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कोरबा निगम में ई-रिक्शा खरीदी या ‘बड़ा घोटाला’? RTI में सच मांगने पर अफसरों के छूटे पसीने, राज्य सूचना आयोग के आदेश का सहारा लेकर जानकारी छिपाने का खेल

कोरबा। जनता के टैक्स के पैसों का हिसाब मांगना कोरबा नगर पालिक निगम के अधिकारियों के लिए इतना नागवार गुजरा कि सूचना का अधिकार कानून की ही धज्जियां उड़ा दी गईं। मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में कचरा संग्रहण हेतु खरीदे गए ई-रिक्शों की खरीदी, बिलों और स्टॉक रजिस्टर की जानकारी से जुड़ा है। जब एक जागरूक नागरिक ने पाई-पाई का हिसाब मांगा, तो निगम के जिम्मेदार अधिकारियों और अधीक्षण अभियंता ने जानकारी देने के बजाय ऐसा बहाना बनाया जिसे सुनकर कानून के जानकार भी अपना सिर पीट लें।

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क्या है पूरा मामला? जानिए कैसे खेला गया ‘गोपनीयता’ का खेल
RTI कार्यकर्ता जितेन्द्र कुमार साहू ने 11 सितंबर 2026 को नगर पालिक निगम कोरबा में आवेदन (क्र. 305) लगाकर ई-रिक्शा खरीदी से जुड़ी निम्नलिखित पारदर्शी जानकारियां मांगी थीं।

* ई-रिक्शा क्रय की प्रशासनिक, वित्तीय स्वीकृति आदेश और स्वीकृत बजट की प्रति।
* टेंडर नोटिस, सप्लाई ऑर्डर, न्यूनतम दर भरने वाली एजेंसी का नाम, मेक/मॉडल और स्वीकृत दर।
* कुल खरीदे गए ई-रिक्शा की संख्या, RTO पंजीयन नंबर और स्टॉक रजिस्टर प्रविष्टि की सत्यापित प्रति।
* सप्लायर/ठेकेदार को किए गए कुल भुगतान, पास बिल, MB बुक और वारंटी/गारंटी कार्ड की प्रतियां।
* ई-रिक्शा क्रय की मूल फाइल एवं निर्मित वाहनों के भौतिक निरीक्षण की तिथि व समय।
शर्मनाक बहाना: “स्पष्ट जानकारी नहीं है, इसलिए नहीं देंगे!”
किसी भी पारदर्शी प्रशासन में ये सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा होते हैं। लेकिन कोरबा निगम के अधीक्षण अभियंता और जन सूचना अधिकारी ने 23 सितंबर 2026 को पत्र (क्र. 9994/10174) जारी कर साफ इंकार कर दिया।
अधिकारियों का तर्क था कि “आवेदक द्वारा कार्यों को विनिर्दिष्ट नहीं किया गया है, जिससे अनुमानित एवं वृहद सूचना अपेक्षित है” और इसमें राज्य सूचना आयोग के एक पुराने अपील प्रकरण (A/1608/2012) का हवाला चिपका दिया गया।
सवाल उठता है,
* क्या वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 लिखकर दी गई जानकारी “अस्पष्ट” होती है?
* क्या ई-रिक्शा की RTO सूची, स्टॉक रजिस्टर और टेंडर कॉपी मांगना “असीमित जानकारी” है?
* क्या जनसूचना अधिकारी को अपने निगम में यह भी नहीं पता कि कितने ई-रिक्शा खरीदे गए हैं? या फिर घोटाले की परतें खुलने का डर है?
कानून को ठेंगा: सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों की सरेआम अवहेलना
अधिकारियों का यह रवैया न केवल प्रशासनिक नाकामी को दर्शाता है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के फैसलों की सीधी अवहेलना है:
* सुप्रीम कोर्ट CBSE बनाम आदित्य बंदोपाध्याय केस: स्पष्ट आदेश है कि जनता के पैसों से बनी हर सरकारी फाइल और रिकॉर्ड पर नागरिकों का अधिकार है। जानकारी केवल धारा 8 और 9 के तहत ही रोकी जा सकती है, मनगढ़ंत बहानों से नहीं।
* केन्द्रीय सूचना आयोग : जनता के धन से खरीदे गए वाहनों, स्टॉक रजिस्टर, टेंडर और MB बुक की जानकारी मांगने पर उसे गोपनीय या वृहद बताकर रोकना अवैध है।
प्रथम अपील में पहुंचे आवेदक, अब प्रथम अपीलीय अधिकारी पर टिकीं निगाहें
अधिकारियों की इस मनमानी और टालमटोल के खिलाफ आवेदक जितेन्द्र कुमार साहू ने 06 अक्टूबर 2026 को प्रथम अपीलीय अधिकारी/आयुक्त, नगर पालिक निगम कोरबा के समक्ष प्रथम अपील (प्रकरण क्र. 61) दायर कर दी है।
अपील में प्रमुख मांगें
* नागरिकों के RTI अधिकार का हनन करने वाले अधीक्षण अभियंता और जन सूचना अधिकारी पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
* समय सीमा में भ्रामक जानकारी देने के कारण RTI अधिनियम की धारा 7(6) के तहत समस्त दस्तावेज (टेंडर, RTO लिस्ट, MB बुक, भुगतान विवरण) पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएं।
* निर्धारित समय में जानकारी न मिलने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ धारा 20 के तहत ₹25,000 जुर्माना लगाने हेतु राज्य सूचना आयोग को मामला भेजा जाए।
जनहित का बड़ा सवाल, आयुक्त महोदय, क्या आप पारदर्शी न्याय करेंगे या पर्दा डालेंगे?

अब गेंद प्रथम अपीलीय अधिकारी के पाले में है। क्या वे अपने ही अधीनस्थ अधिकारियों के इस हास्यास्पद और गैर-कानूनी जवाब पर पर्दा डालेंगे, या फिर कानून का सम्मान करते हुए दोषी अधिकारियों को फटकार लगाकर निःशुल्क जानकारी देने का सख्त आदेश जारी करेंगे?

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यदि कोरबा निगम ई-रिक्शा खरीदी में पूरी तरह ईमानदार है, तो फिर आरटीओ नंबर और स्टॉक रजिस्टर की प्रतियां देने में पसीने क्यों छूट रहे हैं? दाल में कुछ काला है या पूरी दाल ही काली है? जनता और मीडिया की नज़रें अब अपीलीय अधिकारी के फैसले पर टिकी हुई हैं।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026