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शुद्ध पेट्रोल और ई – 10 के बजाय मिलेगा ई – 20, इथेनॉल पर 1 लाख करोड़ का निवेश – सरकार  3 से 5 प्रतिशत तक घट सकता है माइलेज

शुद्ध पेट्रोल और ई – 10 के बजाय मिलेगा ई – 20, इथेनॉल पर 1 लाख करोड़ का निवेश – सरकार, 3 से 5 प्रतिशत तक घट सकता है माइलेज

Kb automobile kusmunda

सफाई- कुछ वाहनों में ईथन दक्षता घट सकती है, लेकिन फायदे नुकसान से कहीं ज्यादा

सरकार बोली एथेनॉल पर एक लाख करोड़ का निवेश हो चुका, अब पीछे हटना मुश्किल

पेट्रोलियम मंत्रालय ने इंजन खराब होने के दावों को बताया बेबुनियाद

ई10 या सामान्य पेट्रोल का विकल्प देने से भी किया इनकार

देशभर में ई 20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सबसे बड़े सवाल पर आखिरकार सरकार ने भी अपनी मुहर लगा दी है। अगर आपको लग रहा था कि ई20 भरवाने के बाद आपकी गाड़ी पहले जितनी दूरी तय नहीं कर रही, तो यह सिर्फ आपका भ्रम नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि ई20 पेट्रोल से कुछ वाहनों का माइलेज 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण कम करने जैसे फायदे इस नुकसान से कहीं बड़े हैं। इस मुद्दे पर अब राजनीति भी गरमा रही है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी से लेकर कई दलों ने ई20 ईंधन को लेकर सवालों के साथ सरकार पर हमले चालू कर दिए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी प्रश्नोत्तर (एफएक्यू) दस्तावेज में कहा कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (इं20) से कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकती है।

क्यों हो रहा है ई20 का विरोध ?

2023 से पहले चनी गाड़ियों के मालिक माइलेज पटने की शिकायत कर रहे हैं।

मेंटेनेंस खर्च बढ़ने और इंजन पर असर की आशंका जता रहे हैं।

ब्राजील की तरह सामान्य पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध नहीं है।

सरकार का दावा- गलत सूचनाओं के जरिए लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है।हालांकि इसके बदले ऊर्जा सुरक्षा, कार्बन उत्सर्जन में कमी, बेहतर ऑक्टेन रेटिंग, एंटी-नॉक क्षमता, तेज दहन और बेहतर इंजन प्रदर्शन जैसे लाभ मिलते हैं। मंत्रालय ने ई20 को ई10 और सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ, बेहतर गुणवत्ता वाला और अधिक दक्ष ईंधन बताया।

इंजन खराब होने का कोई प्रमाण नहीं मंत्रालयः मंत्रालय ने कहा कि ई20 लागू करने से

पहले इंजन की टिकाऊ क्षमता, फ्यूल सिस्टम, धातुओं की अनुकूलता, जंगरोधी क्षमता, वाहन संचालन और उत्सर्जन समेत सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्यापक परीक्षण किए गए। मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प सहित वाहन निर्माताओं से मिले फीडबैक के आधार पर सरकार का दावा है कि वास्तविक उपयोग में ई20 के कारण इंजन में जंग लगने, असामान्य घिसाव या पुर्जों के जल्दी खराब होने जैसी शिकायतों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।

24 साल की तैयारी के बाद लागू हुआ कार्यक्रमः सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम कोई जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं है। इसकी शुरूआत वर्ष 2001 में पायलट परियोजना के रूप में हुई थी। वर्ष 2006 तक कुछराज्यों में पांच प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण लागू हो चुका था। 2018 की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के बाद एथेनॉल उत्पादन में तेजी आई। भारत ने 2022 में निर्धारित समय से पहले 10 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया और 2025-26 में 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य भी पूरा कर लिया।

Om Gavel Bureau Korba

State Affairs Reporter Om Gavel is a state and local affairs reporter focusing on administration, development projects, and civic issues, local news in Chhattisgarh. His work highlights grassroots concerns and governance-related developments and all local activity in concern with crime and administration. Areas of Expertise • State administration • Infrastructure and development • Civic and public issues • Field reporting and all local issue Editorial Responsibility Om Gavel follows source verification guidelines and ensures responsible, fact-based reporting. 📧 Contact: humara.kusmunda.omgavel@gmail.com Profile Last Updated: 16 January 2026