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महादेव एप्प में कांग्रेस का नया खुलासाः बृजमोहन अग्रवाल की गाड़ी से ईडी ने रकम जप्त किया

राजीव भवन में पत्रकारों से चर्चा करते हुये प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि ईडी ही भाजपा है और भाजपा ही ईडी है। भाजपा की केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ के भाजपा के नेता तथा ईडी ने मिलकर छत्तीसगढ़ के चुनावों से जनता का ध्यान भटकाने प्रदेश के मुख्यमंत्री की छवि खराब करने का षड़यंत्र रचा है। भाजपा के कार्यकर्ता के बयान पर ईडी आरोप लगाती है भाजपा नेता के भाई की गाड़ी से कैश जप्त होता है, भाजपा अपने दफ्तर से वीडियो जारी करती है यह रिश्ता क्या कहलाता है?

क्रोनोलॉजी समझिये
ईडी एक ड्राइवर (कैश कुरियर) को पकड़ती है उसके बयान के आधार पर प्रेस नोट जारी करके मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ऊपर महादेव एप्प से 508 करोड़ रू. लेने का आरोप लगाती है।
फिर इसी के संदर्भ में ईडी महादेव एप्प के एक कर्मचारी शुभम सोनी का एक सपोर्टिंग मेल का हवाला देकर इस आरोप की पुष्टि करवाती है।
दूसरे दिन भाजपा के कार्यालय से एक वीडियो जारी होता है जिसमें एक शुभम सोनी नाम का व्यक्ति खुद को महादेव एप्प का मालिक घोषित करता है तथा अभी तक महादेव एप्प के चर्चित मालिक सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल को कर्मचारी बताता है।

सवाल यह खड़ा होता है-
ऽ शुभम सोनी के इस वीडियो को भारतीय जनता पार्टी ने क्यों रिलीज किया? भाजपा के पास कहां से आया? यदि यह वीडियो शुभम सोनी ने भाजपा को भेजा है तो उसने भाजपा को ही क्यों भेजा, इनके क्या संबंध है? ईडी इसकी जांच करें भाजपा के पास यह कहां से आया?

ऽ अगर ईडी के पास साक्ष्य आया तो एजेंसी को उसकी पुष्टि करना चाहिये या उसकी जांच किये बिना सार्वजनिक करके किसी की छवि खराब करने का प्रयास करना चाहिये।

ऽ ईडी ने ड्राइवर असीम दास के बयान की बिना जांच किये मुख्यमंत्री की छवि खराब करने के उद्देश्य से प्रेस नोट जारी किया यह सब इसलिये किया गया ताकि चुनाव में बुरी तरह पराजित हो रही भाजपा की मदद की जा सके। जबकि प्रेस नोट में ही लिखा है कि ‘‘अभी जांच होनी है।’’

ऽ एक सटोरिया वीडियो बना कर कुछ भी बोल देगा भाजपा, ईडी उसको प्रचारित कर रही है यह इनकी नीयत को बताती है।

ऽ यह सारी साजिश चुनाव के मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके।

ऽ ईडी महीनों से ‘महादेव एप्प’ की जांच कर रही है। वह दो दिन पहले तक शुभम सोनी को मैनेजर बता रही थी जबकि सोनी खुद को मालिक बता रहा है। तो सच क्या है?

ऽ ईडी के वकील सौरभ पांडे ने एक टीवी चैनल से कहा है कि कूरियर दुबई से सीधे पैसे लेकर आया तो सवाल है कि दुबई में भारतीय मुद्रा कैसे हासिल हुई? दूसरा अगर वह दुबई से लेकर आया है तो रास्ते में कहीं जांच क्यों नहीं हुई? छत्तीसगढ़ में जगह-जगह जांच हो रही है। वह किस रास्ते से आया और रास्ते में उसे पकड़ा क्यों नहीं गया?

ऽ एक समाचार वेबसाइट ने पड़ोसियों के बयान के आधार पर विस्तार से बताया है कैसे एक सूने घर में कुछ लोग पैसा रखकर गए। ये कुछ लोग कौन थे?
भाजपा नेता की इनोवा से कैश जप्त हुआ

ईडी ने एक काले कलर की इनोवा कार से भी कैश जप्त किया था जो होटल के बेसमेंट में खड़ी थी। इस ब्लैक कार का नंबर CG 12 AR 6300 है इसका रजिस्ट्रेशन कोरबा जिले का है। आरटीओ में यह कार सनफ्लावर हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड (बृजमोहन अग्रवाल) के नाम पर रजिस्टर्ड है, (इस कंपनी के मालिक बृजमोहन अग्रवाल है जो बिलासपुर के पूर्व विधायक और भाजपा शासन में मंत्री रहे अमर अग्रवाल के भाई है। बृजमोहन अग्रवाल बिलासपुर में बिल्डर है।)

ईडी ने एक काले कलर की इनोवा कार से कैश जप्त किया था जो होटल के बेसमेंट में खड़ी थी। लेकिन अभी तक इस गाड़ी की डिटेल ईडी ने नहीं दी है। सूत्रों से जानकारी मिली है यह गाड़ी एक बड़े बिल्डर की है जो बीजेपी नेता का रिश्तेदार बताया जा रहा है। हालांकि गाड़ी का रजिस्ट्रेशन कोरबा जिले का है। अब सवाल उठ रहे है कि आखिर बीजेपी नेता के रिश्तेदार बिल्डर की कार से जप्त कैश किसके लिए लाया गया था और इस रकम को कहां और किसे बांटा जाना था? लेकिन इस पूरे मामले में ईडी ने कार ड्राइवर असीम को आरोपी बना लिया पर कार मालिक से मामले में अभी तक कोई पूछताछ नहीं हुई है। सवाल यह भी है कि बिना मालिक के जानकारी के इतनी बड़ी रकम ड्राइवर कैसे ला सकता है? आखिर कार मालिक की इस मामले में क्या भूमिका है? कार का असली मालिक कौन है?

भाजपा के कार्यकर्ता असीम दास से रकम जप्त होती है, और भाजपा नेता के रिश्तेदार की गाड़ी से पैसा जप्त होता है, आरोप कांग्रेस पर लगाया जाता है, सीधा मतलब यह सब चुनावी साजिश है।

वरिष्ठ प्रवक्ता आर.पी. सिंह, धनंजय सिंह ठाकुर, घनश्याम राजू तिवारी, सुरेंद्र वर्मा, महेंद्र छाबड़ा, अजय साहू, प्रवक्ता अजय गंगवानी, मणि वैष्णव उपस्थित थे।

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