
पश्चिम बंगाल चुनाव में मिली जीत के बाद पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की पहली बैठक में वंदे मातरम को लेकर एक अहम निर्णय लिया गया है. बैठक में वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के समान दर्जा देने का फैसला किया गया. इसके साथ ही राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है. कैबिनेट के इस फैसले के अनुसार, बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम पर अब वही नियम और पाबंदियां लागू होंगी जो वर्तमान में राष्ट्रगान पर लागू हैं. यानी इसके अपमान या गायन में बाधा डालने की स्थिति में सजा का प्रावधान रहेगा. अभी राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान पर जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है, और अब वंदे मातरम भी इसमें शामिल किया जाएगा.
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अधिनियम में बदलाव, राष्ट्रगान जैसे नियम होंगे लागू
इस संशोधन के तहत अधिनियम की धारा-3 में बदलाव किया जाएगा. मौजूदा प्रावधान के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान के गायन में बाधा डालता है या ऐसी सभा में अशांति फैलाता है, तो उसे तीन साल तक की कैद, या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है. दोबारा अपराध करने पर कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान है. न्यायिक प्रक्रिया के अलावा, यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब देश वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है. इससे पहले वर्ष 2005 में कानून में बदलाव कर राष्ट्रीय ध्वज के अपमानजनक उपयोग को भी प्रतिबंधित किया गया था.
संसद में उठी मांग, सरकार ने दिए थे पहले संकेत
पिछले साल दिसंबर में संसद में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष चर्चा भी हुई थी. इस दौरान इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने की मांग उठी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा था कि इस गीत को तुष्टीकरण की राजनीति के कारण दरकिनार किया गया और इसे सांप्रदायिक रंग दिया गया. इस साल जनवरी में गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम के गायन और आचरण को लेकर दिशा-निर्देश भी जारी किए थे. इसके तहत प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों में इसके सभी छह अंतरों के गायन का निर्देश दिया गया था.
चुनाव में ‘वंदे मातरम्’ बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
इसके बाद बजट सत्र के समापन पर संसद के दोनों सदनों में वंदे मातरम के सभी छह अंतरों का पाठ किया गया. पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने वंदे मातरम को बंगाली अस्मिता और राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया था. पार्टी ने इसके 150 वर्ष पूरे होने पर राज्यभर में सामूहिक गायन और पदयात्राओं का आयोजन किया. साथ ही, बंकिम चंद्र चटर्जी की विरासत को भी चुनावी अभियान में प्रमुखता से उठाया गया.






