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गेवरा को 70 मिलियन टन की पर्यावरणीय स्वीकृति,भूविस्थापितो ने किया आंदोलन, समर्थन में पहुंचे विधायक..

गेवरा से "आईं आईं एन" संवाददाता - शेत मसीह की खबर...

Pawanकोरबा – भले ही गेवरा क्षेत्र ओपन कास्ट कोल माइंस को 70 मिलियन टन की पर्यावरणीय स्वीकृति मिल गई हो परंतु भूविस्थापितों की समस्याओं के निवारण के मामले में एस ई सी एल गेवरा क्षेत्र लगातार फिसड्डी साबित हो रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के अधिग्रहित गांव के ग्रामीणों ने सोमवार के बाद मंगलवार को भी चक्काजाम कर दिया सोमवार को हुए चक्काजाम को मंगलवार को बैठक आयोजित करने का आश्वासन देकर स्थगित कर दिया गया लेकिन एसईसीएल के अधिकारी वार्ता के वादे से मुकर गए जिससे ग्रामीणों का आक्रोश भड़क उठा और उन्होंने 24 घंटे के भीतर दूसरी बार अमगांव में चक्काजाम कर कोल परिवहन बंद कर दिया उनके आंदोलन को कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने भी समर्थन दिया और जमीन पर बैठकर आवाज बुलंद की देर रात तक चक्काजाम जारी था देर रात को चर्चा के बाद गुरुवार को गांव में ही त्रिपक्षीय वार्ता कर समस्याओं का समाधान करने के आश्वसन के बाद जाम खत्म किया तथा खदानबंदी आंदोलन को भी स्थगित कर दिया गया है।

एसईसीएल गेवरा क्षेत्र से अधिग्रहित अमगांव के ग्रामीणों ने हरदीबाजार दीपका बाईपास और हरदीबाजार से कोरबा जाने वाले मुख्य मार्ग अमगांव पंचायत कार्यालय के पास सराईसिंगार चौक पर अपनी मांगों को लेकर सोमवार को 6 घंटे चक्काजाम कर प्रदर्शन किया था सड़क पर पंडाल लगाकर अपने बसाहट में मूलभूत सर्वसुविधा शेष बचे अमगांव के मुआवजा, रोजगार दर्राखांचा के नापी किए हुए मूल्यांकन की पावती व मुआवजा को सार्वजनिक करने सहित बेरोजगारों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में रोजगार की मांग की है।

ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के नेतृत्व में आंदोलन किया जा रहा है संगठन के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने बताया कि 6 घंटे चक्काजाम के बाद एसईसीएल के अधिकारी सुरेश चौधरी हरदीबाजार नायब तहसीलदार रामेश्वर सोनी थाना प्रभारी मृत्युंजय पांडे ने ग्रामीणों को समझाइए देते हुए पाली एसडीएम और मुख्य महाप्रबंधक के साथ मंगलवार को बैठक आयोजित कर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया जिस पर चक्काजाम आंदोलन को स्थगित कर दिया गया था मंगलवार को ग्रामीण बैठक में शामिल होने गेवरा मुख्यालय के सभागार पहुंचे लेकिन यहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि एक बार फिर एसईसीएल प्रबंधन अपने वादे से मुकर गया है यहां किसी प्रकार की बैठक आयोजित नहीं की गई है जिससे आक्रोशित ग्रामीणों ने पुन मंगलवार की सुबह 11 बजे से चक्काजाम आंदोलन शुरू कर दिया उन्होंने बताया कि देर शाम तक भूविस्थापित सड़क पर डटे रहे लेकिन अधिकारी चर्चा के लिए नहीं पहुंचे इस बीच उन्हें शाम में गेवरा ऑफिस में बैठक की बात कही गई जिसे ग्रामीणों ने इंकार कर दिया। इसकी जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय विधायक प्रेमचंद पटेल भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर चक्काजाम आंदोलन का समर्थन किया देर रात तक आंदोलन चलता रहा । तहसीलदार , टी आई और एसईसीएल के अधिकारियों के द्वारा गांव में एसडीएम , जीएम सहित गुरुवार को बैठक आयोजित करने के आश्वसन पर जाम को समाप्त किया गया । 

खदान बंदी स्थगित

आक्रोशित ग्रामीणों ने घोषणा किया था कि अपने चक्काजाम को पूरी रात जारी रखने के बाद सुबह से गेवरा खदान के अमगांव ,रलिया और नराईबोध फेस में पूरी तरह कोयला उत्पादन को बंद कराया जाएगा वार्ता के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया है हालांकि ग्रामीणों ने कहा है कि वार्ता में समस्या का हल नही निकला तो आन्दोलन की राह पर बढ़ेंगे ।

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