SECL कुसमुंडा में विराजे देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा, क्षेत्रवासियों का उमड़ा उत्साह, मशीनों और औजारों की हुई विशेष पूजा….
सतपाल सिंह
SECL कुसमुंडा में विराजे देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा, क्षेत्रवासियों का उमड़ा उत्साह, मशीनों और औजारों की हुई विशेष पूजा….

कोरबा – आज पूरे देश में सृष्टि के आदि शिल्पकार और देवताओं के मुख्य वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की जयंती अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। हर साल 17 सितंबर को कन्या संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला यह पर्व देश के विकास में योगदान देने वाले शिल्पकारों, इंजीनियरों, कारीगरों और औद्योगिक श्रमिकों के लिए विशेष महत्व रखता है। कोरबा जिले में भी सुबह से ही विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, वर्कशॉप और तकनीकी संस्थानों में पूजा-अर्चना का दौर जारी है।
इसी कड़ी में कुसमुंडा क्षेत्र अंतर्गत खदान से लेकर खदान के बहार भी भव्य तरीके से कार्यस्थल, पानी फिल्टर, बिजली ऑफिस, छोटे-बड़े कारखानों, गैरेज, ट्रांसपोर्टरों के ऑफिस गैरेज और निर्माण स्थलों को गेंदे के फूलों, रंग-बिरंगी लाइटों और गुब्बारों से भव्य रूप से सजाया गया है।
अस्त्र-शस्त्र और औजारों का विश्राम: सनातन परंपरा के अनुसार, आज के दिन श्रमिक और कारीगर अपनी मशीनों, औजारों, वाहनों और कंप्यूटरों का उपयोग नहीं करते हैं।
शुद्धिकरण और तिलक: सुबह सबसे पहले सभी यंत्रों और उपकरणों को साफ कर उन पर स्वास्तिक बनाया गया, तिलक लगाया गया और धूप-दीप दिखाकर उनकी आरती की गई।
भंडारे और प्रसाद वितरण: कुसमुंडा क्षेत्रों में सामूहिक पूजा के बाद विशाल भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया है, जहाँ प्रबंधन और श्रमिक वर्ग ने एक साथ मिलकर त्योहार का आनंद लिया।
निर्माण और तकनीक के देवता: पौराणिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। उन्होंने ही सतयुग का ‘स्वर्ग लोक’, त्रेतायुग की ‘लंका’, द्वापरयुग की ‘द्वारका नगरी’ और ‘हस्तिनापुर’ (इंद्रप्रस्थ) का निर्माण किया था। इसके अलावा, देवताओं के दिव्य अस्त्र-शस्त्र जैसे भगवान शिव का त्रिशूल और भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र भी उन्हीं की देन माने जाते हैं। यही कारण है कि किसी भी नए निर्माण या तकनीकी कार्य की शुरुआत से पहले उनका आशीर्वाद लेना अनिवार्य माना जाता है।
आर्थिक प्रगति और सुरक्षा के लिए प्रार्थना
विश्वकर्मा पूजा का यह उत्सव केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘श्रम के सम्मान’ का प्रतीक है। आज के दिन देश के करोड़ों कामकाजी लोग भगवान विश्वकर्मा से अपने व्यवसाय में उन्नति, देश की आर्थिक समृद्धि और कार्यस्थलों पर दुर्घटनाओं से सुरक्षा (सुरक्षित कामकाजी माहौल) की कामना कर रहे हैं।
इस अवसर पर कुसमुंडा क्षेत्र के महाप्रबंधकों, अधिकारियों,ठेका कंपनीयों, श्रमिक संगठनों, ट्रांसपोर्टरों ने क्षेत्रवासियों, विशेषकर श्रमिक और शिल्पी भाइयों-बहनों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं और देश के निर्माण में उनके योगदान की सराहना की है।





