धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को भेजा इस्तीफा,छात्रों के आंदोलन में विरोधी ताकतों को बढ़ने से रोकने फ़ैसला कौन हैं धर्मेंद्र प्रधान,जानिए उनका राजनीतिक सफ़र
देश दुनिया न्यूज - डेस्क
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को भेजा इस्तीफा,छात्रों के आंदोलन में विरोधी ताकतों को बढ़ने से रोकने फ़ैसला
कौन हैं धर्मेंद्र प्रधान,जानिए उनका राजनीतिक सफ़र..

धर्मेंद्र प्रधान भाजपा नेता के बेटे, 29 साल पहले पेपर लीक के खिलाफ धरना दिया, अब लीक ने ही ली कुर्सी
देश दुनिया – नीट यूजी पेपर लीक विवाद व बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दिलचस्प बात यह है कि 1997 में एबीवीपी के छात्र नेता के रूप में ओडिशा में पेपर लीक के खिलाफ लाठीचार्ज सहने वाले धर्मेंद्र प्रधान को 29 साल बाद खुद उसी मुद्दे पर कुर्सी गंवानी पड़ी।
नीट पेपर लीक को लेकर लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों और छात्रों के बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस नेता ने अपने छात्र जीवन में पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन किया था, वही तीन दशक बाद देश के शिक्षा मंत्री के रूप में पेपर लीक विवाद के चलते इस्तीफे पर मजबूर हुआ।
छात्र राजनीति से पहुंचे राष्ट्रीय राजनीति तक
धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में हुआ। यह क्षेत्र कोयला खनन के लिए जाना जाता है। उनका परिवार लंबे समय से राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके पिता डॉ देबेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के ओडिशा के शुरुआती नेताओं में शामिल थे। उनकी माता का नाम बसंत मंजरी प्रधान है। उनकी पत्नी मृदुला ठाकुर प्रधान हैं, दोनों के दो बच्चे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने उत्कल विश्वविद्यालय, वाणी विहार से मानव विज्ञान में एमए किया। पढ़ाई के दौरान ही वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और यहीं से उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई।
जब पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतरे थे धर्मेंद्र प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय 1997 में सामने आया। उस समय वे एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव थे। स्वर्गीय जेबी पटनायक की सरकार में ओडिशा में कथित परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में भुवनेश्वर में बड़े छात्र आंदोलन का नेतृत्व उन्होंने किया था।
बीबीसी से बातचीत में इस प्रदर्शन में शामिल रहे प्रशांत राउत ने बताया कि जुलाई 1997 के तीसरे हफ्ते में धर्मेंद्र प्रधान की अगुवाई में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने 12वीं के प्रश्नपत्र लीक के विरोध में ओडिशा विधानसभा के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया था। 1988 से 1997 के दौर में लगातार हो रहे पेपर लीक के कारण छात्र इसे ‘प्रश्नपत्र लीक का दशक’ कहते थे। प्रदर्शन को हटाने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स ने बेतहाशा लाठीचार्ज किया, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान और प्रशांत राउत समेत कुल 64 कार्यकर्ता घायल होकर अस्पताल पहुंचे थे।
करीब तीन दशक बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। कभी पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले धर्मेंद्र प्रधान स्वयं केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में नीट, यूजीसी-नेट और अन्य परीक्षाओं में कथितअनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शनों और जवाबदेही की मांग का सामना कर रहे थे। अब इसी के चलते उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा।
भाजपा संगठन में कैसे आगे बढ़े प्रधान?
एबीवीपी के बाद धर्मेंद्र प्रधान भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) में सक्रिय हुए। उन्होंने संगठन में तेजी से अपनी पहचान बनाई।
साल 2000 में पहली बार ओडिशा विधानसभा के सदस्य बने, उन्होंने बीजेडी-बीजेपी गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में पाललहड़ा विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की।
2001 में ओडिशा भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने।
2002 में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किए गए।
2004 में भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
2004 में ओडिशा के देवगढ़ लोकसभा क्षेत्र से पहली बार सांसद चुने गए।
2009 में लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद पार्टी ने उन्हें विभिन्न राज्यों में संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी।
2012 में राज्यसभा सदस्य बने।
जून 2024 में 18वीं लोकसभा के लिए फिर सांसद चुने गए।
मोदी सरकार में लगातार मिली अहम जिम्मेदारियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में केंद्र में सरकार बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। वे लगभग सात वर्ष तक इस मंत्रालय का नेतृत्व करते रहे और देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले पेट्रोलियम मंत्रियों में शामिल रहे। उनके कार्यकाल में कई बड़े फैसले हुए।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
उनके कार्यकाल की सबसे चर्चित योजनाओं में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना रही, जिसके तहत करोड़ों गरीब परिवारों की महिलाओं को एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए।
ऊर्जा क्षेत्र में सुधार
उन्होने ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, गैस अवसंरचना विकसित करने और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े कई सुधारों को आगे बढ़ाया।
ओडिशा में भाजपा के विस्तार के प्रमुख रणनीतिकार
धर्मेंद्र प्रधान को ओडिशा में भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। लंबे समय तक उन्होंने राज्य में संगठन को मजबूत करने का काम किया। 2024 में जब भाजपा ने पहली बार ओडिशा में सरकार बनाई, तब इसे उनकी राजनीतिक रणनीति की बड़ी सफलता माना गया।
शिक्षा मंत्री के रूप में कैसा रहा कार्यकाल?
7 जुलाई 2021 को धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंनेः राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाया। स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े कई कार्यक्रमों की निगरानी की। शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल और तकनीकी सुधारों पर जोर दिया।
प्रधान के कार्यकाल के विवाद
उनके कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय लगातार कई विवादों के केंद्र में रहा। सबसे बड़े मुद्दे रहे:
नीट-यूजी पेपर लीक विवाद
यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द होना
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल
विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप
परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर उठते सवाल






