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27th anniversary of the Kargil War: कारगिल विजय के 27 साल – जल, थल और नभ में पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर हुआ भारत

27th anniversary of the Kargil War: इस साल पूरा देश 26वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है. यह दिन भारत के इतिहास में गौरव की किरण की तरह चमकता है. यह 1999 की उस शानदार विजय का प्रतीक है जब हमारे सैनिकों ने बर्फ से ढकी चोटियों और दुश्मन की लगातार गोलाबारी का सामना करते हुए, बेजोड़ साहस और अटूट संकल्प के साथ कारगिल की चोटियों पर फिर से विजय हासिल की थी. 26 जुलाई को, लद्दाख की दुर्गम पहाड़ियों पर तिरंगा एक बार फिर शान से लहराया, जो बलिदान, वीरता और अटूट राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है.  कारगिल युद्ध भारत की रक्षा यात्रा में एक अहम मोड़ साबित हुआ. इसने बेहतर तालमेल, तेजी से आधुनिकीकरण और अधिक आत्मनिर्भरता की जरूरत को उजागर किया. पिछले कुछ सालों में, भारत ने अपने रक्षा तंत्र को मजबूत करने और स्वदेशी क्षमता विकसित करने के लिए कई बड़े सुधार किए हैं. आज, इन प्रयासों से एक सशक्त, अधिक सक्षम और तेजी से आत्मनिर्भर होती सेना तैयार हो रही है. सैन्य मामलों के विभाग की स्थापना से लेकर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और रक्षा बजट में निरंतर वृद्धि पिछले कुछ वर्षों में हुए कुछ प्रमुख सुधार और पहल को दर्शाते हैं.

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सैन्य मामलों के विभाग की स्थापना

उच्च रक्षा प्रबंधन में सुधारों के तहत सैन्य मामलों के विभाग की स्थापना की गई. यह विभाग चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के अधीन कार्य करता है, जो इसके सचिव भी होते हैं. डीएमए का उद्देश्य थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच संयुक्तता को बढ़ावा देना तथा रक्षा संबंधी नीतियों, योजना निर्माण, संसाधन प्रबंधन और प्रक्रियाओं में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है. उच्च रक्षा प्रबंधन में किए गए सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के पद की स्थापना शामिल है. सीडीएस सरकार के प्रमुख सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं और तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता, समन्वय व एकीकृत सैन्य योजना को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जनरल बिपिन रावत साल 2020 में भारत के पहले सीडीएस बने थे। वर्तमान में यह दायित्व जनरल अनिल चौहान निभा रहे हैं. रक्षा उद्योग को निजी क्षेत्र की व्यापक भागीदारी के लिए खोला गया है. रक्षा विनिर्माण में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ऑटोमैटिक रूट के तहत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दी गई है. इसके अलावा, आधुनिक प्रौद्योगिकी से जुड़े मामलों में सरकारी रूट के माध्यम से 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति दी गई है.

मार्च 2026 तक रक्षा क्षेत्र में 6,670.59 करोड़ रुपए का विदेशी निवेश हुआ प्राप्त

मार्च 2026 तक रक्षा क्षेत्र में 6,670.59 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है. सरकार उन्नत रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए विदेशी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स के साथ सह-विकास और सह-उत्पादन को भी सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है. भारत का रक्षा बजट भी 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2026–27 में 7.85 लाख करोड़ रुपए हो गया है. इसी अवधि में पूंजीगत व्यय भी 2014-15 के 94,587.95 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026-27 में 2.19 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. रक्षा क्षेत्र में यह बढ़ा हुआ निवेश आधुनिक सैन्य उपकरणों, अत्याधुनिक अवसंरचना और रणनीतिक परिसंपत्तियों के विकास के माध्यम से देश की दीर्घकालिक सैन्य क्षमता को सुदृढ़ बना रहा है. भारत का रक्षा उत्पादन 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपए के अब तक के सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गया, जो 2014–15 के 46,429 करोड़ रुपए की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है. इसके अलावा, भारत का रक्षा निर्यात 2013-14 में 686 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये हो गया है, जो 56 गुना से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है. भारतीय रक्षा उत्पादों का निर्यात आज 80 से अधिक देशों को किया जा रहा है. ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों के परिणामस्वरूप भारत वैश्विक स्तर पर एक उभरते हुए रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है. वर्तमान में देश की लगभग 65 प्रतिशत रक्षा आवश्यकताओं की पूर्ति स्वदेशी रूप से निर्मित रक्षा उपकरणों से की जा रही है, जबकि पहले भारत की 65-70 प्रतिशत रक्षा जरूरतें आयात पर निर्भर थीं.

युद्ध की प्रकृति में भी व्यापक परिवर्तन आया

करगिल युद्ध के बाद युद्ध की प्रकृति में भी व्यापक परिवर्तन आया है. आधुनिक युद्धक्षेत्र में उन्नत प्रौद्योगिकी, अधिक सटीक व प्रभावी मारक क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है. भारत ने आधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्मों को शामिल करने और अगली पीढ़ी की रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास के माध्यम से अपनी सैन्य क्षमताओं को निरंतर सुदृढ़ किया है. इन क्षमताओं ने थल, वायु, नौसेना, अंतरिक्ष और अन्य उभरते परिचालन क्षेत्रों में देश की युद्धक तैयारी एवं परिचालन दक्षता को और मजबूत किया है. खासकर भारत ने युद्ध क्षमता को मजबूत करने और ऑपरेशनल प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए तीनों सेनाओं में आधुनिक प्लेटफॉर्म शामिल किए हैं। अर्जुन एमके-1ए मुख्य युद्धक टैंक, आईएनएस विक्रांत, राफेल लड़ाकू विमान, अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर, ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता, ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट, संधायक श्रेणी के सर्वेक्षण पोत और अनाला श्रेणी के उथले जल पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत इसके सटीक उदाहरण हैं। अर्जुन एमके-1ए मुख्य युद्धक टैंक फरवरी 2021 में भारतीय सेना को मिला, जबकि भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को 2 सितंबर 2022 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया. वहीं, ब्रह्मोस का पहला सफल प्रक्षेपण 12 जून 2001 को हुआ था। इसकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर तक है और इसकी गति लगभग ध्वनि की गति से 2.8 गुना (मैक 2.8) है. भारत भविष्य के युद्धक्षेत्रों की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए अपनी सशस्त्र सेनाओं को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों से सुसज्जित कर रहा है. इसके लिए उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों, आधुनिक सैन्य प्रणालियों व रणनीतिक क्षमताओं के विकास और विस्तार में निरंतर निवेश किया जा रहा है. इसी कड़ी में ‘मिशन शक्ति’ के तहत 27 मार्च 2019 को भारत ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एंटी-सैटेलाइट (एएसएटी) मिसाइल का सफल परीक्षण किया. इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास उपग्रह-रोधी मिसाइल क्षमता है. 11 मार्च 2024 को भारत ने ‘मिशन दिव्यास्त्र’ के तहत एक ऐसी लंबी दूरी की मिसाइल का सफल परीक्षण किया, जिसमें एकाधिक स्वतंत्र रूप से लक्ष्यभेदी वारहेड (एमआईआरवी) तकनीक का उपयोग किया गया है. यह मिसाइल एक साथ अलग-अलग लक्ष्यों पर प्रहार करने में सक्षम है.

29 दिसंबर 2025 को पिनाका लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया गया. इसने 120 किलोमीटर तक की अधिकतम मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अत्यंत सटीक लक्ष्यभेदन किया. इसके अलावा, 23 अगस्त 2025 को डीआरडीओ ने एक उन्नत वायु रक्षा प्रणाली का सफल परीक्षण किया। इस प्रणाली में मिसाइल अवरोधक, कम दूरी के वायु रक्षा हथियार और लेजर आधारित प्रौद्योगिकियां शामिल हैं. भारत हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए अगली पीढ़ी की उन्नत प्रणोदन तकनीक विकसित कर रहा है. जनवरी 2026 में डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट दहन प्रणाली का लंबी अवधि वाला ग्राउंड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया. साथ ही, हैदराबाद में स्थापित नई हाइपरसोनिक विंड टनल भविष्य की उच्च गति वाली मिसाइलों के विकास को गति दे रही है.

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कुशा मिसाइल का पहला सफल उड़ान परीक्षण

इसी महीने डीआरडीओ ने कुशा मिसाइल का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया. इसने हवा में तेज गति से आने वाले काल्पनिक खतरे को सफलतापूर्वक नष्ट किया. यह प्रणाली लड़ाकू विमान, मिसाइल, मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) और बड़े शत्रु विमानों को लंबी दूरी व ऊंचाई पर निष्क्रिय करने में सक्षम है. इसका विकास डीआरडीओ और भारतीय उद्योग साझेदारों की ओर से स्वदेशी रूप से किया गया है. पिछले महीने में डीआरडीओ ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की भूमि पर प्रहार करने वाली क्रूज मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया. मिसाइल ने परीक्षण के सभी निर्धारित मानकों और लक्ष्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया. जून में ही डीआरडीओ ने स्वदेशी ‘नेत्र’ हवाई पूर्व चेतावनी और नियंत्रण (एईडब्ल्यू एंड सी) प्रणाली को अंतिम परिचालन स्वीकृति प्रदान की. आधुनिक युद्धक प्लेटफॉर्मों से लेकर अगली पीढ़ी की अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों तक, भारत भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक सक्षम, आधुनिक और आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति का निर्माण कर रहा है. ये क्षमताएं देश की निवारक शक्ति को सुदृढ़ करने, परिचालन तैयारी को और प्रभावी बनाने तथा भारत की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता एवं राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने की क्षमता को निरंतर मजबूत कर रही हैं.

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026