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हवा से निकलेगा पीने का पानी, वैज्ञानिकों की इस अनोखी जैकेट ने दुनिया को चौंकाया

नई दिल्लीे : सोचिए, अगर आप एक ऐसी जैकेट पहनें जो आपकी प्यास बुझा सके। यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि अब हकीकत बन चुका है। टेक्सास यूनिवर्सिटी के इंजीनियर्स ने एक ऐसा अनोखा कपड़ा तैयार किया है, जो सीधे हवा से नमी को सोखकर उसे पीने लायक साफ पानी में बदल देता है।

पानी की कमी से जूझती दुनिया के लिए यह तकनीक एक बड़े गेम-चेंजर के रूप में देखी जा रही है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह तकनीक क्या है और कैसे काम करती है।

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किसके लिए फायदेमंद है यह तकनीक?

यह क्रांतिकारी जैकेट खास तौर पर उन लोगों के लिए वरदान है जिन्हें अक्सर पानी की कमी वाले इलाकों में रहना पड़ता है। यह इनके लिए सबसे ज्यादा उपयोगी साबित होगी:

  • हाइकर्स और कैंपर्स: जो जंगलों या पहाड़ों की लंबी यात्रा पर जाते हैं।
  • बचाव दल: जो आपातकालीन स्थितियों में दूरदराज के इलाकों में काम करते हैं।
  • किसान: जो सूखे या कम पानी वाले इलाकों में खेती करते हैं।

कैसे काम करती है यह जादुई जैकेट?

इस जैकेट का पूरा कमाल इसके कपड़े में छिपा है। इसे बहुत ही स्मार्ट तरीके से डिजाइन किया गया है:

    • हाइड्रोगेल फैब्रिक: इस जैकेट को बनाने में एक खास तरह के हाइड्रोगेल कपड़े का इस्तेमाल किया गया है।
  • नमी सोखना: यह स्मार्ट कपड़ा एक स्पंज की तरह काम करता है। यह हवा में मौजूद भाप (नमी) को तेजी से अपने अंदर खींचकर जमा कर लेता है।
  • पानी में बदलना: जब इस कपड़े को धूप या गर्मी मिलती है, तो यह जमा की हुई नमी को शुद्ध और पीने लायक पानी के रूप में बाहर छोड़ देता है।

कितना पानी बना सकती है जैकेट?

वैज्ञानिकों ने इसे किसी भारी-भरकम मशीन या बॉक्स की तरह नहीं, बल्कि एक साधारण पहनने वाले कपड़े की तरह डिजाइन किया है।

  • डिटैचेबल यूनिट्स: जैकेट में नमी सोखने वाले कई छोटे-छोटे पैच लगे हैं, जिन्हें आसानी से जैकेट से अलग किया जा सकता है।
  • फोल्डेबल कलेक्टर: जब इन यूनिट्स को जैकेट से निकालकर एक फोल्डेबल कलेक्टर में रखकर गर्म किया जाता है, तो इनमें से पानी निकलने लगता है।
  • पानी की मात्रा: टेस्टिंग के दौरान इस जैकेट ने रोजाना 400 से 900 मिलीलीटर पानी बनाया। वहीं, मैदानी इलाकों में इसने हर दिन 1.3 लीटर तक पानी बनाकर सबको हैरान कर दिया।

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क्या है इस वाटर जैकेट का भविष्य?

इस शानदार तकनीक का ऑस्टिन और चिहुआहुआन जैसे सूखे रेगिस्तानी इलाकों में सफल टेस्ट किया जा चुका है और यूनिवर्सिटी ने इसका पेटेंट भी फाइल कर दिया है। आने वाले समय में इस तकनीक का दायरा सिर्फ जैकेट तक सीमित नहीं रहेगा।

वैज्ञानिक इस फैब्रिक का इस्तेमाल बैकपैक, कैंपिंग टेंट और आपातकालीन शेल्टर बनाने में भी करने वाले हैं। यह टेक्नोलॉजी दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका जैसे उन देशों के लिए एक बड़ी उम्मीद है, जहां आज भी पीने के साफ पानी की भारी किल्लत है।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026