ब्रेकिंग: कोरबा में थम नहीं रहा सड़कों पर ‘खूनी खेल’, 2 दिन में 4 हादसों ने छीनी 5 जिंदगियां, “अभी सड़क हादसे ने एक बुजुर्ग की मौत…” हफ़्ते भर में जिले के बालको, कुसमुंडा, बांकी, दीपका और कटघोरा की सड़कों ने लील लीं 8 मासूम जानें..
सतपाल सिंह के साथ ओम गवेल की खबर..

ब्रेकिंग: कोरबा में थम नहीं रहा सड़कों पर ‘खूनी खेल’, 2 दिन में 4 हादसों ने छीनी 5 जिंदगियां, “अभी सड़क हादसे ने एक बुजुर्ग की मौत…”
हफ़्ते भर में जिले के बालको, कुसमुंडा, बांकी, दीपका और कटघोरा की सड़कों ने लील लीं 8 मासूम जानें..

कोरबा। अक्टूबर महीने की शुरुआत से ही जिले की शायद ही कोई ऐसी सड़क बची हो, जहाँ हादसों में लोगों की जान न गई हो। भारी और अनियंत्रित वाहन आम जनता के लिए काल बनकर कहर बरपा रहे हैं। बीते सोमवार से लेकर आज मंगलवार की शाम तक, महज दो दिनों के भीतर अलग-अलग सड़क हादसों में महिला, युवा और बुजुर्ग सहित कुल 5 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है।
ताजा हादसा: कुसमुंडा मार्ग पर कार ने बुजुर्ग को रौंदा
ताजा घटनाक्रम आज मंगलवार शाम लगभग 5 बजे का है। कोरबा-कुसमुंडा मुख्य मार्ग पर 6 नंबर बैरियर के पास, नरईबोध बसावट के सामने एक तेज रफ्तार कार ने काम से लौट रहे साइकिल सवार बुजुर्ग को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बुजुर्ग हवा में कई फीट उछलकर सड़क किनारे औंधे मुंह जा गिरे। उनके सिर पर गंभीर चोट आई और अत्यधिक खून बह जाने से सड़क लाल हो गई।
हादसे के बाद आरोपी चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। घायल बुजुर्ग की सांसें बेहद धीमी चल रही थीं। स्थानीय लोगों की सूचना पर कुसमुंडा पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और उन्हें अपने वाहन से जिला अस्पताल ले गई। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। देर शाम मृतक की पहचान बरमपुर (सर्वमंगला नगर) निवासी ननकी डोकरा के रूप में हुई, जो कुसमुंडा की तरफ से काम खत्म कर घर लौट रहे थे। इस दुखद खबर के बाद बुजुर्ग के परिवार में मातम पसर गया है। पुलिस आरोपी वाहन की पहचान की बात कह रही है।
सप्ताह भर में हुए हादसों में इन 8 लोगों ने गंवाई जान:
अक्टूबर के शुरुआती दिनों में ही जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में दर्दनाक मौत के आंकड़े डराने वाले हैं:
1. संदीप पटेल (23 वर्ष): प्रेमनगर कुसमुंडा निवासी, बालको में हुए हादसे के शिकार।
2. शंकर राठौर: छिंदपुर भिलाई बाजार निवासी, दीपका क्षेत्र में मौत।
3. विश्व प्रकाश: रलिया हरदी बाजार निवासी, कुसमुंडा खदान क्षेत्र में हादसा।
4. मधु लता रात्रे: महिला, सर्वमंगला चौक पर हादसे का शिकार हुईं।
5. तुलसी दास और आनंद राम: रोहिणा निवासी ग्रामीण, बांकी मोंगरा में जान गंवाई।
6. अज्ञात युवक: वाड्रफनगर निवासी, कटघोरा कसनिया मोड़ पर मौत।
7. ननकी डोकरा: बरमपुर निवासी बुजुर्ग, आज शाम कुसमुंडा मार्ग पर मौत।
सिर्फ कागजी ‘सड़क सुरक्षा’ से कब तक उजड़ेंगे आशियाने?
यकीन मानिए, जिले में लगातार हो रहे इन भीषण हादसों और मौतों के आंकड़े लिखते-लिखते अब हाथ कांपने लगे हैं। किसी के लिए यह सिर्फ एक ‘एक्सीडेंट की खबर’ हो सकती है, लेकिन हकीकत में किसी का भाई, किसी का पिता, किसी की मां तो किसी की बहन हमेशा के लिए दुनिया से चले गए हैं। एक पल में एक पूरा परिवार पूरी तरह तबाह हो जा रहा है। उन पर क्या बीत रही होगी, इसकी कल्पना करना भी रूह कंपा देता है। सुबह जो लोग आजीविका के लिए घर से हंसते-खेलते निकलते हैं, शाम को उनकी मौत की खबर घर पहुंच रही है।
इन खौफनाक खबरों को पढ़ने और सुनने के बाद भी क्या व्यवस्था के जिम्मेदारों के चेहरे पर कोई शिकन नहीं आती? सड़क हादसों को रोकने के लिए क्या सिर्फ साल में एक बार ‘सड़क सुरक्षा सप्ताह’ या महीना मना लेना ही काफी है? क्या खानापूर्ति के लिए की जाने वाली वाहन चेकिंग ही पर्याप्त है? आखिर कमी कहाँ रह जा रही है कि महीने के तीस दिनों में तीस से ज्यादा मौतें हो रही हैं? इन मौतों का हिसाब कौन देगा? यह जानने की जिम्मेदारी किसकी है? यकीनन यह जिम्मेदारी सरकार और शासन-प्रशासन में बैठे उन अधिकारियों की है, जो जनता की सुरक्षा और सेवा के बदले मोटी तनख्वाह लेते हैं। सिर्फ फाइलों और बयानों में सड़क सुरक्षा की बातें करने से जमीन नहीं बदलेगी। जब तक अफसर सड़क पर नहीं उतरेंगे, सड़कों की बदहाली दूर नहीं होगी और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया जाएगा, तब तक यह खूनी सिलसिला नहीं थमेगा। अगर आज सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कल फिर किसी बेकसूर की मौत की खबर सामने होगी। जिले के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को अब राजनीति से ऊपर उठकर इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने की सख्त जरूरत है।(ओम गवेल)





