Chhattisgarhछत्तीसगढ

छत्तीसगढ़ के बाल संप्रेक्षण गृहों की सुरक्षा अब पूर्व सैनिकों के हवाले, 26 संस्थानों में तैनात होंगे 156 जवान

छत्तीसगढ़ के बाल संप्रेक्षण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार ने पूर्व सैनिकों की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है। बाल देखरेख और संप्रेक्षण गृहों में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवालों के बाद उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने इस संबंध में शपथ-पत्र प्रस्तुत किया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया है कि सैनिक कल्याण बोर्ड को पत्र लिखकर पूर्व सैनिकों की नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

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राज्य शासन ने उच्च न्यायालय में प्रस्तुत ब्योरे में बताया कि प्रदेश के 26 बाल संप्रेक्षण और देखरेख संस्थानों में 156 पूर्व सैनिकों की तैनाती की योजना बनाई गई है। इसके लिए सैनिक कल्याण बोर्ड से जानकारी मांगी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस महानिदेशक और होमगार्ड्स के महानिदेशक को संस्थानों का सुरक्षा ऑडिट कराने तथा पुख्ता प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस अधीक्षकों को नियमित गश्त, रात्रि पेट्रोलिंग, कर्मचारियों के सत्यापन, नोडल अधिकारी की नियुक्ति, मॉक ड्रिल और मासिक समीक्षा करने को कहा है। इसके अतिरिक्त, अधिकारियों, सलाहकारों और कर्मचारियों के लिए जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, पॉक्सो व मिशन वात्सल्य पर आधारित आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
बाल संप्रेक्षण गृहों की सुरक्षा का मुद्दा 11 जुलाई की रात बिलासपुर के नूतन चौक स्थित संस्थान में हुई हिंसा के बाद सामने आया था। वहां चार किशोरों ने चौकीदार की हाथ-पैर बांधकर और गला दबाकर हत्या कर दी थी। इसके बाद हुए प्रदर्शनों और उपजे विवाद का संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने स्वयं जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि महासमुंद संस्थान से भागे आठ बच्चों में से पांच को तलाश लिया है और तीन की तलाश जारी है। बिलासपुर से भागे चार में से तीन बच्चों को वापस लाया जा चुका है, जबकि एक बालक की खोज की जा रही है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को याचिका में पक्षकार बनाने का आदेश दिया है। केंद्र सरकार की ओर से बताया गया था कि इन गृहों का प्रबंधन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत ने सुरक्षा व्यवस्था और 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती पर आने वाले वित्तीय भार के संबंध में मंत्रालय से व्यक्तिगत शपथ-पत्र प्रस्तुत कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। उच्च न्यायालय याचिका पर अगली सुनवाई 24 सितंबर को करेगा।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026