Korba Fake Marksheet Case: 12वीं के अंकों में कथित हेराफेरी कर शिक्षक बना हेडमास्टर, शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप

Korba Fake Marksheet Case: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोरबा विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला डिलाडेरा में पदस्थ प्रधान पाठक दिलीप कुमार कुर्रे पर आरोप है कि उन्होंने 12वीं की अंकसूची में कथित रूप से हेराफेरी कर सरकारी नौकरी हासिल की और करीब 17 वर्षों तक वेतन प्राप्त करते रहे। जानकारी के अनुसार, शिक्षक की मूल अंकसूची में प्राप्तांक 254/450 बताए गए हैं, जबकि नियुक्ति के समय प्रस्तुत दस्तावेजों में अंक बढ़ाकर 266/450 दर्शाए गए। इस कथित अंतर को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कोरबा द्वारा आरोप पत्र क्रमांक 2024-25/305 जारी किया गया है। विभागीय रिकॉर्ड और सर्विस बुक के दस्तावेजों की जांच के दौरान यह विसंगति सामने आई।
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शिकायतकर्ता ने उठाए विभागीय जांच पर सवाल
मामले की शिकायत जितेंद्र कुमार साहू द्वारा मुख्यमंत्री और लोकायुक्त से की गई है। शिकायत में सवाल उठाया गया है कि वर्ष 2007 से अब तक हुए विभिन्न विभागीय सत्यापन और सेवा रिकॉर्ड जांच के दौरान यह कथित फर्जीवाड़ा अधिकारियों की नजर से कैसे बचा रहा। शिकायतकर्ता ने मामले में विभागीय लापरवाही और संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई है।
कार्रवाई की मांग तेज
मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बहस शुरू हो गई है। शिकायतकर्ता ने आरोपी शिक्षक को तत्काल सेवा से पृथक करने, नियुक्ति निरस्त करने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जालसाजी का प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह भ्रष्टाचार को संरक्षण देने जैसा संदेश जाएगा।
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शिक्षा विभाग की साख पर सवाल
यह मामला केवल एक शिक्षक की नियुक्ति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि पूरी चयन और सत्यापन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। शिक्षा विभाग, जिसे समाज में “शिक्षा का मंदिर” कहा जाता है, उसमें इस तरह के आरोपों ने विभागीय पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें स्कूल शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।






