कोरबा नगर पालिक निगम में बड़ा खेल: लाइट खरीदी में करोड़ों के घोटाले की आशंका, आरटीआई से जानकारी छिपाने पर भड़के आवेदक ने ठोकी प्रथम अपील

कोरबा/छ.ग : छत्तीसगढ़ के ऊर्जा नगरी कहे जाने वाले कोरबा जिले में नगर पालिक निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली एक बार फिर बड़े सवालों के घेरे में आ गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान निगम द्वारा की गई लाखों-करोड़ों रुपए की लाइट खरीदी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता की आशंका गहराने लगी है। मामले का खुलासा तब हुआ जब सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई बुनियादी जानकारियों को दबाने और छिपाने का प्रयास किया गया, जिससे अब निगम के अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
कोरबा के पथरींपारा निवासी सतर्क नागरिक जितेंद्र कुमार साहू ने नगर पालिक निगम, कोरबा के जन सूचना अधिकारी के समक्ष गत 11 सितंबर 2026 को आरटीआई अधिनियम-2005 के तहत एक आवेदन प्रस्तुत किया था। इस आवेदन में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान शहर में लगाई गई और क्रय की गई लाइटों का कच्चा-चिट्ठा मांगा गया था।
आवेदक द्वारा निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्ट और प्रमाणित दस्तावेजों की मांग की गई थी:

* स्वीकृत बजट और आवंटन: उक्त दोनों वित्तीय वर्षों में लाइट क्रय हेतु स्वीकृत कुल बजट, आवंटित राशि और प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति आदेश की सत्यापित प्रतियां।
* टेंडर और फर्मों की सूची: खरीदी के लिए जारी टेंडर नोटिस, भाग लेने वाली फर्मों के नाम, क्रय आदेश और स्वीकृत दरों की कॉपियां।
* सामग्री का विवरण: क्रय की गई लाइटों के प्रकार , कुल संख्या, प्रति नग दर तथा वारंटी अवधि की जानकारी।
* स्टॉक और भुगतान: मेन स्टोर के स्टॉक रजिस्टर की प्रविष्टियों की प्रति, ठेकेदारों को किए गए बिल भुगतानों का विवरण और माप पुस्तिका की प्रतियां।
जानकारी छिपाने से बढ़ा भ्रष्टाचार का शक
नियमों के मुताबिक आरटीआई आवेदन पर तय समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराई जानी थी, लेकिन नगर पालिक निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने या तो टालमटोल रवैया अपनाया या फिर भ्रष्टाचार की फाइलों पर पर्दा डालने के लिए जानकारी देने से ही कन्नी काट ली। जानकारों का मानना है कि यदि लाइट खरीदी पारदर्शी तरीके से हुई होती, तो दस्तावेज देने में इतनी आनाकानी क्यों की जाती? समय पर सूचना न मिलने से इस बात की प्रबल आशंका जताई जा रही है कि खरीद-फरोख्त में बड़े पैमाने पर बंदरबाँट और वित्तीय गड़बड़ी हुई है।
प्रथम अपीलीय अधिकारी के दरबार में पहुंचा मामला
जन सूचना अधिकारी द्वारा तय समय में संतोषजनक जानकारी न मिलने पर आवेदक जितेंद्र कुमार साहू ने कड़ा रुख अपनाते हुए 12 अक्टूबर 2026 को प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं अधीक्षण अभियंता, नगर पालिक निगम, कोरबा के समक्ष प्रथम अपील दर्ज करा दी है।
अपील में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जन सूचना अधिकारी द्वारा या तो जानकारी दी नहीं गई या फिर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। अपीलार्थी ने नियमानुसार 50 रुपए का शुल्क/स्टाम्प शुल्क जमा करते हुए समस्त चाही गई प्रमाणित प्रतियां तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है।
निगम प्रशासन पर उठ रहे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने कोरबा नगर निगम के अंदर चल रहे खेल को बेनकाब कर दिया है। सवाल यह उठता है कि यदि सब कुछ पारदर्शी था, तो लाइट खरीदी के बिल, स्टॉक एंट्री और टेंडर के कागजात सार्वजनिक करने से निगम प्रशासन क्यों डर रहा है? क्या शहर की जनता के गाढ़े पसीने की कमाई का पैसा कागजों में लाइटें चमकाकर कागजों में ही डकार लिया गया?
अब देखना यह होगा कि प्रथम अपीलीय अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या निगम प्रशासन सच को सामने लाता है, या फिर फाइलों के इस खेल पर पर्दा डालने की कोशिशें और तेज होती हैं। अगर समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला उच्च स्तर तक तूल पकड़ सकता है, जिससे निगम के कई रसूखदारों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।





