गरीबों के आशियाने पर मिनटों में चलता है बुलडोजर, रसूखदार के बेदखली आदेश पर ‘सुस्ती’ क्यों?
बेदखली आदेश जारी हुए बीत गए महीनों, 3 दिन की मोहलत के बाद भी मौन बैठा प्रशासन; 'बड़े झाड़ के जंगल' में 1.11 एकड़ पर अवैध कब्जा और पर्यावरण विनाश!

कोरबा। गरीबों और आम नागरिकों का जरा सा भी अवैध निर्माण दिखे तो जिला प्रशासन और राजस्व विभाग का बुलडोजर मिनटों में मौके पर पहुँच जाता है। लेकिन जब बात किसी रसूखदार की आए, तो सरकारी आदेश भी फाइलों की धूल चाटने लगते हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला कोरबा जिले के ग्राम रिस्दी से सामने आया है, जहाँ 35.454 हेक्टेयर विशाल ‘बड़े झाड़ के जंगल’ शासकीय वन भूमि खसरा क्र. 482/1/क में से 1.11 एकड़ 0.449 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जे और बाउंड्री वॉल निर्माण का मामला पूरी तरह प्रमाणित होने के बाद भी प्रशासनिक अमला हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
सरकारी जमीनों की खुली नीलामी? निजी भूमि की आड़ में बड़ा खेल!
दस्तावेजों और शिकायतों के अनुसार, अनावेदिका श्रीमती सूरजमणि नीलम ने अपनी मात्र 87 डिसमिल 0.087 हेक्टेयर निजी कृषि भूमि खसरा नं. 478/5 की आड़ में समीप की अति-कीमती शासकीय वन भूमि पर कब्जा कर लिया।
* पर्यावरण के साथ खिलवाड़: प्राकृतिक जल निस्तार के बहाव को रोकते हुए अवैध रूप से भारी मात्रा में राखड़ और मिट्टी की फिलिंग कराई गई, बाउंड्री वॉल और स्टोर रूम तक बना लिया गया।
* वन कानूनों की धज्जियां: भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 80 अ तथा वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का सरेआम उल्लंघन किया गया है।
कागजों में बुलडोजर, धरातल पर सुस्ती!
नायब तहसीलदार कोरबा के न्यायालय प्रकरण क्र. 202601054100001/अ-68/2023-24) द्वारा 09 जुलाई 2026 को बेदखली आदेश क्र. 21/ना.तह./वा.आ./2026 पारित किया गया था।
> आदेश का मुख्य बिंदु:
> अनावेदिका पर ₹1500 अर्थदंड लगाते हुए निर्देश दिया गया था कि 03 दिवस के भीतर स्वयं कब्जा हटाएं। नियत समय में कब्जा न हटाने पर शासकीय अमले द्वारा अतिक्रमण ढहाया जाएगा और ध्वस्तीकरण का पूरा खर्च अनावेदिका से भू-राजस्व की तरह वसूला जाएगा।
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यह नोटिस 15 जुलाई 2026 को तामील भी कराया जा चुका है। किंतु विडंबना देखिए, समयावधि खत्म हुए महीनों बीत जाने के बाद भी न तो अहाता ढहाया गया और न ही कब्जा मुक्त कराया गया।
कलेक्टर जनदर्शन तक पहुँचा मामला: क्या अब जागेगा प्रशासन?
पत्रकार एवं आर.टी.आई. कार्यकर्ता जितेन्द्र कुमार साहू द्वारा 07 सितंबर 2026 को कलेक्टर जनदर्शन टोकन नं. 2050126003407 में पुनः लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है:
* क्या नियम-कानून केवल गरीबों के लिए हैं?
* क्या रसूखदारों के आगे बेदखली आदेश और राजस्व संहिता की धारा 248 बेअसर है?
* क्या जिला प्रशासन निष्पक्षता दिखाते हुए शासकीय वन भूमि पर तत्काल बुलडोजर चलाकर बेदखली की कार्रवाई करेगा?
जनता और मीडिया की नजरें अब जिला कलेक्टर कोरबा पर टिकी हैं कि क्या इस रसूखदार बेजा-कब्जे पर त्वरित दंडात्मक कार्रवाई कर शासकीय वन संपदा को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जाएगा या सरकारी आदेश इसी तरह फाइलों में दबे रहेंगे!





