SECL गेवरा में भारी औद्योगिक गतिरोध: एक तरफ CMD का हाई-प्रोफाइल दौरा, दूसरी तरफ अजय जायसवाल के नेतृत्व में भू-विस्थापितों ने ठप किया काम.. सीएमडी का दौरा महज दिखावा, खदान में जारी है श्रमिकों का शोषण; अजय जायसवाल
सतपाल सिंह के साथ ओम गवेल की खबर
SECL गेवरा में भारी औद्योगिक गतिरोध: एक तरफ CMD का हाई-प्रोफाइल दौरा, दूसरी तरफ अजय जायसवाल के नेतृत्व में भू-विस्थापितों ने ठप किया काम..
सीएमडी का दौरा महज दिखावा, खदान में जारी है श्रमिकों का शोषण; अजय जायसवाल
कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की मेगा परियोजना गेवरा खदान में आज उस वक्त प्रशासनिक व औद्योगिक गतिरोध चरम पर पहुंच गया, जब एक ओर प्रबंधन के शीर्ष मुखिया (CMD) का आधिकारिक दौरा चल रहा था, वहीं दूसरी ओर भू-विस्थापित श्रमिकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर खदान का चक्का जाम कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। जिला पंचायत कोरबा के पूर्व उपाध्यक्ष अजय जायसवाल के नेतृत्व में आक्रोशित ग्रामीणों और श्रमिकों ने खदान में प्रवेश कर परिचालन ठप करा दिया है।
औद्योगिक अशांति और प्रबंधन की विफलता
गेवरा खदान में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनी पीएनसी (PNC) एवं अन्य अनुबंधित कंपनियों के अधीन कार्यरत भू-विस्थापित कर्मचारी पिछले छह महीनों से अपनी बुनियादी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। श्रमिकों का आरोप है कि बार-बार ध्यानाकर्षण के बावजूद प्रबंधन ने उनकी समस्याओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
श्रम गतिरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
• वेतन भुगतान में विफलता: श्रमिकों का पिछले दो महीनों का वेतन प्रबंधन स्तर पर लंबित है।
• पारदर्शिता का अभाव: नियम सम्मत ‘पेमेंट स्लिप’ (Salary Slip) न दिया जाना।
• सुरक्षा मानकों की अनदेखी: कार्यस्थल पर अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों और सुरक्षित वातावरण का अभाव।
शीर्ष नेतृत्व के दौरे पर तीखा हमला
भू-विस्थापित श्रमिकों की ‘हाई पावर कमेटी’ की अनुशंसा पर शुरू हुए इस आंदोलन ने आज उस समय उग्र रूप धारण कर लिया जब एसईसीएल के सीएमडी (CMD) खदान के निरीक्षण पर पहुंचे थे। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष अजय जायसवाल ने प्रबंधन के इस शीर्ष दौरे को “महज एक प्रशासनिक दिखावा” करार दिया।
जायसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “एक तरफ खदान के भीतर भू-विस्थापितों और स्थानीय श्रमिकों का भयानक आर्थिक व मानसिक शोषण हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ शीर्ष नेतृत्व जमीनी हकीकत से आंखें मूंदे हुए है। सीएमडी का यह दौरा केवल कागजी खानापूर्ति है, उन्हें श्रमिकों की बदहाली से कोई सरोकार नहीं है।”
बेमियादी हड़ताल का ऐलान
मौके पर मौजूद सैकड़ों भू-विस्थापित श्रमिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक वेतन भुगतान, सुरक्षा मानकों और विस्थापन से जुड़ी सभी न्यायोचित मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उत्पादन और खदान का परिचालन पूरी तरह ठप रहेगा। समाचार लिखे जाने तक खदान में आंशिक चक्काजाम की स्थिति बनी हुई थी और प्रबंधन व प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध बरकरार था।





