1 नवंबर से बदल गए ये 5 बड़े नियम, LPG सिलेंडर से लेकर FASTag और GST तक जानें आम लोगों पर क्या होगा असर

नई दिल्ली : नवंबर महीने की शुरुआत के साथ ही देशभर में आम लोगों और कारोबारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव हुए हैं। इनका सीधा असर रसोई के बजट, मोबाइल यूजर्स, हाईवे पर सफर करने वालों, म्यूचुअल फंड निवेशकों और छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है। जहां कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है, वहीं FASTag और GST से जुड़े नए प्रावधानों से कुछ लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा अब अनजान नंबर से आने वाली कॉल पर कॉलर का असली नाम भी दिखाई दे सकता है। आइए जानते हैं 1 नवंबर से लागू हुए पांच बड़े बदलावों के बारे में।
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1. कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ महंगा
नवंबर की शुरुआत में तेल कंपनियों ने कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में 17 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। इसका असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों पर पड़ेगा। गैस की कीमत बढ़ने से इन कारोबारियों की लागत में इजाफा हो सकता है, जिसका असर खाने-पीने की चीजों के दाम पर भी देखने को मिल सकता है।
हालांकि, घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के LPG सिलेंडर की कीमत में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है।
2. अनजान नंबर से कॉल आने पर दिखेगा कॉलर का नाम
मोबाइल यूजर्स के लिए भी एक अहम बदलाव हुआ है। अब अनजान नंबर से फोन आने पर सिर्फ मोबाइल नंबर नहीं, बल्कि कॉल करने वाले का नाम भी स्क्रीन पर दिखाई देगा। यह नाम सिम कार्ड लेते समय जमा किए गए आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज जानकारी के आधार पर प्रदर्शित किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी कॉल और साइबर धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद करना है। इससे लोगों को अनजान कॉल की पहचान करने के लिए Truecaller जैसे थर्ड पार्टी ऐप पर निर्भरता कम करनी पड़ सकती है। हालांकि, कॉलर का नाम दिखाई देने मात्र से हर तरह की धोखाधड़ी रुकने की गारंटी नहीं होगी।
3. टोल प्लाजा के आसपास रहने वालों को FASTag पास की सुविधा
हाईवे पर सफर करने वाले निजी वाहन मालिकों के लिए भी नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले पात्र वाहन मालिक निर्धारित शुल्क देकर एक साल का लोकल FASTag पास ले सकेंगे।
इस पास के लिए 1,500 रुपये या 3,000 रुपये की फीस का प्रावधान बताया गया है। इससे उन लोगों को राहत मिल सकती है, जिन्हें नौकरी, कारोबार या अन्य जरूरी कामों के लिए रोजाना टोल प्लाजा से गुजरना पड़ता है। हालांकि, इस सुविधा का लाभ निर्धारित पात्रता और नियमों के अनुसार ही मिलेगा।
4. म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए डायरेक्ट प्लान होगा डिफॉल्ट विकल्प
म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए भी नया प्रावधान लागू हुआ है। अब म्यूचुअल फंड कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निवेश करते समय डायरेक्ट प्लान डिफॉल्ट विकल्प के रूप में दिखाई देगा। वहीं, रेगुलर प्लान चुनने वाले निवेशकों को उससे जुड़े अतिरिक्त खर्च की जानकारी दी जाएगी।
दरअसल, रेगुलर प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन शामिल होता है, जिसके कारण इसका एक्सपेंस रेशियो डायरेक्ट प्लान की तुलना में अधिक हो सकता है। अलग-अलग फंड के आधार पर यह अंतर करीब 0.66 से 1.7 प्रतिशत तक बताया गया है।
डायरेक्ट प्लान में निवेशक सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी के माध्यम से पैसा लगाते हैं। इसमें डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन नहीं देना पड़ता, जिससे लंबे समय में निवेश की लागत कम हो सकती है। हालांकि, निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम का आकलन करना जरूरी है।
5. छोटे ऑनलाइन कारोबारियों को GST में राहत
छोटे ई-कॉमर्स कारोबारियों के लिए भी GST से जुड़ा नया प्रावधान लागू किया गया है। इसके तहत पात्र छोटे विक्रेताओं को दूसरे राज्यों में सामान बेचने के लिए अलग-अलग राज्यों में कार्यालय खोलने की जरूरत से राहत मिल सकती है।
नए नियम के अनुसार, कारोबारी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के गोदाम के पते का इस्तेमाल दूसरे राज्यों में GST रजिस्ट्रेशन के लिए कर सकेंगे। इससे Amazon और Flipkart जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
इस बदलाव का उद्देश्य छोटे कारोबारियों के लिए दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंच आसान बनाना और कारोबार से जुड़ी अतिरिक्त लागत को कम करना है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इससे करीब 9.5 लाख छोटे कारोबारियों और सप्लायर्स को लाभ मिलने की उम्मीद है।
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आम लोगों की जेब और कारोबार पर पड़ेगा असर
1 नवंबर से लागू हुए इन पांच बदलावों का असर अलग-अलग वर्गों पर देखने को मिल सकता है। कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने से होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। वहीं, कॉलर नेम सिस्टम से मोबाइल यूजर्स को अनजान कॉल पहचानने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा लोकल FASTag पास से पात्र वाहन मालिकों को राहत मिलेगी, जबकि म्यूचुअल फंड में डायरेक्ट प्लान को डिफॉल्ट विकल्प बनाने से निवेशकों को खर्च की जानकारी मिलेगी। GST के नए प्रावधान से छोटे ऑनलाइन कारोबारियों के लिए दूसरे राज्यों में कारोबार करना आसान हो सकता है।





