बिलासपुर में मूसलाधार बारिश से जीवन अस्त व्यस्त

बिलासपुर। बिलासपुर में हुई मूसलाधार बारिश ने शहर की तस्वीर बदल दी है। सड़कें नदी बन गईं, कॉलोनियां जलमग्न हो गईं और सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या पिछले 25 से 30 वर्षों में एक ही रात में बिलासपुर में इतनी बारिश कभी हुई थी? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए मौसम विभाग के रिकॉर्ड, पुराने वर्षा आंकड़े और ऐतिहासिक बाढ़ की घटनाएं खंगाली जा रही हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 15 जुलाई से मध्य भारत और विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में सक्रिय हुए कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure System) के कारण वर्षा गतिविधियां अचानक बेहद तेज हुईं। विभाग ने पहले ही भारी से अति भारी वर्षा की चेतावनी जारी की थी।
IMD रायपुर के वर्षा बुलेटिन के अनुसार 17 जुलाई तक बिलासपुर जिले में 276.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य मानसूनी गतिविधियों की तुलना में बेहद अधिक मानी जा रही है।
पुराने रिकॉर्ड क्या कहते हैं?
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार बिलासपुर में पहले भी कई वर्षों में भारी बारिश और जलभराव की घटनाएं हुई हैं। इनमें विशेष रूप से 1994, 2001, 2013 और 2020 के दौरान शहर के कई हिस्सों में गंभीर जलभराव दर्ज किया गया था। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 की बारिश को ऐतिहासिक घोषित करने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड का अंतिम सत्यापन अभी बाकी है।
शहर क्यों डूबा?
विशेषज्ञों के अनुसार केवल रिकॉर्ड बारिश ही वजह नहीं है। इसके पीछे कई कारण एक साथ सामने आए हैं—
कुछ घंटों में अत्यधिक वर्षा (Cloudburst जैसी तीव्रता)
अरपा नदी और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ना
शहरी नालों की सीमित निकासी क्षमता
निचले इलाकों में तेज जलभराव
लगातार बारिश के कारण पानी की निकासी प्रभावित होना
IMD क्या कह रहा है?
मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिलने और सक्रिय मानसूनी तंत्र के कारण छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का दौर बना हुआ है। अगले कुछ दिनों तक भी कई जिलों में भारी वर्षा और गरज-चमक की संभावना बनी रह सकती है।
अब नजर आधिकारिक रिकॉर्ड पर
बिलासपुर में हुई इस बारिश को लेकर मौसम विभाग अब दैनिक, मासिक और दीर्घकालिक वर्षा रिकॉर्ड का मिलान कर रहा है। यदि अंतिम आंकड़ों में यह वर्षा पिछले तीन दशकों के अधिकतम स्तर को पार करती है, तो 2026 की बारिश बिलासपुर के मौसम इतिहास में एक नए रिकॉर्ड के रूप में दर्ज हो सकती है। फिलहाल इस संबंध में मौसम विभाग ने अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
बिलासपुर में शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश का असर अब रेलवे संचालन पर भी दिखाई दिया। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर स्टेशन और यार्ड में रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाने के कारण कई यात्री ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हो गया। हालात को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने पांच मेमू ट्रेनों को रद्द कर दिया, जबकि तीन ट्रेनों का संचालन बीच रास्ते से समाप्त अथवा परिवर्तित (शॉर्ट टर्मिनेशन/शॉर्ट ओरिजिनेशन) करना पड़ा।
रेलवे के अनुसार लगातार भारी वर्षा के कारण स्टेशन और यार्ड क्षेत्र में ट्रैक पर जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया।
ये ट्रेनें रद्द रहीं
ट्रेन नंबर 68734 बिलासपुर–कोरबा मेमू – 17 जुलाई को रद्द।
ट्रेन नंबर 68733 कोरबा–बिलासपुर मेमू – 17 जुलाई को रद्द।
ट्रेन नंबर 68719 बिलासपुर–रायपुर मेमू – 17 जुलाई को रद्द।
ट्रेन नंबर 68746 रायपुर–बिलासपुर मेमू – 17 जुलाई को रद्द।
ट्रेन नंबर 68745 बिलासपुर–रायपुर मेमू – 17 जुलाई को रद्द।
इन ट्रेनों का बदला संचालन
ट्रेन नंबर 68735 रायगढ़–बिलासपुर मेमू को चांपा स्टेशन पर ही समाप्त (शॉर्ट टर्मिनेशन) कर दिया गया।
ट्रेन नंबर 68738 बिलासपुर–रायगढ़ मेमू का संचालन चांपा स्टेशन से रायगढ़ के लिए शुरू (शॉर्ट ओरिजिनेशन) किया गया।
ट्रेन नंबर 68728 रायपुर–बिलासपुर मेमू को दाधापारा स्टेशन से ही वापस रायपुर के लिए रवाना किया गया।
बारिश से प्रभावित हुआ रेल परिचालन
लगातार हो रही भारी बारिश के चलते बिलासपुर रेलवे स्टेशन और यार्ड में ट्रैक पर पानी भरने से रेल परिचालन प्रभावित हुआ। इसके चलते स्थानीय और दैनिक यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा, क्योंकि रद्द की गई अधिकांश ट्रेनें मेमू सेवाएं हैं, जिनसे बड़ी संख्या में यात्री प्रतिदिन बिलासपुर, रायपुर, कोरबा, रायगढ़ और चांपा के बीच सफर करते हैं। रेलवे प्रशासन ने परिचालन की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखी है।






