CG News: स्कूली छात्राओं की शिकायत पर एक्शन, प्राचार्य समेत 3 शिक्षक हटाए गए; आगे की कार्रवाई के लिए DPI को प्रस्ताव


बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मल्हार स्थित एक सरकारी स्कूल में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। छात्राओं को सेनेटरी पैड बांटने में गड़बड़ी, विद्यार्थियों से फीस के नाम पर कथित तौर पर 500 रुपये अतिरिक्त वसूलने और उनके साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें जांच में सही पाई गई हैं। इतना ही नहीं, एक शिक्षिका द्वारा स्कूल के चपरासी से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कराने की बात भी जांच रिपोर्ट में सामने आई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर की मंजूरी के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने स्कूल के प्राचार्य समेत तीन शिक्षकों की दूसरी जगह पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। साथ ही संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को प्रस्ताव भेजा गया है।
नेपाल में फिर बाढ़ का प्रकोप, बूढ़ी गंडक की तेज धारा में बहा सब कुछ; भयावह VIDEO आया सामने
छात्राओं के प्रदर्शन के बाद हरकत में आया शिक्षा विभाग
मल्हार के इस सरकारी स्कूल में अव्यवस्थाओं, विद्यार्थियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और निर्धारित राशि से अधिक पैसे वसूलने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही थीं। मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंचने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने का आरोप है।
आखिरकार 1 अक्टूबर को छात्राओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। छात्राओं ने प्राचार्य वेदप्रकाश शुक्ला, व्याख्याता रश्मि गुप्ता और संजय दुबे के खिलाफ शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की। टीम ने 7 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में शिकायतों की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
चपरासी से उत्तर पुस्तिकाएं जांचवाने का मामला भी उजागर
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, व्याख्याता रश्मि गुप्ता के खिलाफ विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार करने और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच सहित पढ़ाई से जुड़े काम चपरासी से कराने की शिकायतें सही पाई गईं।
वहीं, व्याख्याता संजय दुबे के खिलाफ भी विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार और अन्य अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है।
इस मामले ने स्कूलों में शिक्षकों की जिम्मेदारी, विद्यार्थियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया और शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्य किसी गैर-शिक्षकीय कर्मचारी से कराए जा रहे थे, तो यह भी जांच का विषय है कि स्कूल स्तर पर इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं मिली।
कोल इंडिया चेयर मैन के हाथों सम्मानित हुए कुसमुंडा में पदस्थ मजदूर बिहारी लाल
प्राचार्य समेत तीन शिक्षकों की बदली गई पदस्थापना
जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर की मंजूरी मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने 9 अक्टूबर को तीनों शिक्षकों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए।
आदेश के अनुसार:
- वेदप्रकाश शुक्ला (प्राचार्य): शासकीय हाई स्कूल, कुकुर्दीकेरा, विकासखंड मस्तूरी।
- रश्मि गुप्ता (व्याख्याता): शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पचपेड़ी।
- संजय दुबे (व्याख्याता): शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ओखर।
हालांकि, ये पदस्थापना आदेश राज्य शासन से तबादले की मंजूरी मिलने की प्रक्रिया के अधीन हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शासन की ओर से स्थानांतरण आदेश जारी होने पर मौजूदा आदेश स्वतः निरस्त माने जाएंगे।
जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय के मुताबिक, प्राचार्य और दोनों व्याख्याताओं के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि गंभीर अनियमितताओं के मामलों में आगे की कार्रवाई करने का अधिकार DPI के पास है।
सेनेटरी पैड वितरण और अतिरिक्त वसूली की शिकायतें भी गंभीर
इस पूरे मामले में छात्राओं को सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने में कथित गड़बड़ी और विद्यार्थियों से निर्धारित राशि से 500 रुपये अधिक वसूलने की शिकायतें भी अहम हैं। सरकारी स्कूलों में छात्राओं को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना और विद्यार्थियों से निर्धारित नियमों के अनुसार ही शुल्क लेना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि सेनेटरी पैड वितरण में किस तरह की अनियमितता हुई, अतिरिक्त राशि किस आधार पर वसूली गई और संबंधित मामलों में क्या कार्रवाई की जाएगी।
इन सवालों का जवाब मिलना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि मामला केवल प्रशासनिक अव्यवस्था का नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के अधिकारों और उनके सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण से जुड़ा है।
सिर्फ पदस्थापना बदलने से खत्म नहीं होंगे सवाल
मल्हार के सरकारी स्कूल में जांच के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होना महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे निगरानी व्यवस्था पर उठे सवालों का जवाब अभी नहीं मिलता। यदि शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं, तो यह जानना भी जरूरी है कि स्कूल का नियमित निरीक्षण करने वाले अधिकारियों ने पहले क्या कदम उठाए थे।
सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी केवल प्राचार्य या शिक्षकों की नहीं होती। विकासखंड और जिला स्तर पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होती है। नियमित निरीक्षण, विद्यार्थियों की शिकायतों का निपटारा और शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं।
ऐसे में जांच का दायरा केवल संबंधित शिक्षकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सेनेटरी पैड वितरण, कथित अतिरिक्त वसूली, विद्यार्थियों के साथ व्यवहार और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में सामने आई अनियमितताओं पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, यह भी देखा जाना चाहिए कि निगरानी के स्तर पर कोई चूक हुई थी या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा, जरूरी सुविधाएं और सुरक्षित माहौल देने की जिम्मेदारी निभाने में आखिर कहां चूक हुई? अब निगाहें DPI की आगामी कार्रवाई और शिक्षा विभाग की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।






