कोरबा में सरकारी जमीन का अवैध सौदा, लीज नियमों की उड़ाई धज्जियां, शासन को चूना लगाकर 240 वर्ग फीट को बना दिया 1925 वर्ग फीट

छत्तीसगढ़/कोरबा : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में शासकीय भूमि के आवंटन और उसकी अवैध खरीदी-बिक्री का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गरीबों व भूमिहीनों के लिए शासन की कल्याणकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर पट्टा हासिल करने और फिर उसे लाखों रुपये में बेचने के साथ-साथ बिना अनुमति व्यावसायिक निर्माण करने का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के शासनकाल में रकवीर पिता महेंद्र सिंह ने स्वयं को भूमिहीन बताते हुए पट्टे की मांग की थी। इसके आधार पर वर्ष 2002-2003 में उन्हें 20 बाई 12 यानी 240 स्क्वायर फीट का अस्थायी पट्टा आवंटित किया गया था।
आरोप है कि पट्टा प्राप्तकर्ता ने नियमों की अनदेखी करते हुए इस जमीन को कानपुर बिरयानी के संचालक अब्दुल नसीम मसूरी को 22 लाख रुपये में बेच दिया। अब्दुल नसीम ने इसे अपनी पत्नी मोमिना बेगम के नाम से खरीदा। आर्थिक स्थिति पर सवाल सूत्रों के अनुसार, विक्रेता ने शासन को भूमिहीन बताकर जमीन ली थी, लेकिन वे वर्तमान में शहर के पॉश इलाके महाराणा प्रताप नगर में आलीशान पक्के मकान में रह रहे हैं। उन्होंने मात्र 240 स्क्वायर फीट के अस्थायी पट्टे के आधार पर 25 बाई 77 यानी कुल 1925 स्क्वायर फीट बेशकीमती जमीन का सौदा 22 लाख रुपये में किया गया और राशि का लेनदेन भी हो गया।
क्रेता और विक्रेता द्वारा रजिस्टर्ड नोटरी के समक्ष बाकायदा दस्तावेज तैयार किए गए जिनमें मूल और शासकीय रकबे दोनों का उल्लेख नही है। इस शासकीय भूमि पर नगर पालिक निगम कोरबा की अनुमति के बिना ही आलीशान कमर्शियल कॉम्प्लेक्स की नींव रख दी गई है,जो निगम के नियमों का खुला उल्लंघन है। कानूनी स्थिति और शासन की भूमिका के अनुसार अस्थायी पट्टे की भूमि का लीज अवधि पूरा होने से पहले इस प्रकार हस्तांतरण करना पूरी तरह से प्रतिबंधित और अवैध है। शासकीय भूमि की खरीद और बिक्री दोनों ही कानूनन अपराध की श्रेणी में आते हैं।
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छत्तीसगढ़ क्रांति सेना ने इस कृत्य की लिखित शिकायत कोरबा DM सहित उच्चस्तरीय करते हुए कार्रवाई की मांग करने की बात कही है,साथ ही नियम विरुद्ध हुए इस सौदे पर क्रेता और विक्रेता, दोनों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ साथ शासकीय जमीन पर किए जा रहे अवैध निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोकना और शासन को धोखा देकर की गई इस बिक्री को निरस्त कर सरकारी जमीन को पृथक करने की मांग करने की बात कही है।






