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धान बेचने वाले किसानों के लिए बड़ी खबर! इस बार खरीदी में हुए 4 अहम बदलाव, जानें नई सुविधाएं

रायपुर : छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार ने इस बार किसानों को पंजीयन और दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रियाओं में बड़ी राहत देने का निर्णय लिया है। अब एग्रीस्टेक (AgriStack) आईडी वाले पिछले साल के पंजीकृत किसानों को धान बेचने के लिए दोबारा पंजीयन कराने की जरूरत नहीं होगी। इतना ही नहीं, उन्हें धान विक्रय के दौरान समिति में अलग से ऋण पुस्तिका भी लेकर नहीं जाना पड़ेगा।

राज्य में धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से शुरू होगी। इस वर्ष 27.50 लाख से अधिक किसानों से धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। सरकार द्वारा घोषित दर के अनुसार, किसानों से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर धान खरीदा जाएगा।

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एग्रीस्टेक आईडी वाले किसानों को दोबारा पंजीयन से छूट

धान खरीदी व्यवस्था में इस बार सबसे बड़ी राहत एग्रीस्टेक आईडी वाले किसानों को मिलेगी। पिछले वर्ष पंजीकृत जिन किसानों की एग्रीस्टेक आईडी उपलब्ध है, उन्हें नया पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। साथ ही धान बेचते समय समिति में अलग से ऋण पुस्तिका प्रस्तुत करने की अनिवार्यता भी नहीं रहेगी।

इससे किसानों को दस्तावेजों की औपचारिकताओं और बार-बार समितियों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। हालांकि, जिन किसानों की एग्रीस्टेक आईडी नहीं बनी है या जिनके रिकॉर्ड में कोई त्रुटि है, उन्हें निर्धारित पंजीयन और सुधार प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

डिजिटल क्रॉप सर्वे से तय होगा धान का रकबा

धान खरीदी में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार डिजिटल क्रॉप सर्वे का सहारा ले रही है। इसके माध्यम से किसानों के धान के रकबे का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इसी डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर खरीदी की पात्रता निर्धारित करने में मदद मिलेगी।

इस व्यवस्था से वास्तविक खेती के रकबे का सत्यापन आसान होगा। साथ ही गलत रकबे के आधार पर धान बेचने जैसी अनियमितताओं पर भी रोक लगाने में सहायता मिलेगी।

बायोमेट्रिक सत्यापन से होगी किसानों की पहचान

सरकार ने धान खरीदी प्रक्रिया में बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था भी लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत धान बेचने वाले किसानों की पहचान का सत्यापन किया जाएगा। इसका उद्देश्य फर्जी पहचान के जरिए धान विक्रय और अन्य अनियमितताओं को रोकना है। इस व्यवस्था से खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

360 नए केंद्रों के साथ प्रदेश में 3100 उपार्जन केंद्र

किसानों को धान बेचने में होने वाली परेशानी कम करने के लिए प्रदेश में 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। इसके बाद खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में कुल 3100 केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी।

नए केंद्र खुलने से किसानों को धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। साथ ही पुराने केंद्रों पर भीड़ का दबाव कम होगा और खरीदी व्यवस्था को सुचारू बनाने में मदद मिलेगी।

21 क्विंटल प्रति एकड़ तक 3100 रुपये में खरीदा जाएगा धान

राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार, इस वर्ष 27.50 लाख से अधिक किसानों से धान खरीदी की जाएगी। किसानों से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की घोषित दर पर धान खरीदा जाएगा। इस हिसाब से निर्धारित सीमा के तहत एक एकड़ में 21 क्विंटल धान बेचने पर किसान को अधिकतम 65,100 रुपये मिल सकते हैं।

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किसान समय रहते जांच लें अपने दस्तावेज

धान खरीदी शुरू होने से पहले किसानों को अपनी एग्रीस्टेक आईडी और पंजीयन संबंधी जानकारी की जांच कर लेनी चाहिए। इसके अलावा डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज रकबे का सत्यापन भी जरूरी है। यदि किसी किसान के रिकॉर्ड में कोई गलती है, तो उसे समय रहते संबंधित समिति या अधिकारियों से संपर्क कर सुधार कराना चाहिए।

कुल मिलाकर इस बार एग्रीस्टेक आईडी, डिजिटल क्रॉप सर्वे, बायोमेट्रिक सत्यापन और नए उपार्जन केंद्रों के जरिए धान खरीदी व्यवस्था को आसान और पारदर्शी बनाने की तैयारी है।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026