सक्ती जिले के सुदूर पहाड़ी अंचल के नवागांव में अघोरपीठ संस्थान बोईरडीह ने जरूरतमंदो में बांटे कंबल
सभी के प्रति मन में करूणा व मैत्री का भाव जगाएं : पुनीत शाही बाबा अघोर संत

सक्ती : आज समाज में लोग बहुत पीड़ा वह कष्टों से गुजर रहे हैं। समाज में लोगों के बीच कटुता का भाव भर गया है। आपसी सामंजस्य घट रहा है। एक दूसरे पर विश्वास घट रहा है। पुराने दिनों में गांव परिवार हुआ करता था आज गांव में परिवार हो गए हैं। आप सभी आने वाली पीढ़ी इस चीज को निर्धारित करे कि हम पुनः गांव व समाज को एक परिवार बनाएंगे। उक्त बातें अघोरपीठ जन सेवा अभेद आश्रम बोईरडीह के गुरू बाबा पुनीत शाही ने कही है। वे बीते 25 जनवरी को सक्ती जिले के सुदूर पहाड़ी अंचल के नवागांव पहुंचे हुए थे।
आदिवासी बाहुल्य बस्ती नवागांव में ग्राम वासियों को संबोधित करते हुए अघोर संत गुरू बाबा पुनीत शाही ने आगे कहा कि आप सभी आपस में एक दूसरे का विश्वास हासिल करेंगे। एक दूसरे के जीवन में मानवता के गुणों को अपनाते हुए सबके साथ दया करुणा व मैत्री का भाव रखेंगे। ऐसी भावना आप सभी दिलों में रखेंगे तो इस गांव में हमारा आना सार्थक हो सकेगा। उन्होने आगे कहा अगर हम ईश्वर को मानते हैं तो सिर्फ ईश्वर को मानना ही नहीं है बल्कि हमें ईश्वर की भी माननी पड़ेगी। अघोर संत बाबा पुनीत शाही ने बताया कि आप सभी अपने जीवन को सरल बनाइए कठिन नहीं। इसके लिए आप सब ईमानदार रहिए। किसी के प्रति छल कपट का भाव मन में न रखें। सभी ईमानदारी के साथ जीवन जीएं। एक दूसरे पर करूणा करें तो हमारा जीवन सरल बन सकेगा। गौरतलब हो कि अघोरपीठ जनसेवा अभेद आश्रम बोईरडीह की ओर से सक्ती जिले के घुईचुआं पंचायत के आश्रित नवागांव में गरीब व जरूरतमंदो में कंबल वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
इस कार्यक्रम में अघोरपीठ संस्थान की ओर से नवागांव के 80 जरूरतमंद लोगों को कंबल बांटे गए। इस अवसर पर बाबा पुनीत शाही के संग उदय मधुकर , रेवती नंदन पटेल, योम प्रकाश लहरे, आश्रम के उनके शिष्यगणों सहित बड़ी संख्या में गांव के लोग उपस्थित रहे। इसके पहले अघोर संत गुरू बाबा पुनीत शाही के नवागांव पहुंचने पर ग्रामीण महिलाओं सहित सभी माता बहनों सहित ग्रामवासियों ने अपने गुरु बाबा का आत्मीय अभिनंदन किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक पूजा अर्चना के साथ हुआ। इस मौके पर गांव की महिलाओं ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक नृत्य करमा तथा सुआ नृत्य की सुंदर प्रस्तुति देकर अपने गुरू बाबा को नमन किया। वहीं कार्यक्रम का संचालन देव जायसवाल ने किया।








































