*भारत मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के विरोध में किया प्रदर्शन*

जिला रिपोर्टर शक्ति उदय मधुकर
*राज्यपाल के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर विधेयक को सहमति न देने तथा विधानसभा को वापस भेजकर व्यापक समीक्षा कराने का किया मांग..*
सक्ती भारत मुक्ति मोर्चा के अगुवाई में शुक्रवार 10अप्रैल को सक्ती नगर में उसके कार्यकर्ताओं ने हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को काला कानून बताते हुए इसके खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके पहले भारत मुक्ति मोर्चा सहित राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद, राष्ट्रीय गुरू घासीदास सतनाम क्रांति मोर्चा के पदाधिकारियों व कार्यकर्ता सक्ती के नंदेली भांठा मैदान में बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए। जहां रैली के पूर्व संगठन के पदाधिकारियों ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रदेश अध्यक्ष भारत मुक्ति मोर्चा महिला विंग श्रीमती सावित्री कुर्रे ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को काला कानून बताया। श्रीमती सावित्री कुर्रे ने आगे कहा कि यह कानून छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग सहित अल्पसंख्यकों के बीच के स्थापित एकता के विरोध में लाया गया है। यह हमारे हित में नहीं है। हम अपने संख्या बल तथा विरोध प्रदर्शन के आधार पर सरकार को यह बिल वापस लेने मजबूर करेंगे।
भारत मुक्ति मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी भारत घोघरे ने इस मौके पर छत्तीसगढ़ सरकार पर संविधान विरूद्ध जाकर कानून बनाने की बात कही और कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 हमें स्वीकार्य नहीं है। इसके विरोध में हम सब यहां शांति पूर्ण प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए हैं। भारत मुक्ति मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने आगे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13(2) का हवाला देते हुए कहा कि राज्य ऐसी कोई विधि या कानून नहीं बनाएगा जो मूल अधिकारों से असंगत हो। उन्होंने इस काले कानून को सरकार को वापस लेने रोड व कोर्ट की लड़ाई लड़ने की भी बात कही। इसके पश्चात सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता कतारबद्ध होकर नंदेली भांठा से पदयात्रा कर नगर भ्रमण करते हुए कचहरी पहुंचे उन्होंने राज्यपाल के नाम प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा। अपने ज्ञापन में भारत मुक्ति मोर्चा के पदाधिकारियों ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026को सहमति न देने, पुनर्विचार करने हेतु विधानसभा को वापस भेजने तथा व्यापक समीक्षा कराने की बात कही है।





