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LAC के करीब भारत की नई ताकत: 13,700 फीट पर न्योमा एयरबेस से उड़ान भरेंगे फाइटर जेट्स

पूर्वी लद्दाख के रणनीतिक महत्व वाले न्योमा एयरबेस को भारतीय वायुसेना ने पूरी तरह चालू कर दिया है। 13700 फुट की ऊंचाई पर स्थित यह दुनिया का सबसे ऊंचा फाइटर एयरबेस अब फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर्स और ट्रांसपोर्ट विमानों के संचालन के लिए पूरी तरह सक्षम हो गया है। चीन सीमा से महज 30 किलोमीटर दूर स्थित इस एयरबेस के चालू होने से भारत की सीमा सुरक्षा में एक नया मजबूत किला तैयार हो गया है, जो लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर त्वरित प्रतिक्रिया और निगरानी को सक्षम बनाएगा। यह वही एयरबेस है जो पहले केवल एक कच्चे रनवे वाला लैंडिंग ग्राउंड था। पिछले वर्ष सीमा सड़क संगठन (BRO) ने यहां पक्का रनवे तैयार किया था और इस साल अक्टूबर तक सभी आवश्यक सहायक ढांचागत कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा गया था। अब वायुसेना इस बेस से विमान उड़ाने, लैंड कराने और सीमित रखरखाव कार्य करने में सक्षम है। सूत्रों के अनुसार न्योमा अब विमानों के संचालन और उनके ‘सस्टेन्ड’ रहने की क्षमता रखता है। सैन्य शब्दावली में ‘सस्टेन्ड’ का अर्थ है- ऐसे बेस की क्षमता, जहां विमान की मरम्मत, ईंधन भराई, रडार संचालन, मौसम की निगरानी और चालक दल के रहने की व्यवस्था मौजूद हो।

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सिंधु नदी के किनारे, 13700 फीट की ऊंचाई पर स्थित बेस

न्योमा एयरबेस लद्दाख की सिंधु नदी के किनारे समुद्र तल से 13700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यह लेह से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है। सर्दियों में यहां का तापमान माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, ऐसे में रखरखाव सुविधाओं को अत्यधिक ठंडे वातावरण में काम करने के अनुरूप तैयार किया गया है। यब बेस लंबे समय से भारतीय वायुसेना की रणनीतिक योजनाओं का हिस्सा रहा है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद निष्क्रिय पड़े इस एयरस्ट्रिप को 2009 में फिर से सक्रिय किया गया था। तब से यहां सी-130जे सुपर हर्क्यूलिस, एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टर्स जैसे एमआई-17, सीएच-47एफ चिनूक तथा एएच-64ई अपाचे का सफल संचालन हो चुका है, खासकर 2020 के गलवान संघर्ष के दौरान।

2020 के तनाव के बाद सरकार ने 2021 में इसकी अपग्रेडेशन के लिए 220 करोड़ रुपये की मंजूरी दी। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के प्रोजेक्ट हिमांक ने कठिन हिमालयी परिस्थितियों में यह काम पूरा किया। माइनस 20-40 डिग्री सेल्सियस की ठंड, कड़ाके की हवा और सीमित कामकाजी मौसम के बावजूद, 2.7 किलोमीटर लंबी कंक्रीट रनवे का निर्माण अक्टूबर 2024 तक 95 प्रतिशत पूरा हो गया था। नवंबर 2025 तक सभी सहायक सुविधाएं जैसे हैंगर, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) भवन, क्रैश बे, वॉच टावर्स और आवासीय व्यवस्था पूरी हो गईं। जुलाई 2025 में यह अनुमान लगाया गया था कि एयरबेस अक्टूबर तक चालू हो जाएगा, लेकिन वायुसेना ने इसे समय से पहले पूरी क्षमता के साथ सक्रिय कर दिया।

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वायुसेना का चौथा सक्रिय बेस

यह लद्दाख में भारतीय वायुसेना का चौथा सक्रिय बेस बन गया है। फिलहाल लेह में एक प्रमुख एयरबेस पहले से संचालित है, जबकि कारगिल और थॉइस (जो सियाचिन बेस के रूप में जाना जाता है) में पूर्ण विकसित एयरस्ट्रिप्स मौजूद हैं। इसके अलावा, दौलत बेग ओल्डी (DBO) में एक कच्चा रनवे है, जहां विशेष अभियानों के लिए वायुसेना के विमान उतरते हैं।

न्योमा अब एक पूर्ण फॉरवर्ड स्टेजिंग ग्राउंड के रूप में कार्य करेगा। यहां से राफेल और सुखोई-30एमकेआई जैसे फाइटर जेट्स रोटेशनल आधार पर तैनात किए जाएंगे। ऊंचाई के कारण जेट इंजनों को कम तापमान में स्टार्ट करने के लिए संशोधित किया गया है। यह एयरबेस लद्दाख के सब-सेक्टर नॉर्थ में सैनिकों की तैनाती, निगरानी और आपूर्ति के लिए क्रांतिकारी साबित होगा।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026