जनता के आक्रोश के आगे झुका प्रबंधन, कुचेना अंडरब्रिज से 24 घंटे में शुरू होगी दोपहिया वाहनों की आवाजाही विहिप जिलाध्यक्ष और पार्षदों की तीखी फटकार के बाद ठेकेदार और कंपनी प्रबंधन ने टेक घुटने, त्योहार के समय मार्ग बंद करने पर भड़के थे लोग
सतपाल सिंह
जनता के आक्रोश के आगे झुका प्रबंधन, कुचेना अंडरब्रिज से 24 घंटे में शुरू होगी दोपहिया वाहनों की आवाजाही
विहिप जिलाध्यक्ष और पार्षदों की तीखी फटकार के बाद ठेकेदार और कंपनी प्रबंधन ने टेक घुटने, त्योहार के समय मार्ग बंद करने पर भड़के थे लोग..

कोरबा (कुसमुंडा)। कुसमुंडा क्षेत्र के कुचेना रेलवे अंडरब्रिज मार्ग को बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक बंद किए जाने से उपजा जन-आक्रोश आखिरकार रंग लाया। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के जिलाध्यक्ष और क्षेत्रीय पार्षदों के कड़े रुख और तीखी फटकार के बाद निर्माण कंपनी और ठेकेदार को बैकफुट पर आना पड़ा है। कंपनी प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि अगले 24 घंटे के भीतर इस मार्ग से दोपहिया वाहनों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी। वहीं, अगले 3 से 4 दिनों में चार पहिया वाहनों के लिए भी रास्ता पूरी तरह सुचारू कर दिया जाएगा।

बिना सूचना मार्ग बंद करने से बढ़ी मुसीबतें
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार की शाम को निर्माण एजेंसी द्वारा बिना किसी पूर्व मुनादी या सूचना के कुचेना रेलवे अंडरब्रिज मार्ग को अचानक बैरिकेड लगाकर पूरी तरह बंद कर दिया गया था। इससे इस मार्ग से आने-जाने वाले सैकड़ों राहगीर और स्थानीय लोग बीच रास्ते में ही फंस गए। ऐन दीपावली त्योहार के समय मुख्य मार्ग बंद होने से लोगों को 4 से 5 किलोमीटर का लंबा चक्कर काटने पर मजबूर होना पड़ा, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर भी बुरा असर पड़ रहा था। साथ ही, घुमावदार रास्तों के कारण दुर्घटनाओं का अंदेशा भी बढ़ गया था।
मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधि, काम रुकवाने की दी चेतावनी
जैसे ही इस मनमानी की खबर विहिप के जिला अध्यक्ष अमरजीत सिंह, क्षेत्रीय प्रेम साहू और आरती लखन सिंह को मिली, वे तुरंत स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंच गए। जनप्रतिनिधियों ने स्थिति का जायजा लिया और तत्काल संबंधित ठेकेदार तथा निर्माण कंपनी के आला अधिकारियों को मौके पर तलब किया।
अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए विहिप जिलाध्यक्ष अमरजीत सिंह ने कड़ी फटकार लगाई और कहा, “त्योहार के सीजन में बिना किसी पूर्व सूचना के जनता को इस तरह परेशान करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आम लोगों के लिए तुरंत रास्ता नहीं निकाला गया, तो निर्माण कार्य को पूरी तरह ठप करा दिया जाएगा।
24 घंटे का अल्टीमेटम, प्रबंधन ने दी लिखित सहमति
जनप्रतिनिधियों के तीखे तेवर और ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए कंपनी और ठेकेदार ने तुरंत अपनी गलती स्वीकार की। आपसी बातचीत और दखल के बाद आखिरकार सहमति बनी कि अगले 24 घंटे के भीतर दोपहिया वाहनों को निकालने के लिए सुरक्षित व्यवस्था बना दी जाएगी। इसके साथ ही, बचे हुए निर्माण कार्य को युद्ध स्तर पर पूरा करते हुए अगले 3 से 4 दिनों में भारी और चार पहिया वाहनों के लिए भी मार्ग को पूरी तरह खोल दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद फिलहाल मामला शांत हुआ है, लेकिन ग्रामीणों ने साफ किया है कि यदि तय समय पर रास्ता नहीं खुला तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।





