छत्तीसगढ़ में 5 करोड़ का बैंक लोन घोटाला, 11 फर्जी फर्मों के जरिए हुई धोखाधड़ी; पूर्व मैनेजर समेत दो पर चालान

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बैंक ऑफ बड़ौदा की राजकिशोर नगर शाखा से 11 फर्जी फर्मों के नाम पर 5 करोड़ रुपये से अधिक का लोन लेने के मामले में EOW-ACB ने बड़ी कार्रवाई की है। करीब छह साल तक चली जांच के बाद एजेंसी ने तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा और विश्वजीत भौमिक के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान पेश किया है। दोनों पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक को 5 करोड़ 4 लाख 15 हजार रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप है।
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2019 में ही डूब गए थे सभी 11 लोन खाते
बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर की शिकायत पर 28 जनवरी 2020 को EOW-ACB ने मामला दर्ज किया था। जांच में पता चला कि 20 मार्च 2018 से 3 मई 2019 के बीच तत्कालीन शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने बैंकिंग नियमों की अनदेखी कर 11 अपात्र फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन स्वीकृत किए थे। इन सभी खातों को वर्ष 2019 में ही NPA घोषित कर दिया गया था।
लोगों के दस्तावेजों से बनाई गईं फर्जी फर्में
जांच में सामने आया कि विश्वजीत भौमिक लोगों को छोटे ऋण दिलाने के बहाने उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, KYC और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज हासिल करता था। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उसने संबंधित लोगों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्जी फर्में तैयार कीं। कुछ फर्मों में अपने कर्मचारियों को प्रोप्राइटर भी दिखाया गया। जांच में तीन फर्मों के दुकान एवं स्थापना पंजीयन प्रमाणपत्र फर्जी मिले।
फर्मों के नाम पर नहीं मिला कोई कारोबार
EOW-ACB की जांच में पता चला कि बैंक मैनेजर ने लोन स्वीकृत करने से पहले फर्मों के व्यवसाय और पते को लेकर गलत जानकारी निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज की थी। कुछ मामलों में असंबंधित लोगों की संपत्तियों को उनकी जानकारी के बिना गिरवी दिखाया गया। बैंक के निरीक्षण के दौरान किसी भी फर्म के पते पर वास्तविक कारोबार नहीं मिला।
भौमिक की फर्म तक पहुंचाई गई लोन की रकम
जांच एजेंसी के मुताबिक, बैंक से मिली लोन की रकम का इस्तेमाल संबंधित फर्मों के कारोबार में नहीं हुआ। पैसे को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर निकाला गया। जांच में विश्वजीत भौमिक को इस पूरे मामले का अंतिम लाभार्थी पाया गया। लोन की रकम राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC) के माध्यम से उसकी फर्म ए.बी. फास्टनर्स तक पहुंचाई गई। इसके अलावा कूटरचित बिलों के आधार पर NSIC रायपुर से भी भुगतान प्राप्त किया गया।
दोनों आरोपियों के खिलाफ चालान पेश
EOW-ACB ने विश्वजीत भौमिक और राहुल कुमार सिन्हा के खिलाफ IPC की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-B के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 12 और 13(2) के तहत चालान पेश किया है। राहुल कुमार सिन्हा वर्तमान में गुजरात के कच्छ जिले की गढ़सीसा शाखा में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर पदस्थ हैं।





