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Vasanthi Cheruveettil: एवरेस्ट बेस कैंप की चढ़ाई पूरी कर वसंती चेरुवीत्तिल ने दुनिया को दिखाया असंभव कुछ नहीं

Vasanthi Cheruveettil: वसंती चेरुवीत्तिल कोई पेशेवर पर्वतारोही नहीं हैं। न उनके पास महंगे कोच थे, न किसी एडवेंचर अकादमी की डिग्री। वह केरल की एक साधारण दर्ज़ी हैं, जिन्होंने सुई-धागे के बीच जिंदगी गुजारी। लेकिन 59 साल की उम्र में उन्होंने जो किया, उसने यह साफ कर दिया कि हौसले अगर जिंदा हों, तो उम्र सिर्फ एक आंकड़ा होती है।

जब वसंती चेरुवीत्तिल ने कहा, कि वह एवरेस्ट पर चढ़ने की तैयारी कर रही हैं तो लोगों उनकी बात को मजाक समझा। हंसी उड़ाई, विश्वास नहीं किया और सवाल उठाए। लेकिन वसंती की कहानी लोगों के मजाक या हंसी पर खत्म नहीं हुई, बल्कि इतिहास में दर्ज हो गई। आइए जानते हैं कौन हैं वसंती, जिन्होंने बिना किसी ट्रेनिंग के एवरेेस्ट फतह कर दिखाया।

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केरल की दर्जी, जिसने सपनों को ऊंचाई दी

वसंती चेरुवीत्तिल केरल के एक साधारण परिवार से आती हैं। रोजमर्रा की ज़िंदगी सिलाई, घर-गृहस्थी और जिम्मेदारियों में बीत रही थी। लेकिन मन के भीतर कहीं एक सपना पल रहा था, एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने का। जब उन्होंने यह सपना लोगों के सामने रखा, तो हंसी उड़ाई गई। कहा गया, “अब उम्र हो गई है”, “ये युवाओं का काम है।” लेकिन वसंती जी ने वही किया जो मजबूत इरादों वाले लोग करते हैं, उन्होंने किसी को जवाब नहीं दिया, बस तैयारी शुरू कर दी।

वसंती चेरुवीत्तिल की कहानी

59 साल की उम्र में वसंती चेरुवीत्तिल ने वह कर दिखाया, जिसे कई युवा भी केवल सपना मानते हैं। उन्होंने एवरेस्ट बेस कैंप (5,364 मीटर) तक की चढ़ाई पूरी की। ट्रेकिंग कैसे करनी है, सांस कैसे कंट्रोल करनी है, पहाड़ों पर शरीर को कैसे तैयार करना है। यह सब उन्होंने यू ट्यूब वीडियो देखकर सीखा। यहां तक कि उत्तर भारत और नेपाल के लोगों से बात करने के लिए उन्होंने हिंदी भाषा भी ऑनलाइन ही सीखी।

चार महीने तक उन्होंने खुद को कठोर अनुशासन में ढाला। हर सुबह 3 घंटे पैदल चलतीं और शाम को 5–6 किलोमीटर की वॉक किया करतीं। जब वह निकलीं, तो उनके साथ न कोई बड़ी टीम थी, न कैमरों का शोर। बस एक पोर्टर और अडिग विश्वास था। बर्फ़ीले रास्ते, तंग ट्रेल्स, ऑक्सीजन की कमी हर कदम सांसें रोकने वाला था। लेकिन वह रुकी नहींं, क्योंकि रुकना उनके स्वभाव में नहीं था।

इस यात्रा का खर्च किसी स्पॉन्सर ने नहीं उठाया। वसंती जी ने अपने सिलाई के पैसों से यह सपना जिया। जाने से पहले उन्होंने अपने गहने बेटों को सौंप दिए। यह डर नहीं था, यह जिम्मेदारी थी।

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23 फरवरी 2024: जब साड़ी में लहराया तिरंगा

23 फरवरी 2024 को, वसंती चेरुवीत्तिल कसावु साड़ी पहनकर, हाथ में तिरंगा लिए एवरेस्ट बेस कैंप पर खड़ी थीं। यह सिर्फ एक चढ़ाई नहीं थी, यह संदेश था कि औरत की उम्र नहीं होती, उसके इरादे होते हैं। उनका अगला लक्ष्य है, ग्रेट वॉल ऑफ चाइना। क्योंकि जो औरत 59 में पहाड़ चढ़ सकती है, वह सपनों की ऊंचाई भी तय कर सकती है।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026