आईपीएस-दीपका में हिन्दी दिवस पर आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रम

विविधताओं से भरे देश में, भाषाओं की फुलवारी है इनमें सबसे प्यारी मातृभाषा हमारी है-डॉ. संजय गुप्ता।

कोरबा : विश्व हिन्दी दिवस का उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए वातावरण निर्मित करना, हिन्दी के प्रति अनुराग पैदा करना, हिन्दी की दशा के लिए जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को विश्व भाषा के रूप में प्रस्तुत करना है । विदेशों में भारतीय दूतावास विश्व हिन्दी दिवस को विशेष आयोजन करते हैं । विश्व में हिन्दी प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन आरंभ किया गया था । प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी, 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था । अतः 10 जनवरी का दिन ही विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया ।


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रतिवर्ष विश्व हिन्दी दिवस(10 जनवरी) के रूप मनाए जाने की घोषणा की थी । विश्व हिन्दी दिवस के अतिरिक्त 14 सिंतबर को ‘हिन्दी-दिवस‘ के रूप में मनाया जाता है । 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था तभी से 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है ।

इंडस पब्लिक स्कूल दीपका में हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया सर्वप्रथम कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। विद्यालय के कक्षा एलकेजी एवं यूकेजी के छात्र- छात्राओं के द्वारा हिन्दी में अपना परिचय देकर एवं विभिन्न् कर्णप्रिय हिन्दी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।एलकेजी एवं यूकेजी के छात्र- छात्राओं के द्वारा सुंदर हस्तलेखन में हिन्दी के पाठों को लिखा गया।कक्षा में हिन्दी सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया एवं विजया प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।इन नन्हें मुन्हें बच्चों के मन में हिन्दी के प्रति सम्मान जागृत करने हेतु श्रीमती रुमकी हालदार ,श्रीमती स्वाति सिंह,श्रीमती मधुचंदा पात्रा,श्रीमती मौसमी मैडम का भरपूर सहयोग रहा।विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अभिनय शैली में विभिन्न कविताओं का पाठ किया गया।

विद्यालय के शैक्षणिक प्रभारी श्री सब्यसाची सरकार सर ने कहा कि हिंदी एक ऐसी भाषा है जो सभी धर्मों के लोगों को आपस में जोड़े रखने का काम करती है, यह सिर्फ एक भाषा का काम ही नहीं करती बल्कि यह एक देश की संस्कृति, वेशभूषा और रहन-सहन तथा पहचान आदि है। इस भाषा की आदि जननी संस्कृत है। संस्कृत पाली, प्राकृतिक भाषा से होती हुई और अपभ्रंश तक पहुंचती है। फिर अपभ्रंश से गुजरती हुई प्राचीन/प्रारंभिक हिंदी का रूप लेती है। सामान्यता हिंदी भाषा के इतिहास का आरंभ अपभ्रंश से माना जाता है।हिंदी भाषा भी अब इंटरनेट पर तेजी से अपना कब्ज़ा जमा रही है। आज के समय में हिंदी भाषा हर समाचार पत्र से लेकर हिंदी ब्लॉग तक अपनी पहचान हासिल कर रही है।

गूगल और विकिपीडिया जैसी बड़ी वेबसाइट हिंदी को हर व्यक्ति तक पहुँचाने में अपनी हर संभव कोशिश कर रही है। इन्होंने हिंदी भाषा के महत्व को समझते हुए इंटरनेट पर ट्रांसलेटर, सर्च, सोफ्टवेयर आदि को विकसित किया जिससे लोगों के लिए हिंदी को जानना और भी आसान हो गया।

हिंदी एक ऐसी भाषा है जिसकी मदद से भारत के प्रत्येक नागरिक आसानी से आपस में विचार विमर्श कर सकते हैं। हिंदी को संस्कृत की बड़ी बेटी का दर्जा भी प्राप्त है, हिंदी भाषा बहुत ही सरल भाषा है जिसे सभी लोग आसानी से सीखकर इसका प्रयोग कर सकते हैं।

प्राइमरी एवं प्री प्राइमरी की शैक्षणिक प्रभारी श्रीमती सोमा सरकार मैडम ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि पुरे विश्व में भारतीय संस्कृति का प्रचार करने का श्रेय एक मात्र हिंदी भाषा को जाता है। भाषा की जननी और साहित्य की गरिमा हिंदी भाषा जन-आंदोलनों की भी भाषा रही है। आज भारत में पश्चिमी संस्कृति को अपनाया जा रहा है, जिसके चलते अंग्रेजी भाषा का सभी क्षेत्रों में चलन बढ़ गया है। वास्तविक जीवन में भले ही हम हिंदी का प्रयोग जरूर करते है लेकिन कॉर्पोरेट जगत में ज्यादातर अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग होता है, जो हमारे लिए एक शर्मनाक बात है।

यह भाषा भारत में सबसे अधिक बोली जाती है और विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में दूसरा स्थान है।हिंदी सिर्फ एक भाषा का काम ही नहीं करती है। यह सभी लोगों को एक दूसरे को आपस में जोड़े रखने का काम भी करती है। हिंदी सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में बोली जाने वाली भाषा है। इसका अध्ययन विदेशों में भी होता है और विश्व के कोने-कोने से लोग भारत सिर्फ हिंदी सिखने के लिए आते है। ऐसा माना जाता है कि संस्कृत भाषा का सरलतम रूप हिंदी भाषा ही है। हिंदी भाषा में संस्कृत के काफ़ी शब्दों का समावेश मिल जाएगा।

विद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष श्री हेमलाल श्रीवास ने कहा कि राष्ट्र के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मातृभाषा एवं राष्ट्रभाषा पर गर्व होना चाहिए।हम चाहे विश्व के किसी भी कोने में रहें अपनी भाषा के प्रति हमेशा सममान का भाव हृदय में होना चाहिए।उस राष्ट्र का अस्तित्व सदियों तक बरकरार रहता है जो अपनी भाषा,संस्कृति,वेषभूषा और रहन-सहन व साहित्य को सम्हालकर और संजोकर रखता है।हमें गर्व से सीना तानकर अपनी भाषा में वार्तालाप करनी चाहिए और अन्य को भी प्रेरित करना चाहिए।

हिन्दी शिक्षिका श्रीमती सोमा चौधरी ने कहा कि हिन्दी भारत माता के माथे की बिंदी है।हिन्दी हमारी पहचान और हमारा अस्तित्व और व्यक्तित्व है।हमें अन्य को भी हिन्दी बोलने और व्यवहार में लाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।हिन्दी स्वयं में पूर्ण भाषा है।हिन्दी का शब्दकोश विशाल है।यह हमारी सभ्यता और संस्कृति की परिचायक है।हमें गर्व है कि हमारी राजभाषा हिन्दी है।

हिन्दी शिक्षिका श्रीमती सुनीता श्रीवास ने कहा कि आज हमारे देश के अतिरिक्त अन्य देशों में भी हिन्दी बडे़ सम्मान से बोला और पढ़ा जाता है। फिजी,मलेशिया इत्यादि देशों में काफी लोग हिन्दी में बात भी करते हैं और लेखन कार्य भी हिन्दी में ही करते हैं। आज अन्य देशों से लोग हिन्दी में शोध करने के लिए हमारे देश में आते हैं। हिन्दी स्वयं में संपूर्ण है इसीलिए आज विश्व हमारी ओर आशा भरी निगाहों से देखता है।कोविड में भी सर्वप्रथम हमारे भारत देश के ही भारत बायोटेक कंपनी ने अन्य देशों को टीका भेजकर उदारता का परिचय दिया। अर्थात एक हिन्दी भाषी देश ही विश्व की मदद करने को आगे आया था।

दीपका स्थित इंडस पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रभाषा हिन्दी को सम्मानित करने हेतु विभिन्न प्रकार के प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें प्रमुख रूप से श्लोगन रायटिंग, चित्रकला, निबंध प्रतियोगिता एवं हिन्दी काव्य प्रस्तुति प्रमुख थे । विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर प्रत्येक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया एवं हिन्दी भाषा के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। एक प्रतियोगिता विशेष थी जिसमें विद्यार्थियों को स्वयं के बारे में पूर्णतः हिन्दी शब्दों को सम्मिलित कर स्वयं का परिचय देने हेतु प्रोत्साहित किया जाता था । इस प्रतियोगिता का भी बच्चों भरपुर लुत्फ़ उठाया ।

विद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि हमारी राष्ट्र भाषा के साथ ही हमारी संस्कृति के महत्व पर जोर देने के लिए हिन्दी दिवस एक महान कदम है। हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है औैर हम हमेषा इसका सम्मान करें और राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की उन्नति के लिए आवश्यक है।हिंदी भाषा विश्व के प्राचीन और सरल भाषा में से एक है, हिंदी भाषा भारत की मूल भाषा है। हिंदी भाषा हमारी संस्कृति और संस्कारों की पहचान है। हिंदी भाषा को सीखना बहुत ही आसान है, यह भाषा हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान और गौरव प्रदान कराती है।हमारे भारत देश की राष्ट्रभाषा और राजभाषा एक ही है, हमारे भारत देश में हिंदी भाषा का विशेष महत्व है।

हिंदी भाषा का जन्म लगभग 1000 वर्षों पहले हुआ था, हिंदी भाषा का जन्म देवभाषा संस्कृत के कोख से हुआ है ।हमारे देश में विभिन्न प्रकार की भाषाएं बोली जाती है जिनमें हिंदी भाषा का विशेष महत्व है, क्योंकि हिंदी हमारे भारत देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी भाषा केवल विचार विमर्श को साझा करने का एक माध्यम ही नहीं बल्कि यह सभी लोगों को एक दूसरे से आपस में जोड़े रखने का कार्य भी करता है।

विश्व हिन्दी दिवस समारोह के अंर्तगत आयोजित की गई सभी प्रतियोगिताओं का आयोजन विद्यालय के पाठ्य सहभागी प्रभारी के दिशा- निर्देश में विद्यालय के हिन्दी विभाग के समस्त शिक्षक एवं शिक्षिका श्री हेमलाल श्रीवास, श्रीमती सुनीता श्रीवास ,कुमारी सस्मिता परिदा एवं श्रीमति सोमा चौधरी के सहयोग से किया गया।

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