों की अनदेखी करने वाले बस संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।





