छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने एरियर भुगतान का रास्ता किया साफ

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के हजारों रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। बिलासपुर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक बड़ा फैसला सुनाया है, जिससे अब लाखों पेंशनर्स को 59 माह का बकाया एरियर मिल सकेगा। लंबे समय से एरियर के लिए भटक रहे पेंशनर्स की जीत हुई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें सरकार ने एरियर न देने की जिद पकड़ी हुई थी।
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क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ पेंशनर्स समाज ने इस लड़ाई को हाई कोर्ट तक पहुंचाया था। मुद्दा यह था कि छठवें और सातवें वेतन आयोग के लाभ में सरकार ने कट-ऑफ डेट का पेंच फंसाया था। इसकी वजह से हजारों पेंशनर्स को 32 महीने और 27 महीने का एरियर नहीं मिल पा रहा था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह भेदभावपूर्ण है। सरकार ने पहले इस मामले को मध्य प्रदेश के साथ वित्तीय हिस्सेदारी का हवाला देकर अटका रखा था।
सरकार को झटका
सुनवाई के दौरान सरकार ने दलील दी कि मध्य प्रदेश की सहमति के बिना एरियर का पैसा नहीं दे सकते। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि दो राज्यों के आपसी वित्तीय विवाद का बोझ बुजुर्ग पेंशनर्स पर नहीं डाला जा सकता। कोर्ट ने सरकार से कहा कि पेंशनर्स को उनका हक देना ही होगा। अगर सरकार चाहे तो बाद में मध्य प्रदेश से अपना हिस्सा वसूल ले, लेकिन भुगतान रोकने का अधिकार नहीं है।
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सिंगल बेंच ने पहले ही अपने आदेश में इसे भेदभावपूर्ण माना था। अब डिवीजन बेंच ने भी उसी फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। अब राज्य सरकार के पास कोर्ट के निर्देशानुसार 120 दिनों के भीतर पूरा एरियर भुगतान करने की जिम्मेदारी है। पेंशनर्स संगठन इस फैसले को बड़ी जीत मान रहे हैं।






