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अब आसमान से निगरानी: स्पेस में तैनात भारत का ‘साइलेंट स्पाई’, दुश्मन की सैटेलाइट्स पर पैनी नजर

80 किलो के देसी अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट से ISS की तस्वीरें लेकर Ajista ने दिखाया—निजी क्षेत्र भी अब स्पेस सर्विलांस टेक्नोलॉजी में सक्षम

  • निजी भारतीय कंपनी ने स्पेस निगरानी क्षमता दिखाई

  • 80 किलो सैटेलाइट से ISS की तस्वीरें लीं

  • अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की नई टेक्नोलॉजी ताकत

नई दिल्‍ली: भारत अंतरिक्ष में एक के बाद एक नए कीर्तिमान पिछले कुछ सालों में स्‍थापित कर रहा है. भारत की निजी कंपनियों ने भी अब अंतरिक्ष में एक्‍सपेरिमेंट करने शुरू कर दिये हैं. अहमदाबाद बेस्‍ड प्राइवेट कंपनी ‘अजिस्ता इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड’ ने अंतरिक्ष में स्नूपिंग यानी उपग्रहों की निगरानी करने की देशी क्षमता का सफल परीक्षण कर सबको हैरान कर दिया है. अजिस्ता ने अपने 80 किलोग्राम के अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट का इस्‍तेमाल कर पृथ्वी की लॉअर ऑर्बिट (निचली कक्षा) में घूम रहे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की तस्वीरें खींची हैं.

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अजिस्ता का 80 किलोग्राम के अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट

आप इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अजिस्ता का 80 किलोग्राम के अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट अंतरिक्ष स्‍टेशन के साथ-साथ अन्‍य देशों के उपग्रहों पर भी नजर रख सकता है, उनकी तस्‍वीरें और वीडियो भी भेज सकता है. बता दें कि ऐसा कारनामा कोई दूसरी भारतीय निजी कंपनी नहीं कर पाई है. ये भारत की ‘स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस’ को मजबूत करने की दिशा में एक ऐसा कदम है, जिसे देख दूसरे लोग भी इंस्‍पायर्ड होंगे.

अंतरिक्ष स्‍पेस स्‍टेशन को किया ट्रैक

अजिस्ता ने एक ट्रायल में 3 फरवरी को दो अलग-अलग मौकों पर ISS को ट्रैक किया गया. पहली बार लगभग 300 किलोमीटर और दूसरी बार 245 किलोमीटर की दूरी से स्‍पेस स्‍टेशन की तस्वीरें ली गईं. इस दौरान अजिस्ता के सैटेलाइट के सेंसर ने तेज गति से चल रहे अंतरिक्ष स्टेशन को ट्रैक किया और 2.2 मीटर इमेजिंग सैंपल के साथ कुल 15 फ्रेम कैपचर किए. कंपनी ने पुष्टि की है कि उसके ट्रैकिंग एल्गोरिदम और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजिंग सिस्टम ने बेहतरीन काम किया.

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बैलिस्टिक मिसाइलों की निगरानी होगी!

सफल प्रयोग के बाद अजिस्ता के प्रबंध निदेशक श्रीनिवास रेड्डी ने बताया, ‘इस ‘नॉन-अर्थ इमेजिंग’ तकनीक के जरिए अब अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं की सटीक ट्रैकिंग और उनकी पहचान करना संभव होगा. ये प्रौद्योगिकियां हमारे एनईआई और एसएसए पेलोड की रीढ़ हैं, जो कक्षा में वस्तुओं की सटीक ट्रैकिंग और विशेषता निर्धारण को सक्षम बनाती हैं. यह तकनीक भविष्य में बैलिस्टिक मिसाइलों की निगरानी में भी सहायक हो सकती है. वर्तमान में भारत के पास 50,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 50 से ज्यादा एक्टिव सेटेलाइट हैं.

वैसे बता दें कि इसरो ने पहले भी ऐसी क्षमताएं प्रदर्शित की हैं, जिनमें हाल ही में हुए SPADEX इन-ऑर्बिट प्रयोग शामिल हैं, जिसमें सटीक ट्रैकिंग और पैंतरेबाज़ी का प्रदर्शन किया गया था, लेकिन अज़िस्ता निजी क्षेत्र की कंपनी है, इसलिए यह सराहनीय है.

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026