छत्तीसगढ़ के पंडुम कैफे की गूंज संसद तक, राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं—अब सिर्फ इतने जिलों में सिमटा माओवादी आतंक
संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति मुर्मू का बड़ा दावा — कभी 126 जिलों में फैला माओवादी आतंक अब सिमटकर सिर्फ 8 जिलों तक, देशभर में सुरक्षा हालात में आया ऐतिहासिक सुधार

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संसद बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति मुर्मू के अभिभाषण से
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माओवादी हिंसा 126 जिलों से घटकर सिर्फ 8 जिलों तक सिमटी
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इनमें भी केवल 3 जिले अब अति प्रभावित
रायपुर : संसद का बजट सत्र आज से शुरू हो गया, जिसकी शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई. राष्ट्रपति ने लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए सरकार के कामकाज, नीतियों और आगामी एजेंडे को सामने रखा. नक्सलवाद पर राष्ट्रपति राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि देश में माओवादी हिंसा का दायरा बेहद कम हो गया है. उन्होंने बताया कि पहले 126 जिलों में भय और अविश्वास का वातावरण था, लेकिन अब नक्सलवाद केवल 8 जिलों तक सीमित रह गया है, जिनमें से सिर्फ 3 जिले अति प्रभावित हैं.
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पंडुम कैफे का हुआ जिक्र
राष्ट्रपति ने कहा कि माओवादी विचारधारा ने दशकों तक कई पीढ़ियों का भविष्य अंधकार में धकेला. पिछले एक वर्ष में लगभग 2,000 माओवादी समर्थकों ने आत्मसमर्पण किया है, जिससे लाखों नागरिकों के जीवन में शांति आई है. प्रभावित इलाकों में तेज़ी से बदलाव दिख रहा है, बस्तर ओलंपिक में युवाओं की भागीदारी इसका उदाहरण है. उन्होंने कहा कि हथियार छोड़ चुके नक्सली पांडुम कैफ़े में सेवा कर रहे हैं.
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उन्होंने कहा कि मेरी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है जो लोग हथियार छोड़कर मुख्य धारा में जुड़े हैं उनका जीवन पटरी पर लौते वो दिन दूर नहीं जब आतंकवाद पूरी तरीके से समाप्त हो जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि “वो दिन दूर नहीं जब माओवादी आतंक पूरी तरह समाप्त हो जाएगा.” इसमें सरकार की निर्णायक नीति और सुरक्षा बलों की भूमिका अहम है.





