विधायक प्रेमचंद पटेल ने भू-विस्थापितों के हक में उठाई आवाज, SECL नियमों में बड़े बदलाव की मांग
सतपाल सिंह

विधायक प्रेमचंद पटेल ने भू-विस्थापितों के हक में उठाई आवाज, SECL नियमों में बड़े बदलाव की मांग.. 
छत्तीसगढ़//कोरबा – जिले के कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रेमचंद पटेल ने कोयलांचल के भू-विस्थापित परिवारों को न्याय दिलाने और उनके रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए एक निर्णायक कदम उठाया है विधायक पटेल ने एस.ई.सी.एल. (SECL) के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (CMD) को पत्र लिखकर वर्तमान रोजगार नीति में व्यापक संशोधन करने की मांग की है ।
वर्तमान नीति पर उठाए सवाल
विधायक पटेल ने पत्र में उल्लेख किया कि कोल इण्डिया की वर्तमान नीति के तहत केवल 20% प्रभावितों को ही स्थायी रोजगार मिल पा रहा है जबकि 80% लोग रोजगार से वंचित रह जाते हैं इसके कारण क्षेत्र में आए दिन आंदोलन और खदान बंदी की स्थिति निर्मित होती है जिससे न केवल उत्पादन प्रभावित होता है बल्कि देश को राजस्व की भी हानि होती है ।
प्रमुख मांगें और प्रस्तावित संशोधन
विधायक ने भू-विस्थापितों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:-
01. टेंडर सीमा में वृद्धि:- वर्तमान में भू-विस्थापित फर्मों और सहकारी समितियों के लिए 5 लाख रुपये तक के टेंडर आरक्षित हैं विधायक ने इसे बढ़ाकर न्यूनतम 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया है ।
02. वार्षिक टेंडर सीमा:- प्रत्येक वित्तीय वर्ष में टेंडर की अधिकतम सीमा को 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने की मांग की गई है ताकि स्थानीय लोग बड़े कार्यों में सहभागिता कर सकें ।
03. आउटसोर्सिंग में 80% भर्ती:- चूंकि अब अधिकांश कार्य आउटसोर्सिंग से हो रहे हैं इसलिए निविदा शर्तों में यह अनिवार्य किया जाए कि आउटसोर्सिंग कंपनियां प्रभावित गांवों और क्षेत्रों के कम से कम 80% बेरोजगारों को नौकरी दें ।
04. वाहन टेंडर का आरक्षण:- SECL में लगने वाले सभी चार पहिया वाहनों के टेंडर शत-प्रतिशत भू-विस्थापितों के लिए आरक्षित किए जाएं ।
इनको भेजी गई प्रतिलिपि
विधायक पटेल ने इस विषय की गंभीरता को देखते हुए इसकी प्रतिलिपि केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, कोरबा कलेक्टर और SECL गेवरा, दीपका एवं कुसमुंडा क्षेत्र के महाप्रबंधकों को भी प्रेषित की है ।
विधायक का कहना है कि मेरा लक्ष्य है कि हमारे क्षेत्र की जमीन देने वाले किसान और युवा दर-दर की ठोकरें न खाएं जब तक भू-विस्थापितों को उनका हक और सम्मानजनक रोजगार नहीं मिलता तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी नियमों में ये संशोधन स्थानीय लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएंगे ।






