छत्तीसगढ

*यूजीसी लागू करने के प्रस्ताव का आदिवासी समाज ने किया तीखा विरोध, बताया अस्तित्व पर खतरा*

*जिला सक्ती में सर्व आदिवासीक्ष समाज की बैठक, सरकार से पुनर्विचार की मांग*

जिला रिपोर्टर शक्ति उदय मधुकर

Home Loan @ 7.45%

सक्ती |
छत्तीसगढ़ में यूजीसी (UGC) लागू करने के प्रस्ताव को लेकर आदिवासी समाज में व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है। जिला सक्ती में सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले आयोजित बैठक में इस मुद्दे पर गहन चर्चा की गई, जहां समाज के पदाधिकारियों और लोगों ने एक स्वर में इसका विरोध किया।
जिला संयोजक जागेश्वर सिंह राज ने कहा कि प्रदेश में यूजीसी लागू करने का कैबिनेट प्रस्ताव आदिवासी समाज के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे आदिवासी संस्कृति, परंपरा, रहन-सहन और सामाजिक संरचना पर सीधा प्रभाव पड़ेगा, जिससे समाज की पहचान कमजोर होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में लगभग 29 सीटें अनुसूचित जनजाति के व अनुसूचित जाति के 11 सीटो के लिए आरक्षित हैं और प्रदेश की एक बड़ी आबादी आदिवासी समाज से आती है। ऐसे में कोई भी नीति बनाते समय उनके हितों और अधिकारों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

संस्कृति और परंपराओं पर खतरे की आशंका
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक और सांस्कृतिक संरचना विशेष रूप से आदिवासी जीवनशैली पर आधारित है। यहां की पारंपरिक रीति-रिवाज, खान-पान, रहन-सहन और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखना जरूरी है।
समाज के प्रतिनिधियों का मानना है कि यूजीसी लागू होने से बाहरी लोगों का हस्तक्षेप बढ़ेगा, जिससे स्थानीय परंपराओं और संस्कृति पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
पेसा कानून और अनुसूचियों का हवाला
आदिवासी समाज ने अपने वक्तव्य में पेसा कानून, पांचवीं और छठवीं अनुसूची का भी उल्लेख किया। यूजीसी कानून का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्र को समाप्त करना है।
ऐसे में किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले इन संवैधानिक प्रावधानों का सम्मान करना आवश्यक है।
रोजगार और शिक्षा को लेकर उठाए सवाल
समाज के लोगों ने यह भी कहा कि प्रदेश में अभी भी शिक्षा और रोजगार की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई आदिवासी क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि कोई नई नीति लागू करनी है, तो पहले प्रदेश के युवाओं को रोजगार और बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि पलायन की समस्या कम हो सके।

पूर्व प्रधानमंत्री के सपनों का हवाला
बैठक में वक्ताओं ने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के उस विजन का भी जिक्र किया, जिसके तहत छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था। उनका कहना था कि राज्य निर्माण का उद्देश्य आदिवासी और स्थानीय लोगों का विकास था, जिसे वर्तमान नीतियों से नुकसान पहुंच सकता है।
सरकार से पुनर्विचार की मांग
अंत में सर्व आदिवासी समाज ने राज्य सरकार से अपील की कि यूजीसी लागू करने के निर्णय पर पुनः विचार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो समाज व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होगा।
बैठक का समापन “जय आदिवासी, जय छत्तीसगढ़” के नारों के साथ हुआ, जिसमें समाज के लोगों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया।

Mahendra Karsh Bureau

Political Correspondent Mahendra Karsh is a correspondent at INN24 News, reporting on elections, legislative developments, and political,local crime, trends at the state and national levels. He is committed to balanced reporting and verified information. Areas of Expertise • Electoral politics • Government policies • Political analysis • Local News and crime Editorial Responsibility He ensures accuracy, fairness, and transparency in all political coverage and follows ethical journalism practices. 📧 Contact: mkkarsh947@gmail.com Profile Last Updated: 16 January 2026