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बंगाल में सड़े अंडों की बढ़ी डिमांड, ताजे अंडों से ज्यादा कीमत पर हो रही बिक्री; जानिए क्या है इसकी वजह

क्या आपने कभी सुना है कि कोई जानबूझकर सड़े हुए अंडे खरीदे और वो भी ताजे अंडों से करीब 3 गुना ज्यादा कीमत देकर? जी हां, पश्चिम बंगाल में आजकल कुछ ऐसा ही अनोखा ट्रेंड चल रहा है. कोलकाता से लेकर मिदनापुर और हुगली तक, सड़े अंडों की डिमांड अचानक आसमान छूने लगी है. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? आइए जानते हैं इस दिलचस्प करने वाले मामले की सच्चाई.

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बंगाल में क्यों बढ़ी सड़े अंडों की कीमत?

बंगाल में विरोध प्रदर्शन का तरीका पूरी तरह से बदल जाने के कारण यह सब हो रहा है. अब भ्रष्टाचार के आरोपी नेताओं का विरोध करने और उन्हें अपमानित करने के लिए आम लोग अंडों का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. इसी वजह से वहां ताजा अंडे की कीमत 5 से 6 रुपये है, जबकि सड़े अंडे की कीमत 5 से 20 रुपये तक पहुंच गई है.

पुलिस और जेल से बचने का ‘स्मार्ट जुगाड़’

अब सवाल उठता है कि लोग गुस्से में पत्थर या डंडे की जगह सिर्फ अंडे क्यों फेंक रहे हैं? इसके पीछे एक बहुत बड़ी कानूनी चाल है. अगर कोई किसी नेता पर पत्थर या लाठी चलाता है, तो उस पर दंगा भड़काने या जानलेवा हमले जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज हो सकता है. इसमें लंबी जेल और कानूनी पचड़े तय हैं. कानूनी भाषा में अंडा फेंकने को महज एक मामूली हमला और विरोध माना जाता है. इसमें कोई सख्त धारा नहीं लगती और लोग अपना विरोध दर्ज कराके आसानी से बच निकलते हैं.

कौन-कौन हुआ ‘अंडा अटैक’ का शिकार

बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में कई प्रभावशाली नेता इस ‘अंडा थेरेपी’ का शिकार हो चुके हैं. सबसे ताजा मामला आरामबाग का है, जहां नगरपालिका घोटाले में गिरफ्तार नेता स्वपन नंदी का स्वागत लोगों ने काले रंगे हुए अंडों की बारिश से किया. वहीं, नौकरी के नाम पर करोड़ों ठगने वाले पूर्व पंचायत समिति अध्यक्ष गुणधर खाड़ा पर भी ‘चोर-चोर’ के नारों के साथ अंडे बरसे. इससे पहले पूर्व मेयर सब्यसाची दत्ता और बालू माफिया के आरोपी युधिष्ठिर घोष को अदालत या वार्ड ऑफिस ले जाते समय आक्रोशित भीड़ के अंडों का सामना करना पड़ा. इसके अलावा, आवास योजना में घोटाले के आरोप में ग्राम पंचायत प्रधान शंकरचंद्र राय और पूर्व पार्षद पुष्पा मजूमदार के घरों और दफ्तरों को भी लोगों ने अंडों और कीचड़ से नहला दिया.हद तो तब हो गई जब सांसद अभिषेक बनर्जी को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था. 30 मई को भीड़ ने उन पर इतने अंडे बरसाए कि बचाव के लिए उन्हें क्रिकेट का हेलमेट तक पहनना पड़ा था.

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‘अंडे आरोपी को कम, पुलिस को ज्यादा लगते हैं’

भ्रष्ट नेताओं पर हो रहे इस ‘अंडा अटैक’ में सबसे ज्यादा फजीहत बेचारी पुलिस की हो रही है. एक पुलिसकर्मी ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि भीड़ जब अंडे फेंकती है, तो एक-दो ही आरोपी को लगते हैं, बाकी सीधे पुलिस वालों पर आकर फूटते हैं. अंडे का बदबूदार तरल पदार्थ उनकी वर्दी पर फैल जाता है. ड्यूटी के दौरान कपड़े बदलने का मौका नहीं मिलता, इसलिए उन्हें उसी भयंकर बदबू के साथ घंटों काम करना पड़ता है. अब तो हालात ये हैं कि खुद पुलिस वाले भी यही आस लगाए बैठे हैं कि अंडों के दाम और बढ़ें, ताकि लोगों का ये ‘अंडा अटैक’ किसी तरह बंद हो.

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026