“स्वेच्छा से देह व्यापार करना अपराध नहीं” — छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला.. कोरबा से जुड़ा था मामला…

“स्वेच्छा से देह व्यापार करना अपराध नहीं” — छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला..
कोरबा से जुड़ा था मामला… 
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने देह व्यापार के एक मामले में तीन महिलाओं को बरी करने का फैसला बरकरार रखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी की है। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल स्वयं देह व्यापार में शामिल होने से अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 4 के तहत अपराध साबित नहीं होता है।
हाईकोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु:
धारा 4 का सही अर्थ: इस धारा के तहत दोषसिद्धि के लिए यह साबित करना अनिवार्य है कि आरोपी व्यक्ति किसी दूसरे के देह व्यापार की कमाई पर जानबूझकर अपना जीवनयापन कर रहा था।
दलाली के सबूतों का अभाव:
कोर्ट ने पाया कि इन महिलाओं पर किसी अन्य महिला की कमाई छीनने या दलाल (पिम्प) के रूप में काम करने का कोई आरोप नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला: हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के पुराने फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि वयस्कों द्वारा सहमति से और स्वेच्छा से किया गया देह व्यापार कानूनन अपराध नहीं है, इसलिए महिलाओं को केवल इस आधार पर दंडित या प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला साल 2013 में कोरबा के महाराणा प्रताप नगर में हुई एक पुलिस छापेमारी से जुड़ा है। साल 2014 में ट्रायल कोर्ट ने महिलाओं को दो-दो साल की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ अपील पर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। अब हाईकोर्ट ने भी फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले को पूरी तरह सही माना है। [





