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कोरबा की सड़कों पर बेमौत मरते मवेशी और मूक प्रशासन, अभी भारी वाहन ने दो मवेशी को लिया चपेट में,मौत

कोरबा की सड़कों पर बेमौत मरते मवेशी और मूक प्रशासन, अभी भारी वाहन ने दो मवेशी को लिया चपेट में,मौत

Noor suzuki korba

कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हाल ही में सर्वमंगला कनवेरी मार्ग पर भारी वाहन की चपेट में आने से दो मवेशियों की दर्दनाक मौत हो गई। कुछ ही दिन पहले इसी सड़क पर मवेशियों से टकराकर एक राहगीर गंभीर रूप से घायल हो गया था। यह कोई अकेली घटना नहीं है; कुछ दिनों पहले ही दर्री रोड पर एक अज्ञात वाहन ने 9 मवेशियों को कुचल दिया था। लेकिन यदि हम कोरबा की इन घटनाओं को एक स्थानीय समस्या मानकर छोड़ दें, तो यह हमारी सबसे बड़ी भूल होगी। वास्तव में, यह देश के हर छोटे-बड़े राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और राजकीय सड़कों पर पसर चुका एक गंभीर ‘मवेशी-सड़क दुर्घटना संकट’ है।

1. जान चाहे इंसान की हो या मवेशी की: आंकड़े डराने वाले हैं। सड़कों पर बैठे आवारा पशुओं के कारण होने वाले हादसे अब केवल पशु क्रूरता का मामला नहीं रहे, बल्कि यह एक गंभीर ‘पब्लिक सेफ्टी’ (जन सुरक्षा) का मुद्दा बन चुके हैं।

इंसानी जानों का नुकसान: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (के के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल हजारों लोग सड़कों पर अचानक मवेशियों के सामने आ जाने के कारण होने वाले हादसों में अपनी जान गंवाते हैं।

पशुओं की मूक मौतें: तेज रफ्तार ट्रकों और भारी वाहनों के नीचे आकर हर रात सैकड़ों गाय और अन्य मवेशी ‘हिट एंड रन’ का शिकार होते है।

2. राजनीति और योजनाओं के फेर में फंसा ‘गौ-वंश’

एक तरफ देश में गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने और उनकी सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े राजनीतिक वादे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।

बदलती सरकारें, बंद होती योजनाएं: छत्तीसगढ़ का उदाहरण सामने है, जहां पूर्ववर्ती सरकार द्वारा ‘गौठान योजना’ के माध्यम से मवेशियों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया था। लेकिन राजनीतिक बदलावों के साथ ही जमीनी स्तर पर इन योजनाओं के ठप होने या बंद होने से मवेशी एक बार फिर सड़कों पर आ गए हैं। यह समस्या लगभग हर राज्य में है, जहां सरकार बदलने के साथ पशु कल्याण की नीतियां बदल जाती हैं।

सिस्टम की उदासीनता: स्थानीय नगर निगम, जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अक्सर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते नजर आते हैं। जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक सड़कों से मवेशियों को हटाने की सुध नहीं ली जाती।

3. आखिर मवेशी सड़कों पर क्यों आते हैं? (मूल कारण)विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई सामाजिक और बुनियादी कारण हैं: डेयरी मालिकों का स्वार्थ: दूध निकालने के बाद अनुत्पादक या सूखे मवेशियों को अक्सर सड़कों पर खुला छोड़ दिया जाता है।

मौसम का प्रभाव: बारिश के मौसम में कीड़ों से बचने और रात में सूखी, गर्म डामर की सड़कों पर बैठने के लिए मवेशी हाईवे का रुख करते हैं।

चरगाहों की कमी: तेजी से होते शहरीकरण के कारण पारंपरिक चरगाह खत्म हो चुके हैं, जिससे मवेशियों के पास सड़कों पर कचरा खाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

4. राष्ट्रव्यापी समाधान की सख्त जरूरत: अब क्या किया जाना चाहिए?इस गंभीर संकट से निपटने के लिए अब केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय नीति के तहत ठोस कदम उठाने होंगे:कड़े कानून और जवाबदेही: सड़कों पर पशु खुला छोड़ने वाले मालिकों पर भारी जुर्माना लगाया जाए। साथ ही, दुर्घटना की स्थिति में संबंधित क्षेत्र के नगर निगम या हाईवे अथॉरिटी की जवाबदेही तय हो।

सस्टेनेबल शेल्टर होम (गौशालाएं): केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर गौशालाओं के बजाय, आत्मनिर्भर मॉडल बनाए जाएं जहां गोबर और गोमूत्र से सीएनजी, जैविक खाद और अन्य उत्पाद बनाकर उनका खर्च निकाला जा सके।

पशुओं की जियो-टैगिंग (Geo-Tagging): सभी पालतू और आवारा मवेशियों की अनिवार्य टैगिंग की जाए ताकि उनके मालिकों की पहचान आसानी से हो सके।

हाईवे रिफ्लेक्टिव कॉलर (Reflective Collars): रात के समय होने वाले हादसों को रोकने के लिए मवेशियों के गले में रेडियम या रिफ्लेक्टिव बेल्ट बांधने का राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जाना चाहिए।

जान चाहे मवेशी की हो या इंसान की, दोनों ही कीमती हैं। यदि सरकारें वाकई पशुधन के प्रति संवेदनशील हैं, तो उन्हें राजनीति से ऊपर उठकर एक स्थाई और सार्थक रोड मैप तैयार करना होगा। अन्यथा, चमचमाते एक्सप्रेस-वे और राष्ट्रीय राजमार्ग इसी तरह बेगुनाह इंसानों और मूक जानवरों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का कुआं) बने रहेंगे।

Om Gavel Bureau Korba

State Affairs Reporter Om Gavel is a state and local affairs reporter focusing on administration, development projects, and civic issues, local news in Chhattisgarh. His work highlights grassroots concerns and governance-related developments and all local activity in concern with crime and administration. Areas of Expertise • State administration • Infrastructure and development • Civic and public issues • Field reporting and all local issue Editorial Responsibility Om Gavel follows source verification guidelines and ensures responsible, fact-based reporting. 📧 Contact: humara.kusmunda.omgavel@gmail.com Profile Last Updated: 16 January 2026