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SECL कुसमुंडा में ‘अदृश्य आग’ पर ₹4.28 करोड़ खर्च का दावा, RTI दस्तावेजों से उठे गंभीर सवाल

RTI कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने पीएमओ, CBI और ED से की जांच की मांग

कोरबा (छत्तीसगढ़) | विशेष खोजी रिपोर्ट

भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की कुसमुंडा परियोजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों ने कोल स्टॉक में आग बुझाने के नाम पर किए गए ₹4.27 करोड़ से अधिक के खर्च को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों में दर्ज दो अलग-अलग विभागों के दावे एक-दूसरे के विपरीत दिखाई देते हैं, जिसके बाद मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।

RTI में सामने आया विभागों का विरोधाभास

RTI कार्यकर्ता एवं पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू द्वारा प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, कुसमुंडा परियोजना के सिविल विभाग और खान प्रबंधन विभाग के रिकॉर्ड में महत्वपूर्ण अंतर सामने आया है।

सिविल विभाग का दावा

परियोजना अभियंता (सिविल), कुसमुंडा परियोजना के पत्र क्रमांक SECL/GM(M)/KSM/C/26/520 दिनांक 27 अप्रैल 2026 के अनुसार, वर्ष 2020 से 2025 के बीच कोल स्टॉक में आग नियंत्रण एवं आग बुझाने के कार्यों पर कुल ₹4,27,96,191 व्यय किए गए।

खान प्रबंधन का दावा

इसके विपरीत, महाप्रबंधक (खनन)/खान प्रबंधक, कुसमुंडा परियोजना के पत्र क्रमांक Ref. No. SECL/GM(M)/KSM/14 दिनांक 28 अप्रैल 2026 में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2020 से वर्तमान तक किए गए कोल स्टॉक मापन एवं उपलब्ध रिकॉर्ड में आग से कोयले की मात्रा में कोई क्षति दर्ज नहीं हुई

यही विरोधाभास पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला रहा है।

खर्च का विस्तृत विवरण

सिविल विभाग के दस्तावेजों के अनुसार विभिन्न अवधियों में निम्नलिखित राशि व्यय की गई:

अवधि व्यय राशि
01.04.2020 से 05.05.2021 ₹26,89,324
19.04.2022 से 17.06.2022 ₹35,40,000
01.04.2022 से 31.03.2024 ₹1,21,02,670
20.06.2023 से 18.06.2024 ₹1,12,08,643
15.11.2024 से 14.11.2025 ₹27,77,777
01.12.2024 से 30.11.2025 ₹1,04,77,777

कुल व्यय: ₹4,27,96,191

उठ रहे हैं कई महत्वपूर्ण सवाल

दस्तावेजों के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं—

  • यदि कोल स्टॉक में आग से कोई क्षति नहीं हुई, तो आग बुझाने पर करोड़ों रुपये क्यों खर्च किए गए?
  • क्या आग नियंत्रण कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन किया गया था?
  • क्या संबंधित कार्यों के लिए जारी निविदाओं और भुगतान प्रक्रिया की जांच की जानी चाहिए?
  • क्या खर्च किए गए धन का वास्तविक उपयोग हुआ या नहीं?

पीएमओ, सीबीआई, ईडी सहित कई एजेंसियों को भेजी गई शिकायत

RTI कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने इस मामले में विस्तृत शिकायत देश की विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों को भेजी है। शिकायत भेजे जाने की जानकारी के अनुसार निम्न संस्थाओं से जांच की मांग की गई है—

  • प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
  • केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED)
  • केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC)
  • नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)
  • गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO)
  • लोक लेखा समिति (PAC)

फॉरेंसिक ऑडिट की मांग

शिकायत में मांग की गई है कि पिछले पांच वर्षों के कोल स्टॉक, आग नियंत्रण कार्यों, भुगतान अभिलेखों और संबंधित ठेकों का स्वतंत्र फॉरेंसिक एवं फिजिकल ऑडिट कराया जाए। साथ ही यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए।

कार्रवाई पर टिकी निगाहें

SECL कुसमुंडा से जुड़े इस मामले में सामने आए आधिकारिक दस्तावेज अब जांच एजेंसियों और प्रशासन के समक्ष महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच कराते हैं या नहीं तथा रिकॉर्ड में दर्ज विरोधाभास का वास्तविक कारण क्या है।

 

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