Health and fitness

बार-बार बुखार आना हो सकता है खतरे का संकेत! बच्चों में ब्लड कैंसर के इन लक्षणों पर दें ध्यान

नई दिल्ली : बच्चों का बचपन खुशियों और ऊर्जा से भरा होता है, लेकिन जब उनकी सेहत से जुड़ी कोई गंभीर समस्या सामने आती है, तो माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है। बच्चों में होने वाला ब्लड कैंसर यानी ल्यूकेमिया भी ऐसी ही गंभीर बीमारी है। इसके शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य बुखार या मौसमी संक्रमण जैसे दिखाई देते हैं, जिससे इन्हें पहचानना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता बच्चों के स्वास्थ्य में होने वाले असामान्य बदलावों पर ध्यान दें।

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बच्चों और बड़ों में कैंसर के कारण अलग हो सकते हैं

बड़ों में कैंसर का संबंध कई बार तंबाकू, शराब और जीवनशैली से जुड़ी आदतों से हो सकता है। वहीं, बच्चों में होने वाले ब्लड कैंसर के पीछे आमतौर पर शरीर की कोशिकाओं के डीएनए में होने वाले बदलाव जिम्मेदार होते हैं। कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए इस बीमारी के लिए माता-पिता को खुद को दोषी नहीं मानना चाहिए।

बच्चों में ब्लड कैंसर कैसे होता है?

ल्यूकेमिया बच्चों में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है। यह बोन मैरो यानी अस्थि मज्जा में शुरू होता है, जहां शरीर में खून की कोशिकाएं बनती हैं। इस बीमारी में असामान्य श्वेत रक्त कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। इससे सामान्य रक्त कोशिकाओं के निर्माण पर असर पड़ सकता है और शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर हो सकती है।

बच्चों में दिखने वाले इन लक्षणों पर दें ध्यान

ब्लड कैंसर के शुरुआती संकेत सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते हो सकते हैं। हालांकि, कुछ लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बार-बार दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

  • बार-बार या लंबे समय तक बुखार: बुखार का लगातार बने रहना या ठीक होने के बाद बार-बार लौटना।
  • हड्डियों और जोड़ों में दर्द: हाथ-पैरों या हड्डियों में लगातार दर्द होना और जोड़ों में सूजन दिखाई देना।
  • गर्दन या कांख में गांठें: शरीर के कुछ हिस्सों में लिम्फ नोड्स का बढ़ना या गांठें महसूस होना।
  • पेट में सूजन: पेट का असामान्य रूप से फूलना या भारीपन महसूस होना।
  • कमजोरी और थकान: बच्चा जल्दी थकने लगे, खेलने में रुचि कम दिखाए या सामान्य से अधिक सुस्त रहे।
  • चेहरे पर पीलापन: शरीर में खून की कमी के कारण त्वचा का पीला दिखाई देना।

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लक्षण दिखने पर क्या करें?

यह ध्यान रखना जरूरी है कि बुखार, कमजोरी, शरीर में दर्द और गांठें कई सामान्य बीमारियों में भी हो सकती हैं। केवल इन लक्षणों के आधार पर ब्लड कैंसर की पुष्टि नहीं की जा सकती। लेकिन यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें, बार-बार लौटें या बच्चे की सेहत में लगातार गिरावट दिखाई दे, तो चिकित्सकीय जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

समय पर जांच और सही निदान से बीमारी का पता लगाने तथा उचित उपचार शुरू करने में मदद मिलती है। बच्चों में ब्लड कैंसर के कई प्रकारों का प्रभावी उपचार संभव है। इसलिए शुरुआती संकेतों को पहचानना, लक्षणों को नजरअंदाज न करना और समय पर उचित कदम उठाना बेहद महत्वपूर्ण है।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026