40 साल बाद खुली SECL कुसमुंडा प्रबंधन की नींद, युद्ध स्तर पर वैशाली नगर में वापस लिया जा रहा कब्जा….. खदान विस्तार के लिए प्रभावितों को देना है यहां बसावट…. प्रशासन की मोजुदगी में हो रहा सारा काम….

कोरबा – करो या मरो की स्थिति से गुजरती SECL कुसमुंडा प्रबंधन का जोर इन दिनों वैशाली नगर भूमि को फिर से हासिल करने की जुगत में है,यहां यह कहना बिलकुल भी गलत नही होगा की पूर्व के SECL कुसमुंडा प्रबंधन के अधिकारियों की उदासीनता का ही परिणाम है की वर्तमान प्रबंधन को अपनी ही जमीन हासिल करने में पसीने छूट रहें हैं। एक समय था जब खदान विस्तार के लिए प्रबंधन के पास पर्याप्त जमीन थी तब अधिकारी केवल कोयला उत्पादन पर ध्यान देते रहे और इतना ध्यान देते रहे की SECL की अधिग्रहित जमीन छोड़िए SECL कॉलोनी में बने क्वार्टर के बीच बेजा कब्जा कर घर बनाना, खाली पड़े क्वार्टरो को बाहरी व्यक्तियों द्वारा कब्जा करना, SECL द्वारा लगाए पेड़ पौधों को काटकर कब्जा करना, इत्यादि पर कभी ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि पूर्व अधिकारियों द्वारा मौन सहमति देते हुए कब्जा करने दिया गया, जिसका परिणाम यह हुआ कि एक का बना है तो हम भी बना लें। आज पूरे कुसमुंडा क्षेत्र की स्थिति यह है की चारों ओर सिर्फ बेजा कब्जा है, SECL को सड़क बनाना हो, ओवर ब्रिज बनाना हो, खदान विस्तार करना हो, बसावट देना हो, SECL को अपनी ही जमीन को पाने के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है। कहावत है ना प्यास लगी तो कुंवा खोद रहे वही हाल है। हालाकि वर्तमान में कुसमुंडा प्रबंधन के साथ प्रशासन भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हुई है, जिस वजह से SECL कुसमुंडा फिर से अपनी जमीन वापस ले पा रही है और बेजाकब्जा भी तोड़ा जा रहा है, पर सवाल यह भी बड़ा है की यही प्रशासन तब कहां थी जब बेजाकब्जा किया जा रहा था, ये SECL के अधिकारी तब कहां थे जब लोग कुसमुंडा में अपने और अपने परिवार को पालने खून पसीना एक कर जैसे तैसे छत बना रहे थे, आज अगर प्रबंधन और प्रशासन खदान किनारे बसे लोगो की बात करती है तो उन्हें इन बेजाकब्जा में काबिज लोगों के खून पसीने से जोड़े गए, ईट की दीवारों को तोड़ने से पहले हो रहे उनके दर्द को भी सुनना होगा। जितनी गलती बेजाकब्जा करने वालों की है उतनी ही गलती बेजा कब्जा करते समय ध्यान नहीं देने वाले प्रबंधन और प्रशासन की भी है। ये खाली जमीन पर खींचे गई लकीर और खाली जमीन पर बने सैकड़ों मकान एक रात में नही बने बल्कि कर्ज लेकर, खून पसीने की कमाई से बने हैं। देश हित में कोयला निकालने वाली कुसमुंडा प्रबंधन और आम जनों के हित को समझने वाली जिला प्रशासन को चाहिए की इन बेजा कब्जा में बने मकानों को ढहाने से पूर्व कम से कम उनकी लागत अथवा मलबे का भुगतान करें। जिनकी जमीन अधिग्रहित की गई और आज तक उन्हें रोजगार नही मिला उन्हें भी उनका अधिकार मिले। ४० वर्षो तक जमीन में कभी झांकने नही आए और अब आए तो ऐसे आएं की चंद दिनों में ही लोगो को दुनिया ही उजाड़ लेने आए।

इन दिनों कुसमुंडा खदान विस्तार के लिए खदान के किनारे बसे ग्रामीणों को विस्थापित करने के लिए जोर शोर से तैयारियां चल रही है । कुछ माह पूर्व जहां बरहमपुर दुरपा बस्ती में जगह चिन्हित किया गया उसके बाद वैशाली नगर खमरिया में जगह चिन्हित करते हुए सर्वप्रथम खेतों की मेड़ों को बराबर किया गया उसके बाद अवैध कब्जों को हटाने का कार्य भी बीते मंगलवार को शुरू हो गया। कुसमुंडा प्रबंधन के अधिकारियों ने बताया कि वैशाली नगर में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे हुए हैं, जिन्हें नोटिस दिया जा रहा है और जल्द से जल्द बेजा कब्जे हटाने की बात की जा रही है। जो मूल निवासी है उनका भी सर्वे किया जा रहा है उन्हें जमीन का मुआवजा और मलबे का भुगतान दिया जाएगा। बेजा कब्जा कर रहने वालों को किसी प्रकार की कोई क्षतिपूर्ति देने का कोई प्रावधान नहीं है। हालाकि प्रबंधन आपसी सहमति से इस पर विचार कर सकती हैं।

मशीन लेकर पहुंचे अधिकारियों को ग्रामीणों का विरोध भी झेलना पड़ा ग्रामीणों का आरोप है कि प्रबंधन द्वारा बिना बताए उनके मकानों को तोड़ा जा रहा है प्रबंधन ने शुरू में अस्थाई नौकरी मुआवजा देने की बात कही थी, पुराने प्रकरणों का निपटान भी करने की बात कही थी परंतु वर्तमान में स्थिति उलट है, कुसमुंडा प्रबंधन प्रशासन के साथ मिलकर जबरदस्ती यहां पर काम कर रही है जिसको लेकर यहां के ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। बीते गुरुवार को कुसमुंडा जीएम संजय मिश्रा ने अपने अधिकारियों के साथ काफी देर तक वैशाली नगर में रहे उन्होंने ग्रामीणों से बात करने की भी कोशिश की, काम को बंद कराने पंहुचे ग्रामीणों को समझाइश देते हुए अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित भी किया, कुछ ग्रामीण जिसमें महिलाएं शामिल थी, कोरबा नगर पालिक निगम एल्डरमैन श्रीमती गीता गवेल के नेतृत्व में चर्चा में शामिल हुई, उनके द्वारा कई बातों में आपसी सहमति भी बनी परंतु अभी ग्रामीणों की उपस्थित पूर्ण नहीं होने की वजह से किसी भी ठोस सहमति पर मुहर नही लग पाई। प्रशासन की ओर से एसडीएम, तहसीलदार, कुसमुंडा थाना प्रभारी दलबल के साथ देर शाम तक मौके पर डटे रहे। इस दौरान कुछ बेजा कब्जा धारियों की बाउंड्री वॉल भी गिराई गई। कुसमुंडा जीएम संजय मिश्रा ने बातों-बातों में या साफ कर दिया कि आने वाले समय में यहां से पूर्ण रूप से बेजा कब्जा हटा दिया जाएगा लगभग 3000 परिवारों को यहां पर विस्थापन देना है उन्होंने ग्रामीणों को कहा कि माता कर्मा कॉलेज से लेकर वैशाली नगर तक सारे बेजा कब्जे हटाए जाएंगे खाली पड़े भूमि में प्लाटिंग की जाएगी और जल्द से जल्द विस्थापितों को सर्वसुविधा के साथ यहां पर बसाया जाएगा। आपको बता दें तकरीबन आधे दर्जन जेसीबी के माध्यम से खेतो के मेड़ों को बराबर करने के दिशा में कार्य किया जा रहा है,अभी लगभग 100 से 150 एकड़ भूमि समतल की का चुकी है,यहां लगभग 400 एकड़ जमीन बराबर करनी है, आगे सड़क बनाना है,पाल्टिंग करनी है,स्कूल,मैदान से लेकर सामुदायिक भवन बनने और खदान से लगे लगभग 4 से 5 गांवों के हजारों लोगो को यहां विस्थापित करना है। एक ओर जहां बड़ी संख्या में विस्थापन की बात की जा रही है वहीं कई वर्षो से यहां काबिज लोगों की भी प्रबंधन को सुननी चाहिए उन्हें भी अपना परिवार मानकर उन्हें क्षतिपूर्ति देना चाहिए। बीते एक माह से कुसमुंडा क्षेत्र में चल रहे इस अभियान से यह स्पष्ट हो चुका है की आने वाले समय में कुसमुंडा क्षेत्र के अन्य इलाकों में भी बेजाकब्जा हटाया जाएगा, आम जनों से अपील है अपनी गाढ़ी कमाई कृपया कर बेजाकब्जा की जमीन पर ना लगाए अन्यथा इसी तरह की परेशानी झेलनी पड़ सकती है,आपको याद होगा वर्ष 2021 में इमली छापर कुचेना मोड से लेकर सर्वमंगला मंदिर चौक तक सेकडो मकान व दुकानों को फोर लेन बनाने के लिए तोड़ा गया था, इसके बाद अब इमली छापर में ओवर ब्रिज बनाने के लिए भी दर्जनों घरों को तोड़ने नोटिस जारी किया जा चुका है,खदान विस्तार के लिए बसावट देने वैशाली नगर से भी बेजा कब्जा हटाने SECL कुसमुंडा प्रबंधन ने कमर कस ली है। आने वाले कुछ वर्षों में खदान और विस्तार होना है बहुत सारे प्रोजेक्ट और बने हैं जिसके लिए कुसमुंडा कालोनियों के किनारे बने अवैध कब्जे भी ढहाए जाएंगे।

 

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