Health and fitness

डॉक्टर-अस्पतालों के लिए नई सोशल मीडिया पॉलिसी, ‘गारंटीड इलाज’ और ‘नंबर-1 डॉक्टर’ जैसे दावे करने पर लगी रोक

नई दिल्ली: डॉक्टरों और अस्पतालों के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार को लेकर नई गाइडलाइन जारी की गई है। अब डॉक्टर या अस्पताल ‘100 फीसदी गारंटीड इलाज’, ‘शर्तिया इलाज’ या खुद को ‘नंबर-1 एक्सपर्ट’ बताकर मरीजों को आकर्षित नहीं कर सकेंगे। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने भ्रामक विज्ञापन और प्रचार पर रोक लगाने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

रास गरबा के प्रचार में पिस्टल और स्मोक रिंग्स! बिलासपुर-रायपुर हाईवे की विवादित रील वायरल, SSP ने लिया संज्ञान

नई गाइडलाइन के तहत डॉक्टर और अस्पताल अपने प्रचार के लिए बॉलीवुड सेलिब्रिटी, मरीजों के पॉजिटिव अनुभव या प्रशंसापत्रों का इस्तेमाल भी नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर के जरिए बढ़ा-चढ़ाकर किए जाने वाले प्रचार पर भी रोक लगाई गई है। इसका उद्देश्य मरीजों को इलाज से जुड़ी सही और वास्तविक जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे भ्रामक दावों के आधार पर इलाज का फैसला न लें।

‘100 फीसदी गारंटीड इलाज’ जैसे दावों पर रोक

NMC की गाइडलाइन में डॉक्टरों और अस्पतालों की ओर से किए जाने वाले बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। अब कोई डॉक्टर या अस्पताल ‘गारंटीड इलाज’, ‘100 फीसदी सफलता’, ‘नंबर-1 डॉक्टर’ या ‘नंबर-1 एक्सपर्ट’ जैसे दावे नहीं कर सकेगा।

इसके अलावा मरीजों की संख्या, डॉक्टर या अस्पताल की उपलब्धियों और इलाज के परिणामों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने वाले प्रचार पर भी रोक रहेगी। ऐसे दावों को मरीजों को प्रभावित करने वाला भ्रामक प्रचार माना जा सकता है।

AI से फर्जी मरीज और रिव्यू बनाने पर भी रोक

नई गाइडलाइन के अनुसार डॉक्टर, क्लीनिक या अस्पताल मरीजों के फर्जी अनुभव, फीडबैक या प्रशंसापत्र तैयार करने के लिए AI या किसी अन्य तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

सोशल मीडिया और इंटरनेट पर किसी मरीज के नाम से झूठी या बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई जानकारी प्रकाशित करना भी नियमों के खिलाफ होगा। AI की मदद से फर्जी मरीजों के वीडियो, ऑडियो या टेक्स्ट तैयार कराकर इलाज के पक्ष में दावे करवाने पर भी कार्रवाई हो सकती है।

इसी तरह सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर के जरिए किसी डॉक्टर या अस्पताल की सेवाओं का भ्रामक या अतिरंजित प्रचार करने पर भी रोक रहेगी।

नियम तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई

NMC के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत इन नियमों का उल्लंघन व्यावसायिक कदाचार माना जा सकता है। दोषी पाए जाने पर डॉक्टर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें लाइसेंस निलंबन तक का प्रावधान हो सकता है। वहीं, संबंधित अस्पताल या क्लीनिक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

गंभीर मामलों में डॉक्टर का नाम राज्य या राष्ट्रीय मेडिकल रजिस्टर से हटाने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।

CG News: केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग, इलाके में मचा हड़कंप; दमकल की टीमें मौके पर

मरीजों को भ्रामक प्रचार से बचाना मकसद

आयोग का कहना है कि चिकित्सा पेशा भरोसे और विश्वसनीयता पर आधारित है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बनावटी रिव्यू, फर्जी प्रशंसापत्र और बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों को देखकर मरीज गंभीर बीमारियों के इलाज का फैसला कर सकते हैं।

खासकर कैंसर, हृदय रोग और कॉस्मेटिक सर्जरी जैसे मामलों में गलत या भ्रामक जानकारी मरीज के लिए गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है। NMC की नई गाइडलाइन का उद्देश्य पेड रिव्यू, फर्जी प्रचार और AI के जरिए तैयार की गई भ्रामक सामग्री से मरीजों को बचाना और उन्हें इलाज से जुड़ी वास्तविक जानकारी उपलब्ध कराना है।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026