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Chhattisgarhछत्तीसगढ

Chhattisgarh Liquor Scam: 2019–23 के संगठित भ्रष्टाचार का खुलासा, ED ने दायर की सप्लीमेंट्री अभियोजन शिकायत

Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 26 दिसंबर को एक और सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कम्प्लेन (अभियोजन शिकायत) दायर कर मामले को और गंभीर बना दिया है। ईडी की इस ताजा कार्रवाई में वर्ष 2019 से 2023 के बीच राज्य के आबकारी विभाग में हुए एक संगठित और सुनियोजित भ्रष्टाचार का विस्तृत खुलासा किया गया है। जांच में सामने आया है कि एक आपराधिक सिंडिकेट ने राज्य की शराब नीति को अपने निजी लाभ के लिए प्रभावित किया और अवैध कमीशन, बिना हिसाब की शराब बिक्री तथा लाइसेंस प्रक्रिया में हेरफेर के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपए की अवैध कमाई की।

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ईडी की सप्लीमेंट्री अभियोजन शिकायत के अनुसार, इस सिंडिकेट ने अवैध धन अर्जित करने के लिए चार प्रमुख तरीकों को अपनाया। पहला तरीका था अवैध कमीशन की वसूली। इसमें शराब आपूर्तिकर्ताओं से आधिकारिक बिक्री पर रिश्वत ली गई, जिसे राज्य द्वारा भुगतान की जाने वाली “लैंडिंग कीमत” को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर संभव बनाया गया। इसका सीधा असर राज्य के खजाने पर पड़ा, क्योंकि रिश्वत की राशि अप्रत्यक्ष रूप से सरकारी धन से ही वित्तपोषित की गई। दूसरा तरीका था बिना हिसाब की शराब की बिक्री। जांच में खुलासा हुआ कि सरकारी शराब दुकानों के जरिए एक समानांतर सिस्टम संचालित किया गया, जिसमें डुप्लीकेट होलोग्राम और नकद में खरीदी गई शराब की बोतलों का उपयोग कर “बिना हिसाब” देसी शराब बेची गई। इस प्रक्रिया में एक्साइज ड्यूटी और अन्य करों से बचा गया, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ।

तीसरा तरीका कार्टेल कमीशन से जुड़ा था। ईडी के अनुसार, राज्य में अपनी बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने और ऑपरेशनल लाइसेंस हासिल करने के लिए डिस्टिलर्स द्वारा सालाना रिश्वत दी जाती थी। यह एक प्रकार का संगठित कार्टेल सिस्टम था, जिसमें प्रतिस्पर्धा को खत्म कर सिंडिकेट के हितों को प्राथमिकता दी गई। चौथा और महत्वपूर्ण तरीका FL-10A लाइसेंस के जरिए किया गया घोटाला था। विदेशी शराब निर्माताओं से कमीशन वसूलने के उद्देश्य से एक नई लाइसेंस श्रेणी शुरू की गई, जिसमें मुनाफे का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा सीधे सिंडिकेट को दिया जाता था। इस व्यवस्था ने विदेशी शराब कारोबार को भी भ्रष्टाचार के दायरे में ला दिया।

ईडी की शिकायत में यह भी सामने आया है कि तत्कालीन प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र के उच्च स्तर पर अवैध वित्तीय लाभ के लिए गहरी साजिश रची गई थी। ताजा अभियोजन शिकायत में 59 नए आरोपियों को शामिल किया गया है, जिससे अब तक इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या 81 हो गई है। प्रशासनिक अधिकारियों में रिटायर्ड आईएएस और तत्कालीन संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा तथा तत्कालीन आबकारी आयुक्त आईएएस निरंजन दास की भूमिका प्रमुख बताई गई है। ईडी के अनुसार, इन अधिकारियों ने नीति में हेरफेर कर सिंडिकेट के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित किया। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण पति त्रिपाठी (आईटीएस) को अवैध वसूली को अधिकतम करने और पार्ट-बी ऑपरेशनों के समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इसके अलावा, जनार्दन कौरव और इकबाल अहमद खान सहित करीब 30 फील्ड-लेवल आबकारी अधिकारियों पर “प्रति केस तय कमीशन” के बदले बिना हिसाब की शराब बिक्री को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए हैं। राजनीतिक स्तर पर भी मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। ईडी ने तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा और चैतन्य बघेल (तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र) पर नीतिगत सहमति देने और इस अवैध कारोबार से लाभ उठाने के आरोप लगाए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया को अवैध नकदी के प्रबंधन और आज्ञाकारी अधिकारियों की नियुक्ति में एक प्रमुख समन्वयक के रूप में चिन्हित किया गया है। निजी व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका भी जांच में उजागर हुई है। इस सिंडिकेट का नेतृत्व अनवर ढेबर और उनके सहयोगी अरविंद सिंह ने किया।

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निजी शराब निर्माता कंपनियां जैसे M/s छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड, M/s भाटिया वाइन मर्चेंट्स और M/s वेलकम डिस्टिलरीज ने जानबूझकर अवैध पार्ट-बी निर्माण में हिस्सा लिया और पार्ट-ए एवं पार्ट-बी कमीशन का भुगतान किया। इसके अलावा सिद्धार्थ सिंघानिया (नकदी संग्रह) और विधु गुप्ता (डुप्लीकेट होलोग्राम आपूर्ति) को भी इस घोटाले में प्रमुख भूमिका निभाने वाला बताया गया है। ईडी ने अब तक पीएमएलए 2002 की धारा 19 के तहत नौ प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी, कवासी लखमा, चैतन्य बघेल, सौम्या चौरसिया और निरंजन दास शामिल हैं। कुछ आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं, जबकि अन्य न्यायिक हिरासत में हैं। मामले में ईडी द्वारा कई अस्थायी कुर्की आदेश भी जारी किए गए हैं। अब तक कुल 382.32 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं, जिनमें नौकरशाहों, राजनेताओं और निजी संस्थाओं से जुड़ी 1,041 संपत्तियां शामिल हैं। इनमें रायपुर स्थित होटल वेनिंगटन कोर्ट और ढेबर एवं बघेल परिवार से संबंधित सैकड़ों संपत्तियां भी शामिल हैं।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026