कुचैना रेलवे अंडरब्रिज की बदहाली से जनता बेहाल, समाधान न होने पर पार्षदों ने 4 नवंबर से चक्काजाम की दी चेतावनी
सतपाल सिंह
कुचैना रेलवे अंडरब्रिज की बदहाली से जनता बेहाल, समाधान न होने पर पार्षदों ने 4 नवंबर से चक्काजाम की दी चेतावनी

कोरबा: जिले के गेवरा दीपका को जोड़ने के लिए कुचेना बाईपास मार्ग पर स्थित रेलवे अंडरब्रिज निर्माण के बाद से ही जर्जर स्थिति में हो गई है,जिससे आवागमन में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसे लेकर नगर निगम क्षेत्र अन्तर्गत वार्ड 64 की पार्षद आरती लखन और बांकी मोंगरा पालिका क्षेत्र अंतर्गत वार्ड 19 पार्षद लक्ष्मण सिंह कंवर ने कलेक्टर को एक तीखा शिकायत पत्र सौंपा है। पत्र में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर 7 दिनों के भीतर इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो आम जनता आगामी 04 नवंबर 2026 से हड़ताल और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
बदहाली और भ्रष्टाचार की मार झेल रहा मार्ग
शिकायत पत्र के अनुसार, दीपका बाईपास मार्ग के कुचैना रेलवे अंडरब्रिज पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। यहाँ रोज़ाना लगभग 20 से 25 हजार लोगों का आना-जाना होता है। यह मार्ग एस.ई.सी.एल. दीपका प्रोजेक्ट, गेवरा प्रोजेक्ट और कई अन्य निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए लाइफलाइन है। इसके अलावा, बिलासपुर जाने वाले राहगीर भी हाईवे कनेक्टिविटी के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।
पार्षद ने आरोप लगाया है कि रेलवे अंडरब्रिज का निर्माण बेहद गुणवत्ताहीन और अत्यधिक संकरा किया गया है। इतना ही नहीं, मार्ग पर किया गया डामरीकरण भी पूरी तरह घटिया दर्जे का था, जिसके कारण एक महीने के भीतर ही पूरी सड़क उखड़ गई।
मिट्टी-कंक्रीट के पैचवर्क से और बढ़ा हादसों का खतरा
वर्तमान में सड़क पर जगह-जगह जानलेवा गड्ढे हो चुके हैं। प्रशासन द्वारा मरम्मत के नाम पर गड्ढों में केवल मिट्टी या कंक्रीट डाला जा रहा है, जिससे स्थिति सुधरने की बजाय और ज्यादा बिगड़ गई है। इस लापरवाही के कारण आए दिन लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं।
इन अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि
मामले की गंभीरता को देखते हुए इस शिकायत पत्र की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक (कोरबा), अनुविभागीय अधिकारी (कटघोरा) और थाना प्रभारी (कुसमुंडा) को भी आवश्यक कार्रवाई और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भेजी गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस अल्टीमेटम के बाद जागता है या फिर जनता को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।





