
आवास खाली न करने की स्थिति में ग्रेच्यूटी भुगतान पर कोलकाता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
High Court Calcutta का फैसला — मुख्य बातें (01.04.2026)
मामला: Eastern Coalfields Limited (ECL) बनाम Union of India व अन्य
विषय: रिटायर कर्मचारी द्वारा कंपनी क्वार्टर खाली न करने पर ग्रेच्युटी रोकना/समायोजित करना वैध है या नहीं।
पृष्ठभूमि
कर्मचारी 30.06.2022 को रिटायर हुई, पर कंपनी का आवंटित क्वार्टर अब तक खाली नहीं किया। ECL ने CIL के सर्कुलर (11.11.2021) के आधार पर कहा था कि क्वार्टर खाली किए बिना ग्रेच्युटी नहीं दी जाएगी और पेनल रेंट वसूला जाएगा।कंट्रोलिंग अथॉरिटी (05.08.2024) और अपीलीय प्राधिकारी (25.11.2025) ने कर्मचारी के पक्ष में ग्रेच्युटी देने का आदेश दिया।ECL ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट के महत्वपूर्ण निष्कर्ष
1. रिटायरमेंट के बाद भी क्वार्टर पर कब्जा रखना अनधिकृत कब्जा है।
2. सरकारी/कंपनी आवास के बकाया, लाइसेंस फीस, बिजली-पानी, तथा पेनल रेंट — ये सभी सरकारी देनदारियाँ (Govt. dues) हैं।
3. सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों (SAIL बनाम Raghbendra Singh; ONGC बनाम V.U. Warrier) के आधार पर: यदि कर्मचारी अनधिकृत रूप से क्वार्टर रोके रखता है, तो पेनल रेंट स्वाभाविक परिणाम है। ऐसे बकाये को ग्रेच्युटी सहित रिटायरल ड्यूज़ से समायोजित (adjust) किया जा सकता है।
4. पहले के प्राधिकरणों द्वारा ग्रेच्युटी देने के आदेश कानूनन सही नहीं थे।
कोर्ट का अंतिम आदेश
05.08.2024 और 25.11.2025 के आदेश रद्द (set aside)। ECL द्वारा जमा ₹18,99,752/- वापस करने का आदेश।
कंपनी को अधिकार:
किराया + पेनल रेंट ग्रेच्युटी से काटने का। कर्मचारी जब क्वार्टर खाली करेगी: कुल देनदारी घटाकर शेष ग्रेच्युटी 15 दिनों में देनी होगी।
फैसले का व्यावहारिक अर्थ (Coal Companies/CIL कर्मचारियों के लिए)
रिटायरमेंट के बाद क्वार्टर रोके रखने पर: ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है। पेनल रेंट व बिजली-पानी बकाया ग्रेच्युटी से काटा जा सकता है। CMPF/पेंशन अलग संस्था के अंतर्गत हैं, पर ग्रेच्युटी कंपनी के अधिकार क्षेत्र में है — इसलिए समायोजन संभव है। यह फैसला CIL/ECL जैसी कोल कंपनियों के लिए मिसाल (precedent) बनेगा।





