6
previous arrow
next arrow
25
previous arrow
next arrow
25
previous arrow
next arrow
8
previous arrow
next arrow
ChatGPT Image May 16, 2026, 07_16_26 PM
Health and fitness

Rare Diseases In India: भारत की ये Rare Diseases, जिनके बारे में 90% लोग हैं अनजान, जानिए इनके खतरनाक सच

Rare Diseases In India: ​जब भी बीमारियों का जिक्र होता है हमारे दिमाग में सबसे पहले डेंगू, मलेरिया, शुगर, दिल की बीमारी, टीबी और सर्दी-जुकाम जैसी आम समस्याएं ही आती हैं. लेकिन भारत में कुछ ऐसी बीमारियां भी मौजूद हैं, जिनके बारे में ज्यादातर लोग तब तक बिल्कुल नहीं जानते, जब तक कि उनका कोई अपना इनकी चपेट में न आ जाए. ​इनमें से कुछ बीमारियां मच्छरों, कीड़े-मकोड़ों या मक्खियों के काटने से फैलती हैं, तो कुछ गंदे पानी, जानवरों या किसी जानवर के काट लेने से होती हैं. इन बीमारियों की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इनकी शुरुआत आम बुखार, फ्लू या मामूली संक्रमण जैसी लगती है. इस वजह से सही समय पर पहचान और इलाज में देरी हो जाती है. आइए जानते हैं ऐसी ही 9 खतरनाक बीमारियों के बारे में, जिन पर ध्यान देना बहुत जरूरी है.

*बंदोरा के युवा सरपंच नवधा राम वर्मा हुए सम्मानित ….*

क्या आपने सुनी हैं भारत की इन बीमारियों के बारे में? 

​1. मेलिओडोसिस- (Melioidosis)

​यह बैक्टीरिया से होने वाला एक संक्रमण है, जो गंदी मिट्टी और पानी में पाए जाने वाले बर्कहोलडेरिया सिउडोमल्ली नाम के बैक्टीरिया से फैलता है. इसे ‘द ग्रेट मिमिकर भी कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण कई दूसरी बीमारियों जैसे ही लगते हैं. गंदे पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से, खासकर स्किन पर कट-छट होने पर या सांस और खाने के जरिए यह शरीर में पहुंच सकता है.

लक्षण- इसमें बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, सीने और जोड़ों में दर्द जैसी दिक्कतें होती हैं.

​2. स्क्रब टाइफस- (Scrub Typhus)

​यह बीमारी ओरिएंटिया सुत्सुगामुशी बैक्टीरिया की वजह से होती है और संक्रमित माइट्स के काटने से फैलती है. बारिश के मौसम में और उसके बाद इसका खतरा काफी बढ़ जाता है.

लक्षण- इसमें तेज बुखार, सिरदर्द और शरीर में भयंकर दर्द होता है. कई बार काटने की जगह पर एक काला सा निशान बन जाता है, जिसे एस्चर कहते हैं. समय पर इलाज न हो तो यह फेफड़े, दिमाग और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है.

​3. निपाह वायरस- (Nipah Virus)

​निपाह एक खतरनाक जूनोटिक इन्फेक्शन है, चमगादड़ इस वायरस के नेचुरल होस्ट होते हैं. संक्रमित जानवरों या दूषित खाने के जरिए यह इंसानों में फैलता है. इतना ही नहीं, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से यह एक से दूसरे इंसान में भी फैल सकता है.

लक्षण- इसमें तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी और सांस लेने में दिक्कत होती है. गंभीर स्थिति में यह दिमाग की सूजन (Encephalitis) और कोमा का रूप ले लेता है.

4. लेप्टोस्पोरोसिस- (Leptospirosis)

​यह चूहों और अन्य जानवरों से जुड़ी एक बैक्टीरियल बीमारी है. जब कोई व्यक्ति गंदे पानी या मिट्टी के संपर्क में आता है, तो बैक्टीरिया शरीर की कटी-फटी स्किन, आंखों, नाक या मुंह के जरिए अंदर घुस जाते हैं. भारी बारिश और बाढ़ के बाद यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है.

लक्षण- अचानक तेज बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और लाल आंखें इसके मुख्य लक्षण हैं. अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह पीलिया और किडनी फेलियर जैसी बड़ी मुसीबत बन सकता है.

​5. क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज- (Kasanur Forest Disease – KFD)

​इसे मंकी फीवर भी कहा जाता है. साल 1957 में कर्नाटक में पहली बार इस वायरल बीमारी की पहचान हुई थी. यह मुख्य रूप से संक्रमित टिक के काटने से फैलती है, और जंगली बंदर इसके प्राकृतिक चक्र का हिस्सा हैं. जंगलों में जाने वाले लोग इसके शिकार आसानी से हो सकते हैं.

लक्षण– इसमें तेज बुखार, सिरदर्द और कमजोरी के साथ कई बार ब्लीडिंग जैसी गंभीर समस्याएं भी हो जाती हैं. कर्नाटक के अलावा यह गोवा और आसपास के इलाकों में भी रिपोर्ट की गई है.

​6. काला-अजार- (Kala-Azar)

​विसरल लीशमनियासिस को आम बोलचाल में काला-अजार कहा जाता है. यह एक परजीवी की वजह से होता है जो संक्रमित मादा सैंडफ्लाई के काटने से फैलता है.

लक्षण- सामान्य बुखार के उलट, काला-अजार में लंबे समय तक बुखार रहता है, वजन तेजी से गिरता है और तिल्ली (Spleen) तथा लीवर सूज जाते हैं. अगर इलाज न हो, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है.

​7. रेबीज- (Rabies)

​रेबीज कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन इसके बढ़ते मामलों और गंभीरता के कारण यह आज भी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है. यह बीमारी आमतौर पर पागल कुत्ते, बिल्ली, बंदर या अन्य संक्रमित जानवरों के काटने या उनकी लार से फैलती है. एक बार इसके लक्षण दिखने शुरू हो जाएं, तो यह लगभग 100% घातक होती है. हालांकि, जानवर के काटने के तुरंत बाद अगर सही एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवा लिए जाएं, तो जान बचाई जा सकती है.

उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने प्रयासों से कोरबा नगर के विकास को मिल रही नई गति, डीएमएफ से 30 वार्डो में 31 कार्यों के लिए 5.44 करोड़ स्वीकृत

​8. नेग्लैरिया फाउलेरी- (Naegleria fowleri)

​इसे ब्रेन-ईटिंग अमीबा या दिमाग खाने वाला अमीबा भी कहा जाता है. यह एक बहुत ही सूक्ष्म जीव है जो गर्म मीठे पानी में पाया जाता है. जब दूषित पानी नाक के रास्ते शरीर में जाता है, तो यह जीव सीधे दिमाग तक पहुंच जाता है. यह एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता. यह दुर्लभ जरूर है, लेकिन बहुत तेजी से फैलता है और जानलेवा साबित हो सकता है.

लक्षण- इसके शुरुआती लक्षण आम दिमागी बुखार जैसे होते हैं, जिससे इसकी पहचान करना मुश्किल होता है.

​9. सांप का काटना- (Snakebite Envenoming)

​सांप का काटना किसी आम दुर्घटना जैसा लग सकता है, लेकिन डब्ल्यूएचओ इसे एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी मानता है. भारत में इंडियन कोबरा, कॉमन क्रैयत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसे बिग फोर सांप सबसे ज्यादा खतरनाक हैं. इनका जहर शरीर में फैलकर लकवा, गंभीर ब्लीडिंग और किडनी डैमेज का कारण बन सकता है. अगर सही समय पर एंटीवेनम मिल जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है.

​इन बीमारियों से सतर्क रहना क्यों जरूरी है?

यह कोई बीमारी आम न होने पर भी उतनी ही खतरनाक हो सकती है. इनमें से कई बीमारियां खास मौसम, जंगलों के पास रहने या खेती-किसानी से जुड़ी होती हैं. बाढ़ के पानी से लेप्टोस्पोरोसिस का खतरा बढ़ता है, तो जंगलों में काम करने वाले लोगों को कीड़े और सांपों से सावधान रहना पड़ता है.

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026