
Delhi Lal Quila Blast News: दिल्ली लाल किला ब्लास्ट मामले में एनआईए ने फिर नए खुलासे किए हैं.जांच एजेंसी की चार्जशीट में दर्ज एक आरोपी के बारे में पता चला है कि उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल किया था. आरोपी वैश्विक आतंकवादी संगठन अल-कायदा की एक शाखा से भी जुड़ा है. सूत्रों ने कहा कि आरोपियों ने रॉकेट आईईडी (Improvised Explosive Devices) भी बनाए थे और जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीकुंड जंगल में इनकी टेस्टिंग भी की थी. ये चौंकाने वाले खुलासे एनआईए ने 14 मई को दायर की गई 7,500 पन्नों की एक विशाल चार्जशीट (आरोप पत्र) में किया है.
अल कायदा का आतंकी, लाल किला ब्लास्ट के आरोपियों से मिला
विशेष एनआईए अदालत के सामने पेश की गई इस चार्जशीट में विस्तार से बताया गया है कि कैसे आरोपियों ने आईईडी बनाने और उनके इस्तेमाल में एक बेहद बारीक और लगभग प्रयोगशाला के स्तर (laboratory-grade) का तरीका अपनाया था. आरोप पत्र के अनुसार, चार्जशीट किए गए आरोपियों में से एक ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (AGuH) के अंतरिम आतंकी मॉड्यूल के “इन-हाउस इंजीनियर” के रूप में सामने आया, जो भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (AQIS) से जुड़ा हुआ है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से AQIS और उसकी सभी शाखाओं को आतंकवादी संगठन घोषित किया जा चुका है. चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपी जासिर बिलाल वानी इस साजिश में तकनीकी सहायता देने के लिए साल 2024-25 के दौरान दो से तीन बार हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस में रुका था.
जांच में यह खुलासा होने के बाद कि यूनिवर्सिटी में काम करने वाले तीन डॉक्टर कथित तौर पर इस ब्लास्ट में शामिल थे, यूनिवर्सिटी की भूमिका कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गई.जासिर की मुलाकात विस्फोटक से भरी कार के ड्राइवर और एक अन्य मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी से डॉ. अदील अहमद राथर ने कराई थी. चार्जशीट के मुताबिक, इस धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल हो गए थे.
AI से पूछकर आईईडी बनाने का तरीका सीखा
एनआईए (NIA) की जांच के मुताबिक, अदील ने जासिर को आईईडी (IED) बनाने की सामग्री, जैसे कि पिसी हुई चीनी और एनपीके (NPK) खाद के रूप में पोटेशियम नाइट्रेट पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी, जबकि डॉ. उमर ने घरेलू रॉकेट आईईडी पर रिसर्च की और दिशानिर्देश दिए थे. चार्जशीट में यह रिकॉर्ड पर लाया गया है कि जासिर ने यूट्यूब और चैटजीपीटी (ChatGPT) का सहारा लिया था और सर्च किया था कि रॉकेट कैसे बनाया जाए और उसमें मिश्रण का अनुपात क्या होना चाहिए. यह आतंकी गतिविधियों के लिए डिजिटल और एआई (AI) प्लेटफॉर्म के कथित गलत इस्तेमाल को उजागर करता है.
चार्जशीट में जिक्र है कि जासिर ने कथित तौर पर रॉकेट आईईडी तैयार किए और डॉ. उमर, डॉ. मुजम्मिल शकील और अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर काजीगुंड के जंगल में उनका परीक्षण किया था. जासिर की ओर से किए गए खुलासों के आधार पर, एनआईए की टीमों ने गहन जमीनी जांच के दौरान जंगल के काफी अंदर से इन उपकरणों के अवशेष बरामद किए थे.
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ड्रोन को विस्फोटक में बदलकर देश दहलाने का था प्लान
इन परीक्षणों के अवशेष बाद में एनआईए की टीमों ने डॉ. अदील के इशारे (निशानदेही) पर उन जगहों से जब्त किए थे. सूत्रों ने बताया कि जांच के हिस्से के रूप में एनआईए की ओर से किए गए एक नियंत्रित सिमुलेशन (कृत्रिम अभ्यास) के दौरान, जासिर ने बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (बम निरोधक दस्ते) की एक विशेषज्ञ टीम के सामने बाजार में आसानी से मिलने वाली सामग्रियों का उपयोग करके काम करने वाले रॉकेट आईईडी बनाने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन भी किया.
सूत्रों ने बताया कि सबसे चौंकाने वाली फोरेंसिक जांच कार में रखे आईईडी (IED) के ट्रिगर मैकेनिज्म (धमाका करने वाली प्रणाली) से जुड़ी है, जिसका इस्तेमाल डॉ. उमर ने किया था. एनआईए (NIA) की चार्जशीट के अनुसार, दिसंबर 2023 और जनवरी 2024 के बीच जासिर ने कथित तौर पर अपने फ्लिपकार्ट (Flipkart) अकाउंट से ट्रिगर मैकेनिज्म में इस्तेमाल होने वाले कई कलपुर्जों का ऑर्डर दिया था. इसमें एक सेंसर-इंडक्टिव प्रॉक्सिमिटी स्विच, एक हीट गन, एक पीजो प्लेट, एक रिमोट कंट्रोल रिले-स्विच आरएफ (रेडियो फ्रीक्वेंसी) ट्रांसमीटर और रिसीवर किट, एक फ्लेमलेस रीचार्जेबल पॉकेट लाइटर, एक सोल्डरिंग किट और एक एलईडी इलेक्ट्रॉनिक किट शामिल थे.
चार्जशीट में कहा गया है कि इस खरीदारी के लिए पैसे डॉ. उमर ने दिए थे और जासिर को ये सामान कैश-ऑन-डिलीवरी (COD) ऑर्डर्स के ज़रिए मिले थे. बाद में जासिर ने इन कलपुर्जों को जोड़ा (असेम्बल किया) और आईईडी बनाने में इस्तेमाल के लिए डॉ. उमर को सौंप दिया. चार्जशीट के मुताबिक, आखिरकार डॉ. उमर ने इसी ट्रिगर मैकेनिज्म का इस्तेमाल करके गाड़ी में रखे आईईडी (VB-IED) का धमाका किया, जिससे लाल किला इलाके के पास ब्लास्ट हुआ. एनआईए ने पाया कि आरोपियों ने अलग-अलग तरह के आईईडी भी बनाए थे और उनका परीक्षण किया था. ब्लास्ट में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक ‘ट्रायसिटोन ट्रायपरऑक्साइड’ (TATP) था, जिसे जरूरी सामग्री जुटाने और विस्फोटक मिश्रण को पूरी तरह तैयार करने के लिए प्रयोग करने के बाद गुप्त रूप से बनाया गया था.






