Bilaspur High Court : काम नहीं किया तो नहीं मिलेगा वेतन! हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, इन कर्मचारियों को लगा झटका

Bilaspur High Court : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की रुकी हुई सैलरी को लेकर एक ऐसा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की डबल बेंच ने साफ कह दिया है कि अगर किसी कर्मचारी को क्रिमिनल केस की वजह से नौकरी से निकाला गया था, और बाद में वह कोर्ट से बरी भी हो जाता है, तो भी वह घर बैठे समय का पूरा पैसा नहीं मांग सकता। यह पूरा मामला विद्युत मंडल के एक पूर्व सुपरवाइजर से जुड़ा है। वह सहायक श्रेणी-1 के पद पर भर्ती हुए थे और तरक्की पाकर सुपरवाइजर बने। इसी बीच उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज हो गया। स्पेशल कोर्ट ने उन्हें दोषी मान लिया, जिसके तुरंत बाद विभाग ने उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद कहानी में नया मोड़ आया।
कर्मचारी ने खुद को बेकसूर साबित करने के लिए हाईकोर्ट में अपील की। यह कानूनी लड़ाई इतनी लंबी खिंची कि इस दौरान उनकी रिटायरमेंट की उम्र भी पार हो गई। आखिरकार हाईकोर्ट ने उन्हें आरोपों से बरी तो कर दिया, लेकिन तब तक वह रिटायर हो चुके थे। बरी होने के बाद बिजली विभाग ने उनका बर्खास्तगी का आदेश तो वापस ले लिया, लेकिन नौकरी से बाहर रहने के दौरान का पूरा पिछला वेतन और एरियर देने से साफ मना कर दिया।
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विभाग के इस फैसले के खिलाफ कर्मचारी पहले सिंगल बेंच गए। वहां याचिका खारिज हुई, तो उन्होंने डबल बेंच का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील का तर्क था कि जब कोर्ट ने बरी कर दिया, यानी कोई दोष ही नहीं था, तो फिर इतने सालों का पैसा क्यों रोका गया? लेकिन बोदरी स्थित हाईकोर्ट परिसर में हुई सुनवाई के बाद डबल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कर्मचारी ने उस अवधि में विभाग के लिए कोई काम ही नहीं किया, तो वह अधिकार के तौर पर पिछले वेतन का दावा नहीं कर सकता।






